हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से बचने के लिए यह तरीके अपनाएं, बचेगा पैसा

इरडा के मुताबिक बीमा कंपनियों को मूल मंजूरी प्राप्त प्रीमियम दरों के बेस प्रीमियम में 5 फीसदी तक का बदलाव करने की इजाजत दी गई है.

इरडा के मुताबिक बीमा कंपनियों को मूल मंजूरी प्राप्त प्रीमियम दरों के बेस प्रीमियम में 5 फीसदी तक का बदलाव करने की इजाजत दी गई है.

इरडा के नए मानकों की वजह से कई हेल्थ इंश्यारेंस धारकों की बीमा प्रीमियम बढ़ गई है. ग्राहकों के लिए यह निश्चित तौर पर घाटा है लेकिन वे सावधानीपूर्वक पॉलसी की नियम-शर्तें जानकार प्रीमियम कम कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 12:17 PM IST
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नई दिल्ली. इरडा के नए मानकों की वजह से कई हेल्थ इंश्यारेंस धारकों की नई प्रीमियम बढ़ गई है. हालांकि, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने स्पष्ट किया है कि नॉर्म्स में बदलाव की वजह से प्रीमियम में हुआ बदलाव 5 फीसदी से ज्यादा नहीं है. लेकिन कुछ मामलाें में यह बढ़ोतरी 10 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा हो गई है.

इरडा के मुताबिक बीमा कंपनियों को मूल मंजूरी प्राप्त प्रीमियम दरों के बेस प्रीमियम में 5 फीसदी तक का बदलाव करने की इजाजत दी गई थी. इससे एक्सक्लूजंस के मानकीकरण की गाइडलाइंस का पालन किया हो सकेगा. यह इसलिए भी किया गया है ताकि कंपनियों के लिए कारोबार फायदेमंद बना रहे और वे मार्केट में टिकी रह पाएं. ग्राहकों के लिए यह निश्चित तौर पर घाटा है लेकिन वे सावधानीपूर्वक पॉलसी की नियम-शर्तें जानकार प्रीमियम कम कर सकते हैं. आईए जानते हैं कैसे यह संभव है...

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इस उदाहरण से समझे कैसे बढ़ गई प्रीमियम
47 साल के राम मनोहरा रेड्डी का उदाहरण देखिए. रेड्डी पिछले 17 साल से एक निजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसी को जारी रखे हुए हैं. यह एक फैमिली फ्लोटर पॉलिसी है जिसमें उनके 74 साल के पिता और 65 साल की मां को भी कवर किया गया है. दिसंबर 2019 में कंपनी ने उनकी पॉलिसी को खत्म कर दिया और परिवार को एक नए प्रोडक्ट पर शिफ्ट कर दिया. इसके साथ ही रेड्डी का प्रीमियम 21,762 रुपए से बढ़कर 66,667 रुपए पर पहुंच गया. यह बढ़ोतरी 200 फीसदी से भी ज्यादा थी. बीमा कंपनी ने इस बढ़ोतरी को जायज ठहराते हुए उन्हें बताया कि नई पॉलिसी में उन्हें रूम रेंट की पाबंदियों से मुक्ति मिलने जैसे ज्यादा फायदे मिल रहे हैं. अक्तूबर 2020 के बाद जब मौजूदा पॉलिसीज के लिए इरडा की स्टैंडर्डाइजेशन की गाइडलाइंस आईं तो उन्हें एक और एडवांस नोटिस मिला जिसमें उन्हें प्रीमियम में होने वाली एक और बढ़ोतरी के बारे में सूचित किया गया. नाराज रेड्डी बताते हैं कि इस बार कंपनी ने प्रीमियम 64 फीसदी बढ़ाकर 1.09 लाख रुपए कर दिया है. कंपनी ने प्रीमियम में किए गए इस तगड़े इजाफे के पीछे मेडिकल ट्रीटमेंट के खर्च में हो रही तेज बढ़ोतरी को वजह बताया है.

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पॉलिसीहोल्डर्स के पास सीमित विकल्प



लंबे वक्त से अपने प्रीमियम चुका रहे पॉलीसी होल्डर्स के लिए प्रीमियमों में बढ़ोतरी एक बड़े झटके जैसा है. ऐसा इस वजह से भी है क्योंकि पहले से मौजूद बीमारियों के वेटिंग पीरियड क्रेडिट को रखते हुए दूसरे प्रोडक्ट पर शिफ्ट होना ऐसी उम्र में आसान नहीं होता है. चूंकि, सीनियर सिटीजंस इस उम्र में कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे होते हैं, ऐसे में दूसरी बीमा कंपनियां उन्हें उचित प्रीमियम्स पर अपने साथ जोड़ने को तवज्जो नहीं देती हैं.

तैयार करें हेल्थ फंड

ऑर्ग के फाउंडर महावीर चोपड़ा कहते हैं कि ये बदलाव ईकोसिस्टम लेवल पर होने चाहिए. वरिष्ठ नागरिकों के पास सीमित विकल्प होते हैं. ऐसे में एक पर्याप्त हेल्थ फंड तैयार करना एक विकल्प हो सकता है. इसके जरिए अगर आपके पास पर्याप्त पैसे हैं और आप लंबे वक्त पर अपने इलाज का खर्च खुद निकाल सकते हैं तो आप अपनी पॉलिसी को खत्म करने के बारे में सोच सकते हैं. रूंगटा सिक्योरिटीज के फाइनेंशियल प्लानर हर्षवर्धन रूंगटा कहते हैं कि आपको याद रखना चाहिए कि आपके हेल्थ इंश्योरेंस का सम इंश्योर्ड हर साल दोबारा उतना ही हो जाता है, भले ही आपने क्लेम ले लिया हो. आपके बनाए गए फंड के साथ ऐसा नहीं होता है। एक बार इलाज पर पैसे खर्च करने के बाद आपको फंड में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए अलग से बचत करनी होगी. हालांकि, आपका तैयार किया गया फंड किसी तरह के डिडक्शंस की भरपाई करने में बखूबी काम आ सकता है। डिडक्शंस ऐसी कटौतियां होती हैं जिनका भुगतान आपके हॉस्पिटलाइजेशन बिल को चुकाते वक्त बीमा कंपनी नहीं करती है. ये पैसे आपको देने पड़ते हैं। यह फंड आपके लिए तब भी कारगर साबित होता है जबकि आप ज्यादा उम्र वाले दौर में हों और आपके पास किसी भी तरह का बीमा कवर नहीं हो.

दूसरी बीमा कंपनियों के प्रोडक्ट पर पोर्ट का विकल्प भी

पॉलिसीबाजार.कॉम के बिजनेस हेड (हेल्थ) अमित छाबड़ा कहते हैं कि यदि आपका प्रीमियम आपके सम इंश्योर्ड के 10 फीसदी से ऊपर निकल जाता है तो आपको दूसरी बीमा कंपनियों या उत्पादों पर पोर्ट करने के विकल्प के बारे में सोचना चाहिए. छाबड़ा के मुताबिक प्रीमियम में होने वाली बढ़ोतरी बेवजह लगती है तो आप पोर्ट करने के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं. सीनियर सिटीजंस के लिए मौजूद पॉलिसीज समेत आप मार्केट में मौजूद दूसरी सस्ती पॉलिसीज पर विचार कर सकते हैं. हालांकि, यह नोट कर लीजिए कि इनमें कई तरह की पाबंदियां हो सकती हैं जिनमें 30 फीसदी तक को-पेमेंट और दूसरी सीमाएं हो सकती हैं. ऐसे में यह एक मिलाजुला खेल है. पॉलिसीज सस्ती हो सकती हैं, लेकिन आपको उन पाबंदियों पर भी गौर करना चाहिए जो कि आपके खर्च को बजट से बाहर ले जा सकती हैं.
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