GST ने Mutual Fund इंडस्ट्री की भी बढ़ाईं मुश्किलें

GST ने Mutual Fund इंडस्ट्री की भी बढ़ाईं मुश्किलें

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2017, 12:16 PM IST
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भारतीय म्युचुअल फंड इंडस्ट्री भी जीएसटी से परेशान है. इनका कहना है कि 18 फीसदी जीएसटी से उनके निवेशकों को तो कोई दिक्कत नहीं है, मगर उनके डिस्ट्रिब्यूटर बहुत परेशान हैं. यही नहीं अगर सरकार शेयर बाजार में छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना चाहती है तो इसके लिए म्युचुअल फंड इंडस्ट्री पर जीएसटी को कम से कम रखना चाहिए या हटा देना चाहिए.

भारतीय म्युचुअल फंड इंडस्ट्री पिछले तीन सालों से 113 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है. एएएफएम के वेल्थ मैनेजमेंट कंवेशन में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, म्युचुअल फंड में एएएफएम यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट नवंबर में 22 लाख 79 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. अक्टूबर में एयूएम 21 लाख 41 हजार करोड़ रुपये था. मौजूदा कारोबारी साल के आठ महीनों में से हर महीने में करीब 9 लाख एसआईपी जुड़े हैं.

जानकारों का कहना है कि आम आदमी ने एसआईपी में बड़े पैमाने पर निवेश करना शुरू कर दिया है. ऐसे में इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए इस पर लगे 18 फीसदी जीएसटी को कम करना चाहिए. उनका तर्क है की इससे छोटे डिस्ट्रिब्यूटर को काफी दिक्कत हो रही है.



20 लाख रुपये के टर्नओवर वाले एजेंट को जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड करने का फैसला बेतुका है, क्योंकि दोनों रजिस्टर्ड और अनरजिस्ट्रर्ड एजेंट अपनी आय पर 18 फीसदी का भुगतान करेंगे. सबसे खराब असर उन पर होगा जो 10 लाख रुपये तक कमाते है, क्योंकि उन्हें पहले 15 फीसदी सर्विस टैक्स देने से छूट मिली थी. लगभग 70 से 80 हजार डिस्ट्रिब्यूटर्स इससे सीधे प्रभावित होंगे, जो सालाना 20 लाख से कम कमाते हैं. हालांकि म्युचुअल फंड कंपनियां एजेंट्स को सहारा देने की पूरी कोशिश कर रही हैं.
2016 में पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र सलाहकार और डिस्ट्रिब्यूटर्स म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में करीब आधा माल बेचते हैं. डायरेक्ट सेलिंग और निवेशकों को जागरूक बनाने के लिए अभियान के बावजूद लोगों के इंडिविजुअल निवेश का लगभग 90 प्रतिशत एजेंट्स के जरिए आता है, ऐसे में म्युचुअल फंड उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए उनको बचाना बहुत जरूरी है.
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