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कैबिनेट की बैठक में 37 साल इस पुरानी सरकारी कंपनी को बंद करने का फैसला

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 5:36 PM IST
कैबिनेट की बैठक में 37 साल इस पुरानी सरकारी कंपनी को बंद करने का फैसला
1983 में हुई थी इस कंपनी की स्थापना

कैबिनेट ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स लिमिटेड (Hindustan Fluorocarbons Limited, HFL) को बंद करने का फैसला किया है. इस कंपनी में 88 कर्मचारी काम करते हैं.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 5:36 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला हुआ है. कैबिनेट ने सरकारी कंपनी हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स लिमिटेड (Hindustan Fluorocarbons Limited, HFL) को बंद करने का फैसला किया है. इस कंपनी में 88 कर्मचारी काम करते हैं. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने बंद पड़ी हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स लिमिटेड को आधिकारिक रूप से बंद करने का निर्णय लिया है. ये कंपनी पहले से ही बंद थी. 37 साल ये पुरानी सरकारी कंपनी अब कागज पर भी बंद हो गई.

37 साल पुरानी है ये कंपनी
हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बंस की स्थापना 14 जुलाई 1983 को हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स, लिमिटेड (HOCL) की सब्सिडियरी के तौर पर हुई थी. ये तेलांगाना के जिले संगारेड्डी में रूद्राराम में स्थित है. सन 1987 में कंपनी ने अपना प्रोडक्शन शुरू किया. कंपनी पोली टेट्रा फ्लोरो (PTFE-Poly Tetra Fluoro Ethylene) इथलेन बनाती है. इसके अलावा कंपनी CFM 22 बनाती है. PTFE का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक इंडस्ट्रीज और ऐरोस्पेस सेक्टर्स में होता है. CFM-22 का इस्तेमाल रेफ्रिजिरेशन में होता है.



एचएफएल 2013-14 से नुकसान में है और उसका नेटवर्थ घटकर नकारात्मक हो गया है. 31 मार्च 2019 की स्थिति के अनुसार कंपनी को 62.81 करोड़ रुपये का संचयी नुकसान हुआ और उसकी नेटवर्थ उसकी कुल देनदारी के मुकाबले 43.20 करोड़ रुपये कम है. यह पूर्ववर्ती औद्योगिक और वित्तीय निर्माण बोर्ड में बीमारू कंपनी के रूप में पंजीकृत थी.

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बयान के अनुसार, कंपनी को बंद करने के लिये 77.20 करोड़ रुपये का समर्थन उपलब्ध कराया गया है. यह ब्याज मुक्त कर्ज है जो एचएफएल की संबंधित देनदारी के निपटान के लिये है. देनदारी में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना का क्रियान्वयन, बकाया वेतन का भुगतान और वैधानिक बकाये का भुगतान शामिल हैं. इसके अलावा एसबीआई के कर्ज और एचएफल के कुछ कर्मचारियों को रखने को लेकर प्रशासनिक व्यय के भुगतान के लिये भी यह राशि दी गयी है.

दो साल में कंपनी को बंद करने योजना लागू करने के प्रस्ताव को लागू करने के लिये कुछ कर्मचारियों को रखा जा रहा है. ब्याज मुक्त कर्ज का भुगतान जमीन और अन्य संपत्ति की बिक्री के जरिये किया जाएगा.

#CCEA approves Closure of Hindustan Fluorocarbons Limited (HFL), a Central Public Sector Enterprise (CPSE) under Department of Chemicals & Petrochemicals#CabinetDecisions pic.twitter.com/WTg95XM3zN



नीति आयोग ने एनटीपीसी, सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, भारत अर्थ मूवर्स और सेल सहित सरकारी कंपनियों की जमीन और इंडस्ट्रियल प्लांट्स जैसी 50 संपत्तियों की पहचान की. एक अधिकारी ने बताया कि नीति आयोग ने डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ऐंड पब्लिक ऐसेट मैनेजमेंट (दीपम) को एक लिस्ट भेजी है. उन्होंने कहा, 'हम इन संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं. इससे पहले दीपम ने स्कूटर्स इंडिया, भारत पंप्स ऐंड कंप्रेसर्स, प्रॉजेक्ट ऐंड डिवेलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल), हिंदुस्तान प्रीफैब, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट, ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी और हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बंस से अलग की गई कुछ संपत्तियों की पहचान बिक्री के लिए की थी. सरकार ने वित्त वर्ष 2020 में 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. वित्त वर्ष 2019 में केंद्र ने विनिवेश से 84,972.16 करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि उसने इसके लिए 80 हजार करोड़ का लक्ष्य रखा था.

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First published: January 22, 2020, 3:28 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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