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क्या पुरानी सोने की ज्वेलरी की हो सकती है हॉलमार्किंग, जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब

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Updated: February 24, 2020, 4:56 PM IST
क्या पुरानी सोने की ज्वेलरी की हो सकती है हॉलमार्किंग, जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब
15 जनवरी 2021 से सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही भारत में बिकेगी.

मोदी सरकार (Modi Government) अगले साल से सोने (Gold) के खरीददारों को धोखाधड़ी (Fraud) से बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठानी जा रही है. अगले साल से ज्वेलर्स अगर आपको 18 कैरेट का सोना 22 कैरेट का बताकर ठगता है तो वह बच नहीं पाएगा.

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  • Last Updated: February 24, 2020, 4:56 PM IST
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नई दिल्ली. अगर आप सोने (Gold) की ज्वेलरी खरीदने जा रहे है. तो अब आप अपनी पुरानी ज्वेलरी पर भी हॉलमार्किंग करा सकते है. जी-हां मोदी सरकार अगले साल से सोने के खरीददारों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठानी जा रही है. अगले साल से ज्वेलर्स अगर आपको 18 कैरेट का सोना 22 कैरेट का बताकर ठगता है तो वह बच नहीं पाएगा. मोदी सरकार ने अब सोने को तीन कैटेगरी 14, 18 और 22 कैरेट में बांट दिया है. नए कानून से ग्राहक को ठगा नहीं जा सकेगा और खरीदी जाने वाली हॉलमार्क्ड गोल्ड ज्वेलरी उतने ही कैरेट की होगी, जितने के ग्राहक ने पैसे दिए हैं.

15 जनवरी 2021 से सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही भारत में बिकेगी. बीआईएस (BIS) के इस नियम का उल्लंघन करने वालों को अगले साल से भारी जुर्माना देना पड़ेगा है. इतना नहीं है ज्वेलर्स को जेल भी जाना पड़ सकता है.

(1) सवाल-क्या पुराने सोने की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग हो सकती हूं?
जवाब- 
सोने के कारोबार से जुड़े जानकार बताते हैं कि सोने की पुरानी ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग नहीं कराई जा सकती है. क्योंकि इसे कराने के लिए एक प्रॉपर एग्रीमेंट साइन होता है, जो कि ज्वैलर्स के लिए है. इस एग्रीमेंट में नियम और शर्तें होती हैं.



इस एग्रीमेंट के बाद ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग कराने के लिए लाइसेंस जारी होता है और इसके बाद वे गोल्ड ज्वैलरी को बीआईएस सेंटर्स से हॉलमार्क करा सकते हैं. ग्राहक को लाइसेंस नहीं मिलता, लिहाजा ग्राहक खुद से अपनी पुरानी ज्वैलरी ले जाकर हॉलमार्किंग नहीं करा सकता.

(2) सवाल-पुरानी ज्वेलरी की बिक्री पर भी इसका असर पड़ेगा?-
जवाब- ग्राहकों के मन में सवाल है कि पुरानी ज्वेलरी की बिक्री पर भी इसका असर पड़ेगा? इस पर बीआईएस का कहना है कि गाहकों से पुरानी गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के बाद ज्वेलर्स उसे पिघलाकर नई ज्वेलरी बनाते हैं.पुरानी ज्वेलरी एक तरह से ज्वेलर के लिए रॉ मैटेरियल होती है.

इसलिए ग्राहक द्वारा उसकी बिक्री और ज्वेलर द्वारा उसकी खरीदारी करने पर 15 जनवरी 2021 के बाद भी कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन जब ज्वेलर्स नई ज्वेलरी बेचेगा, तो उस पर बीआईएस हॉलमार्क होना जरूरी है. ग्राहक तो अपनी पुरानी ज्वेलरी की बिक्री वैसे ही कर सकता है जैसे मौजूदा वक्त में करता है.

(3) अपनी पुरानी ज्वेलरी की शुद्धता की जांच करा सकता हूं?
जवाब-महावीर ज्वेलर्स के आकाश कहते हैं, 'गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग कराने के लिए एक प्रॉपर एग्रीमेंट साइन किया जाता है, जो कि ज्वेलर्स के लिए है. इस एग्रीमेंट में नियम और शर्तें रहती हैं. इस एग्रीमेंट के बाद ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग कराने के लिए लाइसेंस जारी होता है और इसके बाद वे गोल्ड ज्वेलरी को बीआईएस सेंटर्स से हॉलमार्क करा सकते हैं.

हॉलमार्किंग कराने के लिए ग्राहकों को लाइसेंस नहीं मिलता है, लिहाजा ग्राहक खुद से अपनी पुरानी ज्वेलरी ले जाकर हॉलमार्किंग नहीं करा सकता. हां, ग्राहक बीआईएस हॉलमार्किंग सेंटर्स पर जाकर अपनी पुरानी ज्वेलरी की शुद्धता की जांच करा सकता है.

ग्राहक को मालूम चल जाएगा कि उसने जो ज्वेलरी पहले खरीदी थी, वह कितने कैरेट सोने से बनी है. इसके लिए ग्राहक को 50 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.

भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस (BIS) हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने की एक प्रणाली है. बीआईएस का चिन्ह साबित करता है कि सोने का आभूषण बीआईएस के मानकों पर खरा उतरता है. हॉलमार्किंग के तहत किसी भी गोल्‍ड आइटम पर पांच चीजें मार्क होती हैं- BIS लोगो, सोने की शुद्धता या फाइनेंस दर्शाने वाला नंबर जैसे 22 कैरेट या 916, एसेइंग या हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो, मार्किंग का साल और ज्‍वैलर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर.

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First published: February 24, 2020, 4:51 PM IST
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अपडेटेड: April 10 (08:00 AM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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