चीनी अरबपति जैक मा को गुरुग्राम के एक कोर्ट ने भेजा समन, भारत में उनकी कंपनी पर लगे ये गंभीर आरोप

चीनी अरबपति जैक मा को गुरुग्राम के एक कोर्ट ने भेजा समन, भारत में उनकी कंपनी पर लगे ये गंभीर आरोप
अलीबाबा ग्रुप के संस्थापक जैक मा

Alibaba Group की कंपनी UC Web में काम करने वाले एक कर्मचारी ने नौकरी से निकाले जाने के बाद कंपनी पर केस दर्ज किया है. इसी केस के मामले में गुरुग्राम के जिला न्यायलय ने जैक मा (Jack Ma) को समन भेजा है. कर्मचारी ने कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और भारी-भरकम हर्जाने की भी मांग की है.

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नई ​दिल्ली. अलीबाबा ग्रुप (Alibaba Group) के संस्थापक जैक मा (Jack Ma) को गुरुग्राम के एक कोर्ट ने समन भेजा है. अलीबाबा ग्रुप के पूर्व कर्मचारी ने कहा है कि उनकी कंपनी ने उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया है. कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने कंपनी के एक ऐप पर सेंसरशिप और फेक न्यूज के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद कंपनी ने उन्हें निकाल दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी. भारत द्वारा 59 चीनी ऐप्स के बैन करने के बाद यह मामला सामने आया है. जिन ऐप्स को भारत में बैन किया गया है, उसमें अलीबाबा ग्रुप के UC News और UC Browser भी शामिल हैं.

बीते 20 जुलाई की एक कोर्ट फाइलिंग में अलीबाबा UC Web में काम करने वाले पूर्व कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह परमार ने अरोप लगाया है कि 59 ऐप्स बैन करने को लेकर कंपनी ने सेंसर कॉन्टेक्ट को चीन के हित में नहीं पाया और दोनों ऐप ने इसे गलत न्यूज के तौर पर दिखाया. उन्होंने कहा कि इस खबर को 'सामाजिक और राजनीतिक उठापटक' के रूप में दर्शाया गया है.

30​ दिन के भीतर लिखित जवाब भी मांगा
गुरुग्राम के जिला न्यायालय (Gurugram District Court) में सिविल जज सोनिया शेवकंद ने अलीबाबा, जैक मा और कंपनी से जुड़े दर्जनों अन्य व्यक्तियों को 29 जुलाई तक वकील के माध्यम से पेश होने के लिए समन भेजा है. रॉयटर्स ने कोर्ट के डॉक्युमेंट् के हवाले से यह बात कही है. जज ने कंपनी और उसके अधिकारियों से 30 दिनों के अंदर लिखित जवाब भी मांगा है.
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US India ने अपने बयान में कहा है कि वो इंडियन मार्केट के​ लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध और वो अपने लोकल कर्मचारियों के हितों के बारे में भी सोचती है. कंपनी ने कहा कि उसकी पॉलिसी लोकल न्यूज का अनुपालन करती है. अभी हम मौजूदा मामले पर इससे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं.

परमार ने की 2.68 लाख डॉलर हर्जाने की मांग
UC Web के ऑफिस में परमार एसोसिएट डायरेक्टर हैं और वो इस कंपनी में अक्टूबर 2017 से काम कर रहे हैं. इस मामले में उन्होंने अपने वकील अतुल अहलावत के जरिए 2,68,000 डॉलर के हर्जाने की मांग कर रहे हैं. अतुल ने भी इस मामले को न्यायाधीन होने का हवाला देते हुए कोई बयान में देने से मना कर दिया. दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 59 ऐप्स बंद करने के बाद यूसी वेब ने अपने कुछ कर्मचारियों की छंटनी भी की है. हालिया मामला भी इसी क्रम में है.

भारत में बेहद पॉपुलर थे यूसी के दोनों ऐप्स
बैन के पहले यूसी ब्राउजर को भारत में करीब 68.9 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका था. जबकि, यूसी न्यूज को 7.98 करोड़ बार डाउनलोड किया गया था. यह आंकड़ा 2017 और 2018 के दौरान का है, जिसके बारे में एनलिटिक्स फर्म सेंसर टावर से पता चलता है.

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कर्मचारी ने कंपनी पर क्या आरोप लगाये?
करीब 200 पन्ने की कोर्ट फाइलिंग में पूर्व कर्मचारी परमार ने यूसी न्यूज पर पोस्ट किए गए कुछ क्लिपिंग्स को भी ​पेश किया है. 2017 के पोस्ट में 'भारत में आज मध्यरात्रि से 2000 रुपये के नोट बैन हो गये हैं' की हेडलाइन है. ऐसे ही 2018 के एक पोस्ट में हेडलाइन कुछ इस प्रकार है - 'अभी-अभी: भारत और पाकिस्तान में युद्ध छिड़ी.' इस खबर में भारत और चीन की सीमा पर फायरिंग की बात कही गई है. लेकिन, तथ्य ये है कि न तो भारत में कभी 2,000 रुपये के नोट को बैन किया गया था और न ही 2018 में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई युद्ध हुआ था.

कोर्ट फाइलिंग में यह भी बताया गया कि हिंदी और इंग्लिश में कुछ 'सेंसिटिव वर्ड्स लिस्ट' भी हैं, जैसे - 'इंडिया चाइना बॉर्डर' और 'Sino-India war.' इसकी मदद से यूसी वेब इंडिया के अपने प्लेटफॉर्म पर इन शब्दों से जुड़े कॉन्टेंट को सेंसर करता था.

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इसमें कहा गया है कि चीन के खिलाफ किसी भी न्यूज संबंधी सामग्री को कंट्रोल करने के​ लिए एक ऑडिट सिस्टम तैयार किया गया था, ताकि इसे ऑटोमेटिकली या मैन्युअली रोका जा सके.
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