फर्जी रसीद से मोदी सरकार को लगाया करोड़ों का चूना! जानिए पूरा मामला

अब तक पकड़ी गई कुल 49 हजार करोड़ रुपये की GST चोरी! ऐसे हुए खुलासा
अब तक पकड़ी गई कुल 49 हजार करोड़ रुपये की GST चोरी! ऐसे हुए खुलासा

फेक इनवॉइस के ज़रिए सरकार को धोखेबाज़ करोड़ों का चूना लगा रहे है. GST इंटेलिजेंस ने पिछले के साल के दौरान कुल 49,158 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरियां पकड़ी है.

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फेक इनवॉइस के ज़रिए सरकार को धोखेबाज़ करोड़ों का चूना लगा रहे है. GST इंटेलिजेंस ने पिछले के साल के दौरान कुल 49,158 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरियां पकड़ी है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले GST चोरी 85 फीसदी बढ़ी.हालांकि सख्त नियमों के चलते सरकारी की रिकवरी भी तेज हुई है. पिछले एक साल के दौरान रिकवरी में 300 फीसदी का इजाफा हुआ है. आपको बता दें कि सख्त कदमों के बाद अप्रैल महीने में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख 13 हजार 865 करोड़ रुपये रहा है. जीएसटी लागू होने के बाद से किसी एक महीने में हुआ अभी तक का सबसे ज्यादा कलेक्शन है. वहीं, मार्च महीने में 1.06 लाख करोड़ रुपये रहा था.

पकड़ी गई 49158 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी
>> साल 2018-19 में जीएसटी चोरी के कुल 3767 मामले पकड़े गए .
>> जीएसटी चोरी में पिछले साल के मुकाबले 85 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.
>> ज्यादातर मामलों में फर्जी इनवाइस के ज़रिए चोरी करने की कोशिश की गई.
>> इसके अलावा शेल कंपनियों के ज़रिए सिर्फ कागज़ों पर सप्लाई हुई.


>> सर्कुलर ट्रेडिंग के ज़रिए इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने के मामले भी सामने आए हैं.
>> फर्जी इनवाइस के ज़रिए 4000 करोड़ रुपये का ITC क्लेम लिया गया.
>> पिछले साल  2313 मामलों में पकड़े 26,557 करोड़ रुपये की GST चोरी पकड़ी गई थी.
>> 2522 मामलों में कुल 11853 करोड़ रुपए की रिकवरी की गई है.
>> 300 फीसदी बढ़ी रिकवरी, पिछले साल सिर्फ 2914 करोड़ रुपए मिले है.

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अब आगे क्या-जीएसटी अधिकारी ऐसा सिस्टम बनाने पर काम कर रहे हैं जिसमें एक निश्चित सीमा से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों को सरकारी या जीएसटी पोर्टल पर हर बिक्री के लिए ई-इनवॉइस निकालना होगा. शुरुआत में एक निश्चित सीमा से अधिक के टर्नओवर करने वालों को हर इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस (ई-इनवॉइस) पर एक खास नंबर मिलेगा. (ये भी पढ़ें-अगर आपके पास है छत तो घर बैठे ऐसे करें लाखों की कमाई)

इसका सेल्स रिटर्न में दर्शाए इनवॉइस और चुकाए टैक्स से मिलान किया जा सकेगा. एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया, आगे चलकर कंपनियों को अपनी पूरी बिक्री का पूरा इलेक्ट्रॉनिक टैक्स इनवॉइस (ई-इनवॉइस) निकालना अनिवार्य होगा.



वित्त वर्ष 2018-19 में जीएसटी कलेक्शन-
>> अप्रैल 2018- 1.03 लाख करोड़ रुपये
>> मई 2018- 94,016 करोड़ रुपये
>> जून 2018- 95,610 करोड़ रुपये
>> जुलाई 2018- 96,483 करोड़ रुपये
>> अगस्त 2018- 93,960 करोड़ रुपये
>> सितंबर 2018- 94,442 करोड़ रुपये
>> अक्टूबर 2018- 1,00,710 करोड़ रुपये
>> नवंबर 2018- 97,637 करोड़ रुपये
>> दिसंबर 2018- 94,725 करोड़ रुपये
>> जनवरी 2019- 1.02 लाख करोड़ रुपये
>> फरवरी 2019- 97,247 करोड़ रुपये
>> मार्च 2019- 1.06 लाख करोड़ रुपये

(आलोक प्रियदर्शी, सीएनबीसी आवाज़)
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