प्राइवेट सेक्टर में 75 फीसदी रिज़र्वेशन देगा हरियाणा, क्या हैं इसके प्रावधान?

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा सरकार ने पिछले साल नवंबर में एक बिल पास किया था, जिसके तहत राज्य में प्राइवेट सेक्टर को लोकल उम्मीदवारों को 75 फीसदी तक रिज़र्वेशन देना होगा. अब राज्यपाल ने भी इस बिल पर मुहर लगा दी है. कुछ समय पहले ही आंध्र प्रदेश भी ऐसा ही ​नियम लाया था. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में इसे चुनौती भी दी गई थी.

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  • Last Updated: March 3, 2021, 12:46 PM IST
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नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश की तर्ज पर ही अब ​हरियाणा सरकार ने भी अपने यहां प्राइवेट सेक्टर में 75 फीसदी नौकरियां आरक्षित करने का ऐलान कर दिया है. हालांकि, लोकल उम्मीदवारों के लिए यह आरक्षण एक तय सैलरी लिमिट तक ही होगा. नवंबर 2020 में राज्य सरकार ने ​हरियाणा स्टेट एप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट बिल, 2020 पास किया था ताकि स्थानीय उम्मीदवारों को यहां के प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां मिल सके. अब 2 मार्च को राज्यपाल ने इसे मंजूरी दे दी है. हरियाणा सरकार के इस बिल के बारे में कई बातों को समझना जरूरी है. क्या यह हरियाणा में प्राइवेट सेक्टर के लिए चुनौती भी होगी? इसी को ध्यान में रखते हुए हम आपको अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स और इस बिल के आधार पर पूरी जानकारी दे रहे हैं.

इस बिल के दायरे में कौन से सेक्टर्स शामिल होंगे?
सभी तरह की कंपनियां, सोसाइटीज़, ट्रस्ट्स, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म्स, पार्टनरशिप फर्म्स और कोई ऐसा व्यक्ति या ईकाई जो 10 से ज्यादा लोगों को रोज़गार देता हो - ये सभी इसके दायरे में आएंगे. राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर नोटिफिकेशन भी जारी होता रहेगा. इस बिल में 'नियोक्ता' की ​परिभाषा दी गई है कि कंपनी एक्ट, 2103 या ​हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसाइटी एक्ट, 2012 या ​लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट, 2008 के अधीन आने वाले फर्म्स, या इंडियन ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत परिभाषित ट्रस्ट, या ऐसा कोई भी व्यक्ति/ईकाई जो 10 से ज्यादा लोगों को नौकरी देता है, वे सब इसमें शामिल होंगे. इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार या इन दोनों के अधीन आने वाली कोई अन्य संस्था शामिल नहीं होगी.

लोकल उम्मीदवार का क्या मतलब है?
ऐसा कोई भी व्यक्ति जो हरियाणा का अधिवासी हो, वो लोकल उम्मीदवार के दायरे में आएगा और अगर वो राज्य में ही प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करता है तो उसे इसका लाभ मिलेगा. उम्मीवार को एक पोर्टल पर अनिवार्य रूप रजिस्टर भी करना होगा. इसमें उन्हें जानकारी देनी होगी कि वो इस रिज़र्वेशन का लाभ उठाना चाहते हैं. नियोक्ता को भी इसी पोर्टल के जरिए ही नियुक्ति करनी होगी.



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क्या इसका मतलब है कि सभी कंपनियों के वर्कफोर्स का 75 फीसदी हरियाणा का ही होगा?
नहीं. प्रत्येक नियोक्ता को किसी भी पोस्ट के लिए 75 फीसदी तक लोकल उम्मीदवारों को ही चुनना होगा. हालांकि, 50,000 रुपये या इससे कम की सैलरी वाले पोस्ट्स के लिए ही यह लागू होगा. राज्य सरकार समय-समय पर इसे नोटिफाई करती रहेगी. उम्मीदवार हरियाणा के किसी भी ज़िले का हो सकता है. लेकिन नियोक्ता को यह भी देखना होगा कि किसी एक ज़िले से 10 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवार न हों. हालांकि, नियोक्ता पर यह भी निर्भर करेगा कि किसी ज़िले से वे 10 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवारों को चुन सकें.

क्या कोई नियोक्ता 75 फीसदी की इस बाध्यता से छूट प्राप्त कर सकता है?
हां, लेकिन इसके लिए उन्हें एक लंबी प्रक्रिया से गुज़रना होगा. साथ ही अगर सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी को लगता है कि नियोक्ता का यह अनुरोध सही है, तभी उन्हें 75 फीसदी रिज़र्वेशन की इस बाध्यता से छूट मिलेगी. नियोक्ता इस छूट के लिए तभी आवेदन कर सकेंगे, जब किसी विशेष स्किल के लिए उनके पास पर्याप्त लोकल उम्मीदवार हों. किसी खास क्वॉलिफिकेशन या दक्षता वाले पोस्ट के लिए भी उन्हें इससे छूट मिल सकती है. नियोक्ता को इसके लिए एक अधिकारी नियुक्त करना होगा, जोकि डिप्टी कमिश्नर से कम रैंक का नहीं हो सकता है. यही अधिकारी इसकी जांच करेगा कि नियोक्ता द्वारा किसी विशेष स्किल, योग्यता या दक्षता वाले उम्मीदवार के लिए छूट की यह मांग कितनी उचित है. इस ​अधिकारी के पास नियोक्ता के क्लेम को स्वीकारने या नकारने का अधिकार होगा. अधिकारी यह भी निर्देश दे सकता है कि नियोक्ता अपने लिए पर्याप्त स्किल, योग्यता और दक्षता के लिए उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दें.

राज्य सरकार कैसे चेक करेगी कि कोई नियोक्ता 75 फीसदी रिज़र्वेशन नियम का पालन कर रहा है कि नहीं?
हर नियोक्ता को तय पोर्टल पर एक ​तिमाही रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसमें उस दौरान लोकल उम्मीदवारों की नियुक्ति की जानकारी होगी. नियोक्ता द्वारा जमा किए गए इस रिपोर्ट को अधिकारियों द्वारा जांचा जाएगा. ये अधिकारी सब-डिविज़नल अधिकारी के रैंक से कम नहीं होंगे. इनके पास यह अधिकार होगा कि वे नियोक्ता से किसी रिकॉर्ड, जानकारी या डॉक्युमेंट की मांग कर सकें ताकि उनके पास आई​ रिपोर्ट को ठीक से वेरिफाई किया जा सके. इन अधिकारियों के पास यह भी अधिकार होगा कि वे नियोक्ता के कार्यस्थल पर जाकर रिकॉर्ड, रजिस्टर या डॉक्युमेंट चेक कर सकें.

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क्या गड़बड़ी होने पर नियोक्ता को दंडित किया जा सकेगा?
हां, नियोक्ता पर कम से 10,000 रुपये और अधिकतम 2,00,000 लाख रुपये तक का फाइन लगाया जा सकता है. हालांकि, यह फाइन तभी लगेगा, जब यह बात साबित हो जाएगी कि नियोक्ता ने इस नियम का पालन करने में कोई गड़बड़ी की है. अगर इसके बाद भी नियोक्ता द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उन पर 1,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फाइन लगाया जा सकता है. अगर कोई नियोक्ता गलत या फ़र्ज़ी जानकारी मुहैया कराता है तो उन पर 50,000 रुपये तक का फाइन लगाया जा सकता है. आगे भी इसका उल्लंघन करने पर 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक का फाइन लग सकता है.

अगर नियोक्ता द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो और कौन इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है?
अगर कोई कंपनी इस एक्ट का उल्लंघन करती है तो कंपनी के सभी निदेशक, प्रबंधक, सचिव, एजेंट व अन्य अधिकारी और प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति जिम्मेदार होंगे. हालांकि, वे अगर यह साबित कर दें कि यह उल्लंघन उनकी गैर-जानकारी में हुई है तो उन्हें राहत मिल सकती है. लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म द्वारा अगर इस नियम का उल्लंघन होता है तो सभी पार्टनर्स दोषी होंगे. किसी सोसाइटी या ट्रस्ट द्वारा नियमों के उल्लंघन की सूरत में इन्हें संचालित करने वाले व्यक्ति ज़िम्मेदार होंगे.

इंडस्ट्रीज को इस नये नियम से क्या चिंता है?
हरियाणा के कई टॉप इंडस्ट्रियलिस्टों ने प्राधिकरणों और सरकारी अधिकारियों के सामने इस कदम को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह इंडस्ट्री के हित में नहीं होगा. जेजेपी एमएलए राम कुमार गौतम ने विधान सभा में इस बिल का विरोध किया था. उन्होंने तो इसे 'बिलकुल हास्यास्पद विधान' तक करार दिया था. उन्होंने कहा था कि यह 100 फीसदी ग़लत है. उन्होंने इस बात की आशंका जताई कि अगर हरियाणा में इस तरह का रिज़र्वेशन होता है तो दूसरे राज्यों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं. इससे पूरी तरह से अव्यवस्थता का माहौल बन सकता है.

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क्या इस कानून से भारतीय संविधान के आर्टिकल 16 का उल्लंघन होगा?
आंध्र प्रदेश ने जब अपने राज्य में प्राइवेट सेक्टर 75 फीसदी तक रिज़र्वेशन के नियम को लागू किया था तो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी, जहां इसको लेकर कहा गया कि यह 'असंवैधानिक हो सकता' है. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि क्या इस कानून को संविधान के आधार पर लागू हो सकता है? कांग्रेस ​एमएलए बीबी बत्रा ने भी हरियाणा विधान सभा में ऐसा ही प्रश्न उठाया था. उन्होंने कहा कि यह बिल भारतीय संविधान के आर्टिकल 16 का उल्लंघन करता है. हालांकि, हरियाणा सरकार ने दावा किया है कि आर्टिकल 16 'पब्लिक एम्प्लॉयमेंट' ​की बात करता है और उनका यह बिल केवल 'प्राइवेट सेक्टर एम्प्लॉयमेंट' के लिए ही है.
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