खराब क्रेडिट स्कोर पर भी आसानी से पा सकते हैं होम लोन, अपनाने होंगे यह तरीके

बैंक फिक्स ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) भी देखते है. इससे पता चलता है कि आप हर महीने लोन की कितने रुपए तक की किस्त दे सकते हैं.

बैंक फिक्स ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) भी देखते है. इससे पता चलता है कि आप हर महीने लोन की कितने रुपए तक की किस्त दे सकते हैं.

कमजोर क्रेडिट स्कोर के साथ होम लोन पाने के लिए छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. मसलन, को-एप्लीकेंट जोड़ना और एलटीवी कम रखना.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 7:33 PM IST
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नई दिल्ली. बैंक से लोन लेने के लिए सबसे अहम होता है हमारा सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर). लेकिन अनियमित आय या कभी किस्त चूकने की वजह से यह स्कोर कमजोर हो जाता है. ऐसी स्थिति में बैंक लोन देने से मना कर देता है. ऐसे में हम आपको आज कुछ ऐसी बातों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाने से आपको आसानी से होम लोन मिल सकता है.

एलटीवी रेशियो से लोन लेने में होती है आसानी

लोन-टू-वैल्‍यू (एलटीवी) रेशियो लोन की रकम तय करने में अहम योगदान देता है. यदि यह रेशियो कम रखा जाए तो आपके लिए लोन लेना आसान हो सकता है. जैसे घर खरीदने के लिए लोन राशि को कम रखकर अपना कॉन्ट्रिब्‍यूशन ज्‍यादा रखें. इससे प्रॉपर्टी में खरीदार का कॉन्ट्रिब्‍यूशन बढ़ जाता है और बैंक का जोखिम कम होता है. साथ ही, ईएमआई भी कम बनती है. इससे लोन मिलने की चांस बढ़ जाएंगे.

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अधिकतम अवधि के लिए लें लोन

सामान्यत: लोन देने से पहले बैंक आपकी ईएमआई भरने की क्षमता देखते हैं. जैसे एक पैमाना आपके वेतन का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा से कम ईएमआई नहीं होनी चाहिए. इसलिए, जब भी लोन लें तो उसे अधिकतम वर्षों के लिए लें. इससे आपकी ईएमआई कम हो जाएगी.

दूसरे लोन चुका दें



बैंक फिक्स ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) भी देखते है. इससे पता चलता है कि आप हर महीने लोन की कितने रुपए तक की किस्त दे सकते हैं. यदि आपके छोटे-छोटे दूसरे लोन चल रहे हैं तो उन्हें क्लीयर करा लें. इससे आपको ईएमआई बनवाने में सुविधा होगी. साथ ही दूसरे कर्जाें की ईएमआई कम हो जाने से होम लोन की ईएमआई बढ़वाने में मदद मिलेगी.

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अपने साथ सह आवेदन का नाम भी जोड़े

को-एप्‍लीकेंट यानी सह आवेदक जैसे आपके जीवनसाथी, या माता-पिता आदि को जोड़ने से कर्ज देने वाली संस्‍थान का जोखिम कम हो जाता है. यह कोई ऐसा व्‍यक्ति हो सकता है जिनकी स्‍थायी इनकम हो और अच्‍छा क्रेडिट स्‍कोर हो. लोन की रकम तब त‍क नहीं बढ़ेगी जब तक वे अच्‍छी कमाई वाले को-एप्‍लीकेंट को नहीं जोड़ते हैं. को-एप्‍लीकेंट को जोड़ने से लोन अप्रूव होने के चांस बढ़ जाते हैं.

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सिक्‍योर्ड लोन के लिए बैंक बरतते हैं नरमी

जो लोन किसी असेट की गारंटी पर लिया जाता है, उसे सिक्योर्ड लोन कहते हैं. प्रॉपर्टी, गोल्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), शेयर, म्यूचुअल फंड या PPF आदि जैसे एसेट्स पर लोन लिया जा सकता है. अनसिक्‍योर्ड लोन के मुकाबले सिक्योर्ड लोन के लिए नियम थोड़े नरम होते हैं.

जिस बैंक में अकाउंट, उसी में करें आवेदन

अगर आपकी इनकम नियमित नहीं है या क्रेडिट स्कोर खराब है तो आपको उसी बैंक में लोन के लिए आवेदन करना चाहिए जहां आपका अकाउंट या फिक्स्ड डिपोजिट (FD) हो. अगर आप उसी बैंक से लोन ले लिए अप्लाई करते हैं तो लोन मिलना आसान हो सकता है.

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एनबीएफसी में भी कर सकते हैं आवेदन

आपको बैंक से लोन मिलने में परेशानी हो रही है तो नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. एनबीएफसी कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को भी लोन देती हैं. हालांकि NBFC द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर बैंकों द्वारा दी जाने वाली पेशकश की तुलना में अधिक होती हैं.
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