एक इंजीनियर ने ऐसे खड़ी की 1.70 लाख करोड़ रुपये की कंपनी, अब बेटी के लिए छोड़ा चेयरमैन पद

एक इंजीनियर ने ऐसे खड़ी की 1.70 लाख करोड़ रुपये की कंपनी, अब बेटी के लिए छोड़ा चेयरमैन पद
HCL टेक के फाउंडर शिव नादर

देश की बड़ी आईटी कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन शिव नादर (Shiv Nadar) अपना पद छोड़ दिया है. उनकी बेटी रोशनी नादर मल्होत्रा (Roshni Nadar Malhotra) तुरंत प्रभाव से कंपनी की नई चेयरमैन बन गई है.

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नई दिल्ली.  'लक्ष्य तय करने के लिए सपने देखें, अगर आप सपने ही नहीं देखेंगे तो जीवन में आपका कोई लक्ष्य भी नहीं होगा और लक्ष्य के बिना सफलता नहीं पाई जा सकती. ये शब्द देश के जानेमाने बिजनेसमैन और HCL टेक के फाउंडर शिव नादर (HCL Founder Shiv Nadar) के है. उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कंपनी के चेयरमैन पद को छोड़ दिया है. अब उनकी बेटी रोशनी नादर मल्होत्रा चेयरमैन पद संभालेंगी. हालांकि शिव नादर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे. उनका पद चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर का होगा.

नादर ने कहा, हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां संस्थानों और दुनिया भर के लोगों को तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि इससे भी बिजनेस को बढ़ावा मिला है क्योंकि मुश्किल दौर बिजनेस में नए बदलाव के लिए प्रोत्साहित करता है. HCL अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर कस्टमर्स को नए माहौल में ढलने में मदद कर रहा है क्योंकि अब यही New Normal है.

आइए जानें कैसे खड़ी की 1.70 लाख करोड़ रुपये की कंपनी



टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज और देश के बड़े उद्योगपति शिव नादर का जन्म 14 जुलाई 1945 को हुआ था. दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव से आने वाले शिव नादर के कारण ही आज भारत इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में अपनी जगह बना चुका है. वे तमिलनाडु से हैं और हिन्दू धर्म के हैं. वे एचसीएल टेक्नोलॉजी के फाउंडर (संस्थापक) और चेयरमैन (अध्यक्ष) हैं. एचसीएल अपनी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी सेवाओं के लिए प्रसिद्ध है.
उनका करियर पुणे में प्रारंभ हुआ जहां वे वालचंद ग्रुप ऑफ़ इंजीनियरिंग का हिस्सा बने. बिजनेस चलाने का कुछ अनुभव मिलने के बाद उन्होंने इसे छोड़ने और अपना बिजनेस शुरू करने का निश्चय किया. अपने दोस्तों को और अन्य बिजनेस पार्टनरों की सहायता से वे इस देश में सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति लाने में जुट गए.

प्राइवेट नौकरी छोड़ शुरू की कंपनी- पांच दोस्तों के साथ मिलकर ‘माइक्रोकॉम्प लिमिटेड’ नामक एक कंपनी शुरू की. सन 1976 में बनाई उनकी कंपनी टेलीडिजिटल कैलकुलेटर्स बेचने का काम करती थी.शिव नादर ने एक इंटरव्‍यू में बताया था, 'पहला व्‍यक्ति जिससे मैं मिला था वहा था अर्जुन. वो भी मेरी ही तरह मैनेजमेंट ट्रेनी था. हम अच्‍छे दोस्‍त बने और आज तक हैं. इसके बाद हम दोनों ने डीसीएम में काम कर रहे अपने तरह के लोगों को जोड़ा और मिलकर काम शुरू कर दिया.

शिव नादर


जल्द ही इस कंपनी का नाम हिंदुस्तान कम्प्यूटर्स लिमिटेड (एचसीएल) रख दिया गया और ये कम्प्यूटर बनाने लगी. देखते ही देखते हिंदुस्तान की यह कंपनी दुनियाभर में जाना-माना ब्रांड हो गई.

1980 में उन्होंने सिंगापुर में आईटी हार्डवेयर बेचने के लिए ‘फार ईस्ट कम्प्यूटर्स’ की स्थापना कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रख लिया. इससे पहले साल में ही उन्हें लगभग 10 लाख रुपए की आमदनी हुई.

इसके बाद नाडार ने कभी पलटकर नहीं देखा. 1982 में तो कंपनी ने अपना पहला पीसी बाजार में उतार दिया. फिर आईटी व्यवसाय से जुड़ी पांच कंपनियां अपनी फर्म में मर्ज कर लिया
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