IRDAI की सख्‍ती! कहा-प्रीमियम बढ़ाने के लिए मौजूदा हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसीस में बदलाव ना करें कंपनियां

IRDA ने निर्देश दिया है कि हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनियां कुछ शर्तों के साथ मौजूदा स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाओं में बदलाव कर सकती हैं.

IRDA ने निर्देश दिया है कि हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनियां कुछ शर्तों के साथ मौजूदा स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाओं में बदलाव कर सकती हैं.

भारतीय बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि मौजूदा हेल्थ पॉलिसीस के प्रीमियम (Health Insurance Premium) में कोई बदलाव नहीं किया जाए. साथ ही कहा कि अगर कोई बदलाव करना भी है तो वो जुलाई 2020 में जारी कंसॉलिडेटेड गाइडलाइंस ऑन प्रोडक्ट फाइलिंग इन हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस के मुताबिक होना चाहिए.

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  • Last Updated: March 18, 2021, 8:00 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को दोटूक कहा है कि प्रीमियम (Premium) बढ़ाने के लिए मौजूदा स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाओं (Health Insurance) में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाए. साथ ही स्‍पष्‍ट किया है कि यह निर्देश पर्सनल एक्सीडेंट और ट्रैवल इंश्योरेंस कवर पर भी लागू होगा. इरडा ने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य बीमा कंपनियां (Health Insurers) मौजूदा योजनाओं में कुछ बदलाव कर सकती हैं, लेकिन ये बदलाव जुलाई 2020 में जारी कंसॉलिडेटेड गाइडलाइंस ऑन प्रोडक्ट फाइलिंग इन हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस के मुताबिक होने चाहिए.

मौजूदा पॉलिसी में नए लाभ के लिए लेनी होगी बीमाधारक की मंजूरी

इरडा ने साफ शब्‍दों में कहा है कि मौजूदा स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजनाओं में नए लाभ की ऐडऑन कवर्स या ऑप्शनल कवर्स के रूप में पेशकश की जा सकती है. इसके लिए बीमाधारक (Policyholder) की मंजूरी लेनी जरूरी है. बीमा नियामक ने एप्वाइंटेड एक्चुरीज को एक वित्त वर्ष के अंत में हर हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट की वित्‍तीय व्‍यावहारिकता (Financial Viability) की समीक्षा करने को कहा है. इस समीक्षा रिपोर्ट को बीमा कंपनी के बोर्ड को सौंपा जाएगा. इसके अलावा बोर्ड को हर प्रोडक्ट से जुड़े अच्छे और बुरे अनुभवों का ब्‍योरा भी सौंपना होगा. साथ ही पॉलिसीधारकों के हित में प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुधारों को लेकर सुझाव भी देना होगा. यह

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कंपनियों को पॉलिसी में करना होगा आसान शब्‍दों का इस्‍तेमाल

स्‍वास्‍थ्‍य बीमा से जुड़ी ये स्टेटस रिपोर्ट हर वित्त वर्ष में 30 सितंबर तक बोर्ड के सुझाव व सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी के साथ अथॉरिटी को सौंपानी होगी. वित्त वर्ष 2020-21 की स्टेटस रिपोर्ट 20 सितंबर 2021 तक सौंपी जाएगी. बीमा नियामक ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि पॉलिसी में आसान शब्दों का इस्‍तेमाल किया जाए ताकि खरीदार आसानी से समझ सकें. इस साल 1 अक्टूबर से सभी इंश्योरर्स को स्पष्ट शीर्षक के साथ पॉलिसी कांट्रैक्ट्स का स्टैंडर्ड फॉर्मेट अपनाने का निर्देश दिया गया है. नियामक के मुताबिक कांट्रैक्ट में पॉलिसी शेड्यूल, प्रस्तावना, परिभाषा, लाभ, एक्सक्लूजंस, आम शर्तें और प्रावधान को शामिल किया जाएगा.
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