कोरोना संकट में बेरोजगारी से बढ़ रहा तनाव, सोशल मीडिया का भी असर: स्टडी

कोरोना संकट में बेरोजगारी से बढ़ रहा तनाव, सोशल मीडिया का भी असर: स्टडी
देश की आबादी में करीब पांचवां हिस्सा युवाओं का है.

पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंंडिया ने युवाओं पर कोविड-19 के असर के बारे में एक सर्वे किया. इस सर्वे में पता चला कि युवाओं में बेरोजगारी की चिंता है. जबकि सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से उनका तनाव बढ़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 15, 2020, 2:39 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी और इसके मद्देनजर लगाये गए लॉकडाउन ने सामाजिक और आर्थिक रूप से लगभग हर वर्ग को प्रभावित किया है. भारत में इस संकट की स्थिति को देखते हुए जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ​ध्यान दिया जाए, खासकर युवाओं के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है. देश में किशोरों की संख्या कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है. किशोरों को इस समय शैक्षणिक अनिश्चितता, कहीं आने-जाने पर प्रतिबंध, सामाजीकरण या स्वच्छंदता, के साथ घरेलू काम को लेकर खिटपिट और परिवारों के सदस्यों के साथ अंतरविरोध ने बहुत प्रभावित किया है. वहीं, कुछ किशोरों में रोजगार को लेकर अनिश्चितता ने चिंता और तनाव का माहौल पैदा किया है.

मौजूदा संकट की स्थिति में युवाओं के सामने इस चुनौती को लेकर समझ बेहतर करने के लिए पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंंडिया (PFI)  ने 2 रैपिड एसेसमेंट सर्वे किया है. इसमें पता करने की कोशिश की गई कि युवाओं में कोविड-19 को लेकर किस तरह की जानकारी है और इससे मानसिक रूप से उनपर क्या प्रभाव पड़ा है. इस सर्वे के जरिए प्राप्त आंकड़ों से कई तरह की जरूरी जानकारियां निकलकर सामने आई हैं. तीन राज्यों में यह सर्वे किया गया. इसमें यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि बच्चों, किशोरों और महिलाओं तक हेल्थ और न्यूट्रिशन की कितनी उपलब्धता है.

यह भी पढ़ें: आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें आलू का दाम हुआ दोगुना, जानिए क्यों बढ़ रही है कीमत



इस सर्वे के नतीजों से कौन सी प्रमुख बातें सामने आईं?
1. उत्तर प्रदेश के 68 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल बढ़ गया है. इसमें से 92 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अवसाद बढ़ता है.

2. हर 10 में से 6 स्टूडेंट्स का मानना है कि कोविड-19 की वजह से पैदा हुई स्थिति के बाद उन्हें रोजगार को लेकर चिंता है.

3. उत्तर प्रदेश में हर 4 में से एक व्यक्ति ने माना कि लॉकडाउन के दौरान अवसाद महसूस हुआ. लॉकडाउन के दौरान अधिकतर लोगों ने माना कि घरेलू स्तर पर उनका बोझ बढ़ा है. ऐसे लोग करीब 42 फीसदी रहे.

PFI की एग्जीक्युटिव निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा, 'देश की आबादी में करीब पांचवां हिस्सा युवाओं का है. इसलिए जरूरी है कि कोविड-19 और लॉकडाउन के मद्देनजर उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए. कोविड-19 असर लंबी अवधि में न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर होगा, बल्कि सामाजिक जीवन और शिक्षा पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा. इससे हिंसा और मौजूदा असमानता बढ़ेगी.'

यह भी पढ़ें: Health ID Card: 15 अगस्त को पीएम कर सकते हैं ऐलान, हर नागरिक के लिए होगा जरूरी

स्टडी से पता चला कि देश में युवाओं को कोविड-19 के बारे में पर्याप्त जानकारी है. वो इस संक्रमण के लक्षण, सुरक्षा उपाय आदि के बारे में जानकारी रखते हैं. लेकिन, इसके बाद भी उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर उनके मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज