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    GST काउंसिल की बैठक में मुआवजे पर नहीं बनी बात, राज्यों को खुद ही लेना होगा कर्ज

    वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की बैठक क्षतिपूर्ति मुद्दे पर बिना हल के खत्‍म हो गई.  (File Photo)
    वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की बैठक क्षतिपूर्ति मुद्दे पर बिना हल के खत्‍म हो गई. (File Photo)

    GST Council Meeting Update: वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने बैठक के बाद कहा कि राज्‍यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति भुगतान को लेकर सहमति नहीं बन पाई. इस मामले पर साफ है कि राज्‍यों को इस साल जीएसटी कलेक्‍शन में कमी के कारण घटे राजस्‍व की भरपाई के लिए कर्ज लेना होगा. इसके लिए केंद्र सरकार कर्ज नहीं लेगी. वहीं, जीएसटी कॉम्‍पनसेशन सेस को 5 साल से ज्यादा वक्त के लिए टाल दिया गया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 13, 2020, 1:21 PM IST
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    नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) की अगुवाई में जीएसटी काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) खत्म हो गई है. बैठक के दौरान जीएसटी कलेक्‍शन में कमी के कारण राज्‍यों को राजस्‍व नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति भुगतान को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका. दरअसल, क्षति​पूर्ति पर केंद्र की ओर से उपलब्ध कराए गए दो विकल्पों पर रात तक चली बैठक में सभी राज्य एकमत नहीं हुए. बता दें कि आज की बैठक 5 अक्टूबर को हुई जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक का ​ही हिस्सा थी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई इस बैठक में वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur), सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री (Finance Ministers) ने हिस्सा लिया.

    5 साल से ज्‍यादा समय के लिए टाल दिया गया है सेस
    वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद बताया कि जीएसटी क्षतिपूर्ति भुगतान को लेकर सभी राज्‍यों के बीच सहमति नहीं बन पाई. इस मामले पर साफ है कि राज्‍यों को इस साल जीएसटी कलेक्‍शन में कमी के कारण घटे राजस्‍व की भरपाई के लिए कर्ज लेना होगा. इसके लिए केंद्र सरकार कर्ज नहीं लेगी.

    बैठक के दौरान सेस, सेस कलेक्शन और सेस कलेक्शन पीरियड बढ़ाने जैसे कई अहम मसलों पर चर्चा हुई. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी कॉम्‍पनसेशन सेस को 5 साल से ज्यादा वक्त के लिए टाल दिया गया है. साथ ही साफ किया कि राज्‍यों को ये कर्ज सेस के जरिये चुकाना है. इससे उन पर कोई अतिरिक्‍त बोझ नहीं पड़ेगा. उन्‍होंने सभी राज्‍यों से इस मामले का समाधान निकालने के लिए एकमत होने की अपील की.




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    केंद्र ने राज्‍यों को राजस्‍व भरपाई के लिए दिए थे दो विकल्‍प
    अगस्त 2020 में हुई काउंसिल की बैठक में केंद्र ने जीएसटी की भरपाई के लिए दो विकल्प सुझाए थे. पहला, राज्यों को स्पेशल विंडो मुहैया कराई जाएगी. इसके तहत वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से कर्ज ले सकते हैं. इसमें कम ब्याज दर पर राज्यों को 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज मिल सकता है. इस रकम को 2022 तक सेस कलेक्शन से जमा किया जा सकता है. केंद्र ने दूसरे विकल्प के तौर पर कहा था कि स्पेशल विंडो के तहत पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये कर्ज लिया जा सकता है. इस पर देश के 21 राज्यों ने समर्थन किया था.

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    10 गैर-भाजपा शासित राज्‍यों ने कर्ज लेने से किया इनकार
    उधार लेने के विकल्‍प से सहमत राज्‍यों के पास सितंबर 2020 के मध्‍य तक 97,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने का मौका था. हालांकि, 10 गैर-भाजपा शासित राज्‍यों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि केंद्र लोन लेकर उन्हें जीएसटी मुआवजे की भरपाई करे. बता दें कि अब तक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुड्डुचेरी, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और यूपी ने कर्ज का विकल्प चुन लिया है.
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