ऐतिहासिक रूप से भारत को विश्व स्तरीय निर्णय लेने के लिए सराहा गया है: प्रोफेसर कौशिक बसु

kaushik basu

वर्ल्ड बैंक के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट और भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु से CNBC-TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर शिरीन भान ने विशेष बातचीत की. CNBC-TV18 1991 भारत में आर्थिक सुधार के 30 साल पूरे होने पर बसु से बातचीत कर रहा था. बसु ने विभिन्न सवालों पर खुलकर जवाब दिए.

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    वर्ल्ड बैंक के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट और भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु से CNBC-TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर शिरीन भान ने विशेष बातचीत की. CNBC-TV18 1991 भारत में आर्थिक सुधार के 30 साल पूरे होने पर बसु से बातचीत कर रहा था. बसु ने विभिन्न सवालों पर खुलकर जवाब दिए.
    कौशिक बसु ने कहा कि मैं हमेशा इस पक्ष में था कि पेट्रोल डीजल की कमीतों को नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन सरकार जैसा कर रही है उसे इस तरह से आर्टिफिशियल टैक्स भी नहीं लगाना चाहिए.

    नीति निर्धारण (policymaking)
    नीति निर्धारण (policymaking) पर बसु ने कहा कि, "नौकरशाही के निर्णय लेने की गति धीमी थी. शुरूआत में इसने मुझे फ्रस्टेट किया. मैंने तर्क दिया कि निर्णय लेने को और अधिक विभाजित किया जाना चाहिए. नोटबंदी एक क्विक डिसिजन था लेकिन गलत निर्णय था. बिना विशेषज्ञता के त्वरित निर्णय लेना भारत को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा रहा है. क्विक डिसिजन लेने का मतलब यह नहीं होता कि बिना किसी विशेषज्ञता के कुछ भी निर्णय ले लो.

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    आर्थिक नीति संबंधी निर्णय लेते समय सभी दलों को सहयोग करना चाहिए, आर्थिक नीति निर्णयों को राजनीति खराब कर रही है और यह भारत को नुकसान पहुंचा रहा है. दुनिया में असमानता अस्वीकार्य है और सामूहिक रूप से, भारत और दुनिया दोनों में, सुपर अमीरों को बहुत अधिक कर चुकाना होगा.
    विश्व स्तरीय निर्णय लेने के लिए ऐतिहासिक रूप से भारत की सराहना की गई है. आर्थिक नीतियों पर केंद्र और राज्य के बीच बहुत अधिक सहयोग की आवश्यकता है. भारत में केंद्र-राज्य सहयोग बहुत कमजोर हो गया है. आर्थिक नीतियों पर राजनीतिक युद्ध हावी हो रहा है. युवा बेरोजगारी इसका एक उदाहरण है.

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    बाजार, लाभ और प्रोत्साहन सभी आवश्यक हैं लेकिन संतुलित होने चाहिए. असमानता को कम करने के लिए, सुपर अमीरों को बहुत अधिक करों का भुगतान करना होगा जो गरीबों को दिए जाते हैं. भारत में कई अमीर व्यक्ति उच्च-करों पर प्रगतिशील दृष्टिकोण रखते हैं.

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