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बड़ी राहत! SBI के बाद HDFC बैंक ने घटाईं होम ऑटो और पर्सनल लोन की ब्याज दरें

HDFC बैंक के ग्राहक जल्द निपटा लें ये काम.

HDFC बैंक के ग्राहक जल्द निपटा लें ये काम.

एचडीएफसी बैंक ने सभी अवधि के लिए एमसीएलआर (MCLR- Marginal Cost of Funds based Lending Rate) दरें 0.15 फीसदी तक घटा दी हैं. इस कटौती के बाद बैंक के होम लोन, ऑटो लोन आदि सस्ते हो गए हैं.

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    नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी (HDFC Bank) ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरें घटाने का ऐलान किया है. एचडीएफसी बैंक ने सभी अवधि के लिए  एमसीएलआर (MCLR- Marginal Cost of Funds based Lending Rate) दरें 0.15 फीसदी तक घटा दी हैं. इस कटौती के बाद बैंक के होम लोन, ऑटो लोन आदि सस्ते हो गए हैं. आपको बता दें कि इससे पहले सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ने एक साल के मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में 0.10% कटौती करने का ऐलान किया. 10 दिसंबर से एसबीआई का एक साल का एमसीएलआर अब 8% से घटकर 7.90% रह गया है. एसबीआई के ज्यादातर लोन एक साल के एमसीएलआर पर आधारित हैं.

    कितनी कम होगी EMI- HDFC बैंक ने MCLR पर आधारित लोन की दरें घटा दी हैं. अब हर महीने EMI 0.15% तक सस्ती हो गई है. यह दर 8.30 फीसदी से कम होकर 8.15 फीसदी पर आ गई है. वहीं, दो साल की दरें घटकर 8.25 फीसदी हो गई है. आपको बता दें कि RBI ने हालिया पॉलिसी में ब्याज दरें नहीं घटाईं है. जबकि, इस साल अभी तक यानी 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर 2019 तक RBI ब्याज दरों में 1.35 फीसदी की कटौती कर चुका है.

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    आइए जानें MCLR से जुड़ी 4 महत्पवपूर्ण बातों के बारे में...

    (1) बैंकों के एमसीएलआर में उसकी फंड की लागत दी होती है, जिसे बैंक हर महीने घोषित करते हैं. बेहतर करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट होने की वजह से छोटे बैंकों के मुकाबले बड़े बैंकों का कम एमसीएलआर होता है.

    (2) एमसीएलआर को इंटरनल बेंचमार्क माना जाता है क्योंकि कम लागत वाले फंड जुटाने के लिए बैंक की अपनी क्षमता एमसीएलआर में एक महत्वपूर्ण फैक्टर है.

    (3) कोई भी बैंक एमसीएलआर पर उधार देता है लेकिन इससे कम पर बैंक उधार नहीं दे सकता है. होम लोन की ब्याज दरें या तो एमसीएलआर के बराबर होंगी या उससे ज्यादा होंगी.

    (4) बैंकों के एमसीएलआर बढ़ने का मतलब है कि कर्ज लेने वाले को ज्यादा ईएमआई और ब्याज देना होगा.

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