अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले से बिछड़े रहे हैं भारतीय परिवार, जानिए क्यों?

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा को लेकर लिये गए फैसले से न​ सिर्फ नये आवेदकों को निराशा हाथ लगी है, बल्कि पहले से ही अमेरिका में काम करने वाले विदेश वर्कर्स की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं. H-1B वीजा आवदेकों में 75% भारतीय होते हैं.

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नई दिल्ली. अमेरिका के डालास (Dallas) शहर में लंबे समय से नौकरी करने वाले करण मुरगई भारतीय नागरिक हैं. मार्च में अपने पिता की मौत के बाद वो भारत आए. इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी और 4 साल की छोटी बेटी को डालास में ही रहने दिया. लेकिन, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा H-1B वीजा को लेकर लिए गए फैसले से मुरगई के लिए वापस जाना मुश्किल हो गया है. अपने फैसले पर ट्रंप ने कहा है कि इससे बेरोजगारी से राहत मिलेगी और मौजूदा दौर में अमेरिकी लोगों की नौकरी सुरक्षित रहेगी.

मुरगई ने कहा, 'मेरे जैसे हजारों भारतीय लोग अमेरिका में नौकरी करते हैं, लेकिन अब वो भारत में ही फंस गए हैं. यह एक तरह का कोलेटरल डैमेज है. वो बताते हैं कि उन्होंने टेक्सास स्थित अपने ऑफिस, भारतीय अधिकारियों और नई दिल्ली स्थिति अमेरिकी कॉन्सुलेट से भी मदद मांगी है. मुरगई एक आईटी मैनेजमेंट कंपनी में कंसल्टेंट हैं. भारत में फंसे मुरगई की चार साल की बेटी डालास में ही हैं जोकि फिलहाल बीमार चल रही है.'

मुरगई बताते हैं, 'हर रोज मेरी बेटी पूछती हैं कि मैं कब वापस ​आ रहा हूं. मेरे लिये यह हृदयविदारक है. पहले उम्मीद थी की जुलाई में लौट जाउंगा, लेकिन अब मुझे कुछ पता नहीं है. हमें चौतरफा मार पड़ रही है.'



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10 साल से अमेरिका में सेटल हैं मुरगई
मुरगई ने साल 2010 में H-1B वीजा के लिए आवेदन किया था और उनके पास डालास में खुद की जमीन और घर भी है. वो कहते हैं कि जब एक जगह पर आप करीब एक दशक तक रहते हैं तो आपको लगता है कि वहां सेटल हो चुके हैं. उनका कहना है कि अगर नये H-1B वीजा पर रोक लगती है तो समझ में आता है. लेकिन, जब पहले से ही वहां काम कर रहे हैं और खुद को वहां पर स्थापित कर लिया है तो ऐसे लोगों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है.

31 जुलाई तक बढ़ा इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर बैन
बढ़ते कोरोना वायरस के मामले में भारत विश्वभर में चौथे स्थान पर पहुंच गया है. यहां हर रोज औसतन 20 हजार नये मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन, अब ट्रैवल को लेकर प्रतिबंध कम होने लगा है. पहले कयास लगाये जा रहे थे कि जुलाई के अंत तक सरकार इंटरनेशनल कॉमर्शियल फ्लाइट्स को उड़ान भरने के लिए अनुमति दे देगी. लेकिन, शुक्रवार को ही सरकार ने इस पर रोक को 31 जुलाई तक बढ़ा (Ban Extended on International Flights) दिया है.

यूएस में काम करने वालों के लिए क्या है H-1B वीजा के मायने?
H-1B वीजा प्रोग्राम के तहत अमेरिकी कंपनियां स्किल्ड विदेशी वर्कर्स (Skilled Foreign Workers in USA) को अपने यहां काम करने का मौका देती हैं, खासतौर से आईटी सेक्टर की कंपनियां. इन कंपनियों को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई अमेरिकी कैंडिडेट तो नहीं है और उसके बाद एक लंबी प्रक्रिया के तहत वो विदेशी वर्कर्स को नौकरी देती हैं. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 हजार डॉलर खर्च होता है और यह बेहद प्रतिस्पर्धात्मक भी है.

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अमेरिकी सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि H-1B वीजा प्रोग्राम में 75 फीसदी आवेदन भारतीय नाग​रिकों के होते हैं. हर साल करीब 85,000 H-1B वीजा जारी होता है. Nasscom ने H-1B वीजा को लेकर ट्रंप के फैसले को 'पथभ्रष्ट और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह' करार दिया है.

कई भारतीय कंपनियां अमेरिकी अस्पताल, ड्रगमेकर और बायोटेक के क्षेत्र के लिए टेक्नोलॉजी स्टाफ और सर्विस मुहैया कराती हैं. ऐसे में संभव है कि ये कंपनियां अपने लोगों को कनाडा या मेक्सिको भेजने पर विचार कर सकती हैं.

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका के इस फैसले से स्किल्ड भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर पड़ेगा. उन्होंने बताया कि सरकार इसके असर का विश्लेषण कर रही है.

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अमेरिका में इमिग्रेशन अटॉर्नी का कहना है कि उनके पास ई-मेल्स और फोन कॉल्स की बाढ़ सी आ गई है. शिकागो के इमिग्रेशन अटॉर्नी नील बार्कर का कहना है कि इससे अमेरिका के कानूनी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर तनाव बढ़ गया है. इससे मानसिक स्तर पर प्रभाव पड़ रहा और प्रोडक्टिविटी भी प्रभावित हो रही है.
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