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बिटक्वाइन पर लगने वाला है GST टैक्स! जानिए इसकी बड़ी वजह

Apple Pay users can now spend in Bitcoin

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दिसंबर में एक बिटक्वाइन (Bitcoin) की कीमत जहां 14 लाख रुपये थी. वहीं जनवरी आते-आते एक बिटक्वाइन की कीमत 25 लाख 55 हजार रुपये हो गई है. ऐसे में सरकार वर्चुअल करेंसी (Virtual currency) पर नजर बनाए रखने के लिए जीएसटी (GST) लगाने की तैयारी कर रही है.

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    नई दिल्ली. वर्चुअल करेंसी बिटक्वाइन पर निगरानी के लिए सरकार जल्द ही जीएसटी टैक्स लगाने की तैयारी की जारी है. इसके पीछे की बड़ी वजह पिछले कुछ दिनों में बिटक्वाइन की कीमत में होने वाली तेजी को बताया जा रहा है. आपको बता दें पिछले 30 दिनों में ही एक बिटक्वाइन की कीमत करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा बढ़ गई है. बीते दिसंबर में एक बिटक्वाइन की कीमत जहां 14 लाख रुपये थी. वहीं जनवरी आते-आते एक बिटक्वाइन की कीमत 25 लाख 55 हजार रुपये हो गई है. ऐसे में सरकार वर्चुअल करेंसी पर नजर बनाए रखने के लिए जीएसटी लगाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो और राजस्व खुफिया निदेशालय ने प्रस्ताव भेजा हुआ है.  

    RBI हुआ सतर्क- डिजिटल करेंसी में आने वाली तेजी को देखते हुए आरबीआई सतर्क हो गया है. आपको बता दें इस करंसी के उतार-चढ़ाव पर किसी का नियंत्रण नहीं है और न ही इसकी खरीद-फरोख्त पर दुनिया की किसी सरकार का नियंत्रण. ऐसे में सरकार इसकी मॉनिटरिंग करने के लिए इस पर जीएसटी लगा सकती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBIC) बिटक्वाइन पर 18 या 28 प्रतिशत जीएसटी लगा सकता है. जो कि इसकी हर बार ट्रेडिंग पर देना होगा. वहीं इसके बाद यदि कोई बिटक्वाइन बेचता है तो उसको उस पर हुए मुनाफे पर आयकर भी देना होगा.

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    बिटक्वाइन से 10 हजार करोड़ रुपये का मिलेगा टैक्स- सेंट्रल जीएसटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया आर्थिक एजेंसियां इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर चुकी हैं जिसमें कहा गया है कि अकेले बिटक्वाइन से 10 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी जनरेट हो सकता है. आपको बता दें फिलहाल बिटक्वाइन की ट्रेडिंग पर लगाम एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. ऐसे में इसकी वजह से रुपये, डॉलर या पौंड जैसी मुद्राओं पर असर पड़ने का खतरा खड़ा बना हुआ है. 

    क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी? बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है. इस करेंसी में कूट लेखन तकनीक का प्रयोग होता है. इस तकनीक के जरिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिससे इसे हैक करना बहुत मुश्किल है. यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम होती है. क्रिप्टोकरेंसी का परिचालन केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है, जो कि इसकी सबसे बड़ी खामी है.

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    जानिए कैसे होती है बिटकॉइन में ट्रेडिंग? बिटकॉइन ट्रेडिंग डिजिटल वॉलेट (Digital wallet) के जरिए होती है. बिटकॉइन की कीमत दुनियाभर में एक समय पर समान रहती है. इसलिए इसकी ट्रेडिंग मशहूर हो गई. दुनियाभर की गतिविधियों के हिसाब से बिटकॉइन की कीमत घटती बढ़ती रहती है. इसे कोई देश निर्धारित नहीं करता बल्कि डिजिटली कंट्रोल (Digitally controlled currency) होने वाली करंसी है. बिटकॉइन ट्रेडिंग का कोई निर्धारित समय नहीं होता है. इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बहुत तेजी से होता है.

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