रियल टाइम डाटा से लैस हाेंगे जीएसटी अधिकारी, बिना ई-वे के चलने वाले वाहनाें काे तुरंत कर सकेंगे ट्रेस

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत अप्रैल 2018 से ई-वे बिल अनिवार्य है.

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत अप्रैल 2018 से ई-वे बिल अनिवार्य है.

ई-वे बिल पर सरकार की एक रिपाेर्ट में यह बात सामने आई थी कि मार्च 2021 तक तीन साल की अवधि में 180 कराेड़ ई-वे बिल सृजित किए गए है. जिसमें से केवल 7 कराेड़ बिलाें का सत्यापन ही अधिकारी कर पाए थे.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Govt of India) एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें जीएसटी अधिकारियाें (GST officers) काे रियल टाइम डाटा उपलब्ध (Real time data ) कराया जाएगा, जहां वाहन बिना ई-वे बिल्स (E-Way Bills) के घूम रहे हाेंगे. इस सिस्टम के साथ जीएसटी अधिकारी ऐसे ट्रकाें काे टाेल प्लाजा पर राेक कर चैकिंग कर सकेंगे. इतना ही नहीं टैक्स ऑफिसर्स काे ऐसी एनालिसिस रिपाेर्ट उपलब्ध करवाई जाएगी जिसमें अधिकारी यह देख सकेंगे कि जिन मामलाें में ई-वे बिल है लेकिन वाहनाें का मूवमेंट नहीं है जिससे सर्कुलर ट्रेडिंग (इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयाेग के लिए फर्जी बिक्री साैदा दिखाने की धाेखाधड़ी) के मामले सामने आ सकेंगे, साथ ही कर चाेराें की पहचान करने के लिए ई-वे बिल के रिसाइकलिंग हुए बिल की जानकारी भी हाेगी.



अनिवार्य है ई-वे बिल



मालूम हाे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तहत अप्रैल 2018 से 50,000 रुपये से अधिक के मूल्य के माल के अंतर-राज्य परिवहन ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया गया है. हालांकि इसमें गाेल्ड लाने ले जाना शामिल नहीं है. सरकार अब जीएसटी अधिकारियाें के लिए आरएफआईडी (रेडियाे फ्रीक्वेंसी आइडेन्टिफिकेशन) पर वास्तविक समय और विश्लेषण रिपाेर्ट पर भी काम कर रही है. जिससे ई-वे बिल प्रणाली के दुरूपयाेग कर रहे लाेगाें पर शिकंजा चढ़ाया जा सकेगा. 



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180 कराेड़ के ई-वे बिल





ई-वे बिल पर सरकार की एक रिपाेर्ट में यह बात सामने आई थी कि मार्च 2021 तक तीन साल की अवधि में 180 कराेड़ ई-वे बिल सृजित किए गए है. जिसमें से केवल 7 कराेड़ बिलाें का सत्यापन ही अधिकारी कर पाए थे. वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6 1.68 कराेड़ के ई-वे बिल के एवज में सिर्फ 2.27 कराेड़ का सत्यापन किया गया था. वहीं बात यदि वित्तीय वर्ष 2019-20 की करे ताे इस दाैरान 62.88 कराेड़ ई-वे बिल जनरेट हुए जिसमें से कर अधिकारियाें ने 3.01 कराेड़ काे सत्यापन के लिए चुना.



इन पांच राज्याें में सबसे ज्यादा जनरेट हुए ई-वे बिल



रिपाेर्ट के अनुसार जिन पांच राज्याें में सर्वाधिक ई-वे बिल जनरेट हुए उनमें महाराष्ट्र , गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा व तमिलनाडू शामिल है. वहीं जिन पांच क्षेत्राें में इस दाैरान कपड़ा, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण, इलेक्ट्रिक मशीनरी, लाेहा, इस्पात तथा वाहन क्षेत्र में पिछले तीन साल में सबसे अधिकतम संख्या में ई-वे बिल सृजित किए गए.


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