4 साल से बंद सरकारी कंपनी HMT के प्लांट और प्रॉपर्टीज़ से कमाई के लिए बनाया नया प्लान!

4 साल से बंद सरकारी कंपनी HMT के प्लांट और प्रॉपर्टीज़ से कमाई के लिए बनाया नया प्लान!
HMT की पिंजौर यूनिट 2016 से बंद है

केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए घड़ी (Watches) और ट्रैक्टर (Tractor) बनाने वाली सरकारी कंपनी HMT (Hindustan Machine Tools) के प्लांट और प्रॉपर्टी को किराए पर देने का फैसला किया है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Government of India) ने ट्रैक्टर बनाने वाली सरकारी कंपनी HMT (पहले Hindustan Machine Tools) की संपत्तियों को लीज पर देने की तैयारी में है. मनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक, हेवी इंडस्ट्री डिपार्टमेंट द्वारा जारी प्रस्ताव पत्र (RFP) में कहा गया है कि हरियाणा के पिंजौर में 43 एकड़ में बनी HMT की उत्पादन इकाई को 30 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा. एचएमटी कंपनी 1963 में बनी थी और पिंजौर की ट्रैक्टर यूनिट 1972 में शुरू हुई थी.

HMT की पिंजौर यूनिट 2016 से बंद है. इसी साल HMT का वॉच डिवीजन को भी बंद किया गया था. HMT की पिंजौर ट्रैक्टर यूनिट की सिंगल शिफ्ट बेसिस पर प्रति वर्ष ट्रैक्टर उत्पादन क्षमता 8,500 यूनिट है. इस इकाई को लीज पर देने के लिए दो बिड फार्मेट में टेंडर जारी किया गया है.

ये हैं टेक्निकल बिड और फाइनेंशियल बिड. इसके लिए बोली लगाने वाली बिडर की मिनिमम नेटवर्थ 31 मार्च 2020 को 20 करोड़ रुपये होनी चाहिए. RFP डॉक्युमेंट के मुताबिक इसके लिए सिर्फ कैपिटल गुड्स और ऑटो सेक्टर की कंपनियां बोली लगा सकेंगी.







कब शुरू हुई थी HMT -एचएमटी की कलाई पर बांधी जाने वाली घड़ियों के उत्पादन की शुरुआत जापान की सिटिज़न वॉच कंपनी के साथ मिलकर 1961 में हुई थी. जिसे लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था​ कि इससे देश के लोगों में पंक्चुअल होने का अनुशासन आएगा. 1970 और 80 के दशक में इन घड़ियों का कारोबार चरम पर रहा. 80 के दशक के आखिर से इन घड़ियों के सामने प्रतिस्पर्धा का दौर आया जब टाटा समूह की टाइटन कंपनी की कहानी शुरू हुई. 90 के दशक में एचएमटी की घड़ियां पुराने ज़माने की तकनीक की कही जाने लगीं. फिर भी इनकी विश्वसनीयता इतनी थी कि एक बड़ा वर्ग इनका ही दीवाना था.

इस कैचलाइन के साथ एचएमटी घड़ियों के विज्ञापन दूरदर्शन पर प्रसारित होते थे और 70 के दशक में जब देश की आबादी 50 करोड़ से कुछ ज़्यादा थी, तब एचएमटी 1 करोड़ घड़ियों का उत्पादन कर चुकी थी. साल 2012-13 में इन घड़ियों का सालाना कारोबार 242 करोड़ रुपये से ज़्यादा का था. लेकिन बड़े कर्ज़ों और लगातार घट रहे मुनाफे के कारण इन घड़ियों का उत्पादन बंद कर देने का फैसला लिया गया और अब एचएमटी घड़ी कंपनी को पूरी तरह बंद कर दिया गया.



एचएमटी घड़ियां बेशक पुराने ज़माने या कम से कम एक पीढ़ी पहले की बात हो चुकी हैं, लेकिन अब भी कई घरों में मिल सकती हैं. वर्तमान समय में वैश्विक बाज़ार खुला हुआ है इसलिए दुनिया भर के ब्रांड्स देश में उपलब्ध हैं. टाइटन और टाइमेक्स के अलावा देश में कैसियो, रॉलेक्स, गेस, टॉमी हिलफिगर, फॉसिल और ग्यॉर्डेनो ब्रांड की घड़ियां काफी पसंद की जा रही हैं. इनके अलावा हाईटेक गैजेट्स की सुविधाओं वाली और डिजिटल घड़ियां भी बाज़ार में उपलब्ध हैं.

एचएमटी की घड़ियों की यादें काफी समय तक बनी रहेंगी. ऐसे ही कुछ और ब्रांड्स भी हैं, जो देश की यादों में बने हुए हैं और अगले कुछ और समय तक बने रहेंगे जब तक वो पीढ़ियां ज़िंदा हैं, जो 80 और 90 के दशक में बचपन या जवानी गुज़ार रही थीं.
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