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GST Tribunal: जल्‍द हो सकता है जीएसटी ट्रिब्‍यूनल का गठन, वित्‍त मंत्रालय कर सकता है GST काउंसिल का रुख

GST Tribunal: जल्‍द हो सकता है जीएसटी ट्रिब्‍यूनल का गठन, वित्‍त मंत्रालय कर सकता है GST काउंसिल का रुख

लंबित मांग को पूरा करते हुए जल्द देश में GST ट्रिब्यूनल का गठन किया जा सकता है. (File Pic)

लंबित मांग को पूरा करते हुए जल्द देश में GST ट्रिब्यूनल का गठन किया जा सकता है. (File Pic)

GST Tribunal : वस्तु और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के निर्माण से अप्रत्यक्ष कर मुकदमों के शीघ्र समाधान हो सकेगा, क्‍योंकि मौजूदा वक्‍त में जीएसटी का कोई अलग ट्रिब्‍यूनल (GST Tribunal) ना होने के कारण करदाताओं को उच्च न्यायालयों में याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जोकि महंगा और काफी वक्‍त लेने वाला होता है. ऐसी शिकायतें भी सामने आती हैं कि अपीलेट ट्रिब्‍यूनल ना होने के चलते जीएसटी अधिकारी करदाताओं पर अपने द्वारा मूल्‍यांकित किए गए टैक्‍स को भरने का दबाव बनाते हैं.

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नई दिल्‍ली : देशभर में टैक्स लिटिगेशंस (Tax Litigation) के बोझ को कम करने और मामलों के जल्द निपटान को लेकर वित्‍त मंत्रालय (Ministry of Finance) जल्द एक जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) के गठन को लेकर GST काउंसिल (GST Council) का जल्‍द रुख कर सकता है. इससे पहले काउंसिल के समक्ष इस मुद्दे को रखा जा चुका है, लेकिन आम सहमति नहीं बन सकी थी. लिहाजा मंत्रालय इस मामले पर गंभीर है और इस लंबित मांग को पूरा करते हुए जल्द देश में GST ट्रिब्यूनल का गठन किया जा सकता है.

दरअसल, रेवेन्‍यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने एक साक्षात्‍कार में कहा है कि कर मुकदमेबाजी के त्वरित समाधान के लिए एक गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स अपीलेट ट्रिब्‍यूनल (GSTAT) का गठन किए जाने की जरूरत है और केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय जल्‍द इस मामले को जीएसटी काउंसिल के समक्ष लेकर जाएगी. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, GSTAT के गठन को काउंसिल की 34वीं और 35वीं मीटिंग में चर्चा हो चुकी है और यह बैठकें कोविड 19 महामारी से पहले मार्च और जून 2019 में हुई थीं. बाद में कोविड महामारी के फैल जाने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया था.

वस्तु और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के निर्माण से अप्रत्यक्ष कर मुकदमों के शीघ्र समाधान हो सकेगा, क्‍योंकि मौजूदा वक्‍त में जीएसटी का कोई अलग ट्रिब्‍यूनल (GST Tribunal) ना होने के कारण करदाताओं को उच्च न्यायालयों में याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जोकि महंगा और काफी वक्‍त लेने वाला होता है. ऐसी शिकायतें भी सामने आती हैं कि अपीलेट ट्रिब्‍यूनल ना होने के चलते जीएसटी अधिकारी करदाताओं पर अपने द्वारा मूल्‍यांकित किए गए टैक्‍स को भरने का दबाव बनाते हैं.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने को कहा था, जो अधिनियम के लागू होने के 4 साल बाद भी गठित नहीं हुआ. कोर्ट ने वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा पिछले साल कोर्ट में दायर एक पीआईएल पर यह आदेश सरकार को दिया था. इस अर्जी में केंद्र को जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. वकील अमित साहनी ने अर्जी में कहा था कि 2016 में जीएसटी विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ और 1 जुलाई से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा अधिनियम, 2017 (GST) लागू हुआ. अधिनियम की धारा 109 एक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GST Appellate Tribunal) के गठन को अनिवार्य करती है, जो अधिनियम के अस्तित्व में आने के 4 साल बाद भी गठित नहीं हुआ. याचिका में कहा गया कि “सीजीएसटी अधिनियम, 2017 (CGST Act, 2017) की धारा 109 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण की राष्ट्रीय और अन्य पीठों का गठन समय की बेहद जरूरत है और प्रतिवादी अनिश्चितकाल के लिए इसके गठन को खींच नहीं सकते हैं.”

जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना की मांग वाली इस याचिका में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से समय मांगा था, तो मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने मौखिक रूप से उनसे कहा, “सीजीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया गया है. वह भी एक मुद्दा है. काउंटर दाखिल करने का कोई सवाल ही नहीं है. आपको ट्रिब्यूनल का गठन करना है, बस इतना ही.”

Tags: Gst, Gst news

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