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मोबाइल फोन समेत इन चीजों पर बढ़ सकती हैं GST की दरें! जानिए किस प्रोडक्ट पर बढ़ेगा कितना टैक्स

News18Hindi
Updated: December 24, 2019, 2:11 PM IST

जीएसटी (GST) की दरें बढ़ाने पर बनी कमिटी ने कई अहम सिफारिशें की हैं, जिन पर विचार किया जाएगा. जीएसटी कमिटी ने जीएसटी के तहत दो टैक्स रेट करने की सिफारिश की है.

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  • Last Updated: December 24, 2019, 2:11 PM IST
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नई दिल्ली. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की दरों में जल्द बड़े बदलाव हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने भले ही अभी कोई फैसला ना लिया हो, लेकिन लंबे समय तक टालना मुश्किल है. जीएसटी की दरें बढ़ाने पर बनी कमिटी ने कई अहम सिफारिशें की हैं, जिन पर विचार किया जाएगा. आपको बता दें कि पिछले हफ्ते जीएसटी काउंसिल की 38वीं बैठक हुई. इसमें  राज्यों और निजी क्षेत्र की लॉटरी के लिये 28 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया. लॉटरी की नई दरें मार्च 2020 से लागू होंगी.

GST की दरें बढ़ाने पर बनी कमिटी की सिफारिशें-

विकल्प 1- जीएसटी कमिटी ने जीएसटी के तहत दो टैक्स रेट करने की सिफारिश की है. कमिटी के मुताबिक, 10 फीसदी और 20 फीसदी के दो टैक्स रेट होंगे. SIN और लग्जरी गुड्स पर स्पेशल हाई रेट लगाए जाएं. वहीं कॉसमेटिक्स, गैंबलिंग जैसे आइटम्स पर सेस लगाया जाए. सेस (Cess) की मौजूदा दरों में बढ़ोतरी की जाए. महंगाई दर से सेस की दरों को जोड़ दिया जाए. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए कंपोजिशन रेट बढ़ाया जाए. कंपोजिशन स्कीम के तहत आने वाले कारोबार की समीक्षा की जाए. ये भी पढ़ें: ट्रेन में इतने रुपये तक महंगा होगा ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर, IRCTC को रेल मंत्रालय ने दी दाम बढ़ाने की मंजूरी



विकल्प 2- कमिटी ने सिफारिश की है कि जिन-जिन आइटम्स पर जीएसटी नहीं लगता है, उनमें से कुछ आइटम्स पर जीएसटी लगाना चाहिए. हेल्थ और एजुकेशन के चुनिंदा सेवाओं पर जीएसटी की दरें बढ़ाई जाए. सोना-चांदी जैसे प्रिसियस मेटल पर जीएसटी 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी किया जाए. मोबाइल पर जीएसटी 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया जाए. 5 फीसदी के दायरे में आने वाले कई आइटम्स पर 12 फीसदी जीएसटी लगाया जाए. 12 फीसदी के दायरे में आने वाले कई आइटम्स पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जाए. जिन आइटम पर जीएसटी की दरें 28 फीसदी से 18 फीसदी लाया गया था, उनमें से कई पर फिर 28 फीसदी जीएसटी लगाया जाए.

वहीं इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने के लिए 23 आइटम पर ड्यूटी की दरें बढ़ाई जाए. फर्टिलाइजर, फुटवियर, ट्रैक्टर, फैब्रिक, फार्मा, इनवर्टर्स, एग्री मशीनरी, LED लाइट पर ड्यूटी बढ़ाई जाए. वाटर पंप, मेडिकल इक्विपमेंट पर ड्यूटी बढ़ाई जाए.

इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर ठीक नहीं करने की वजह से सालाना 20 हजार करोड़ रुपये का रिफंड. इन्वर्टेड ड्यूटी के तहत तैयार माल पर ड्यूटी कम होती है जबकि कच्चे माल पर ड्यूटी ज्यादा है. 

टैक्स चोरी रोकने के उपाय
इसके अलावा, जीएसटी चोरी से बचने के लिए फार्मा जैसे आइटम पर MRP के आधार दरें तय की जाएं.
जीएसटी चोरी से बचने के लिए कई आइटम पर उत्पादन क्षमता के आधार पर दरें तय की जाएं.

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क्यों जरूरी है टैक्स दरों की समीक्षा?
Cess की जरूरत के हिसाब से टैक्स वसूली में कमी. अगर रेवेन्यू ग्रोथ रेट 5 फीसदी होता है तो सेस में 2019-20 में 63,200 करोड़ रुपये की कमी, 2020-21 में 1,26,760 करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान, 2021-22 में 2,01,950 करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान जताया है.

अगर रेवेन्यू ग्रोथ रेट 10 फीसदी होता है तो 2020-21 में 96,360 करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान
2021-22 में 1,36,600 करोड़ रुपये की कमी होने का अनुमान है.

(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर, CNBC आवाज़)

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First published: December 24, 2019, 1:21 PM IST
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