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एचडीएफसी बैंक ने ब्याज दरें 0.10% तक घटाईं, इतनी कम हो जाएगी आपकी EMI

HDFC बैंक की नई दरें 7 नवंबर 2019 से लागू हो गई है.

HDFC बैंक की नई दरें 7 नवंबर 2019 से लागू हो गई है.

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने ब्याज दरें घटाने का ऐलान किया है. इस फैसले से बैंक का होम लोन (Home Loan), ऑटो लोन (Auto Loan) और पर्सनल लोन (Personal Loan) सस्ता हो जाएगा. इससे आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है.

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    नई दिल्ली. प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंक HDFC ने ब्याज दरें 0.10 फीसदी तक घटा दी है. बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 फीसदी से  0.10 फीसदी तक की कटौती करने का ऐलान किया है. नई दरें 7 नवंबर 2019 से लागू हो गई है. इसके बाद बैंक का होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ता हो जाएगा. एमसीएलआर घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है.

    कितनी सस्ती होगी EMI- जिन ग्राहकों ने बैंक से MCLR पर आधारित ब्याज दरों के तहत कर्ज लिया है. उनकी EMI 0.10 फीसदी तक कम हो जाएगी. आपको बता दें कि अक्टूबर में RBI की ओर से ब्याज दरें घटाने के बाद अब तक देश के कई बड़े बैंक ब्याज दरें घटा चुके हैं.

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    >> बैंकों के एमसीएलआर में उसकी फंड की लागत दी होती है, जिसे बैंक हर महीने घोषित करते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बेहतर करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट होने की वजह से छोटे बैंकों के मुकाबले बड़े बैंकों का कम एमसीएलआर होता है.

    >> अगर आम भाषा में कहें तो कोई भी बैंक एमसीएलआर पर उधार देता है. वहीं, बैंक इससे कम पर उधार दे भी नहीं सकता है. होम लोन की ब्याज दरें या तो एमसीएलआर के बराबर होंगी या उससे ज्यादा होंगी. बैंकों के एमसीएलआर बढ़ने का मतलब है कि कर्ज लेने वाले को ज्यादा ईएमआई और ब्याज देना होगा.

    >> वहीं, एमसीएलआर को इंटरनल बेंचमार्क माना जाता है क्योंकि कम लागत वाले फंड जुटाने के लिए बैंक की अपनी क्षमता एमसीएलआर में एक महत्वपूर्ण फैक्टर है.

    >> एमसीएलआर से जुड़े होम लोन में जब होम लोन की अवधि पूरी नहीं हो जाती है तब तक EMI की रकम स्थिर रहेगी. ऐसे लोन्स में प्रिंसिपल रिपेमेंट के मुकाबले शुरुआती वर्षों में इंटरेस्ट का हिस्सा ज्यादा होता है. MCLR लोन में, बैंक एक मार्क-अप, स्प्रेड या मार्जिन चार्ज कर सकते हैं.

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