हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय बर्तें ये सावधानी, नहीं तो भविष्य में होगी परेशानी

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरा प्लान जरूर जानें.

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरा प्लान जरूर जानें.

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरा प्लान जानना बेहद जरूरी है. क्योंकि ज्यादातर बीमा कंपनी अस्पताल में भर्ती कराने पर आने वाले खर्च को ही रिम्बर्स (वापस) करती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 2:49 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी हेल्थ इंश्योरेंस की ओर लोगों का आकर्षण बढ़ा है. जिसके चलते कई बीमा कंपनियों ने बड़ी बीमारियों के लिए अपने यहां स्पेशल कवर पॉलिसी भी शुरू कर दी हैं. अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले है. तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि, हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. वहीं आपने अगर हेल्थ इंश्योरेंस ले लिया है. तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि, किन परिस्थितियों में आपको हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम नहीं मिलेगा. आइए हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी सभी बड़ी बातों को आसान शब्दों में यहां समझते हैं.

प्लान का की जानकारी जरूर ले- हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरा प्लान जानना बेहद जरूरी है. क्योंकि ज्यादातर बीमा कंपनी अस्पताल में भर्ती कराने पर आने वाले खर्च को ही रिम्बर्स (वापस) करती है. वहीं क्रिटिकल इलनेस का प्लान लेने पर बीमा कंपनी गंभीर बीमारी के डायग्नोसिस होने पर ही पॉलिसीहोल्डर को एकमुश्त राशि ट्रांसफर कर देती है. जिसके लिए आपको अस्पताल में पहले भर्ती नहीं होना पड़ेगा.

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पॉलिसी में कितना मिलेगा कवरेज- बीमा कंपनियां पॉलिसी के आधार पर अलग-अलग बीमा के लिए अलग-अलग राशि के कवरेज देती है. इसलिए ये जानना भी बेहद जरूरी है कि, आपको कुल कितना रुपये का कवर मिलेगा. वहीं कुछ बीमा प्लान में बीमारियों के आधार पर कवर की राशि का निर्णय होता है.
किनके लिए हैं ये प्लान और प्लान की समय सीमा- किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में आपकी मेहनत की कमाई और वर्षों से इकट्ठा सेविंग्स ना लग जाए, इसे सुनिश्चित करने के लिए हर किसी को रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेना चाहिए. इसके लिए फ्लोटर प्लान लिया जा सकता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों को कवरेज मिल जाता है. वहीं आपको प्लान की वैधता का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए. 

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कितनी बार ले सकते हैं क्लेम - रेगुलर हेल्थ प्लान लेने पर आप एक से ज्यादा बार क्लेम ले सकते हैं. हालांकि, क्लेम की कुल राशि कवरेज सीमा के अंदर ही होनी चाहिए. क्रिटिकल इलनेस प्लान में ऐसा नहीं है. एक बार आपका क्लेम स्वीकार होने और तय राशि के भुगतान के साथ पॉलिसी तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट हो जाती है. रेगुलर हेल्थ प्लान में आपको हर साल पॉलिसी को रिन्यू कराना पड़ता है लेकिन गंभीर बीमारियों से जुड़े हुए प्लान लंबी अवधि के होते हैं. 



हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम इन वजहों से हो सकता है कैंसिल



  • अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है और आप हेल्थ इंश्योरेंस लेते है. जिसके बाद बीमा कंपनी को आपकी पुरानी बीमारी की जानकारी होती है. तो आपका हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम रद्द हो सकता है.


  • बीमा कंपनियां जब पॉलिसी देती हैं तो उसमें कुछ बीमारियों का कवर तुरंत मिलना शुरू हो जाता है. जबकि कुछ बीमारियों के लिए इंतजार अवधि (वेटिंग पीरियड) होती है. इंतजार अवधि का मतलब होता है कि बीमा पॉलिसी लेने के बाद आपको कोई बीमारी होती है तो उसका कवर कितने दिन बाद मिलेगा.


  • पॉलिसी खरीदने के बाद आप किसी बीमारी का इलाज कराते हैं और जांच में पता चलता है कि वह बीमारी काफी पुरानी और पॉलिसी लेने के पहले की है तो कंपनियां पुरानी बीमारी की शर्त का हवाला देकर क्लेम देने से मना सकती हैं. वह तर्क देती हैं कि पॉलिसी लेते समय उपभोक्ता ने बीमारी को छुपाया था और इस आधार पर क्लेम से इनकार कर सकती हैं. ऐसी स्थिति उपभोक्ता के लिए परेशानी का सबब बन जाती है.



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