Home Loan लेने का कर रहे हैं प्लान, कभी ना करें ये 5 गलतियां

डाउनपेमेंट की राशि कम नहीं करें

डाउनपेमेंट की राशि कम नहीं करें

पैसाबाजार डॉट कॉम के हेड ऑफ होम लोन्स रतन चौधरी का कहना है कि लोग Home loan के लिए आवेदन करने में अक्सर 5 तरह की गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है और वे मैक्सिमम फायदे से महरूम हो जाते हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना (Covid 19) के इस दौर ने दो चीजों की अहमियत बेहद अच्छे से समझा दी है. एक तो वाहन का होना और दूसरी बात घर का. इस वक्त जब लॉकडाउन (Lockdown) और महामारी के चलते कई लोगों की नौकरियां नहीं रही, ऐसे में उन लोगों को और भी तकलीफों का सामना करना पड़ा जिन्होंने किराये पर घर लिया था. एक तो इनकम बंद ऊपर से हर महीने किराये का बोझ. यही वजह है कि लोग अब अपना घर खरीदने के तरफ भी ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है. ऐसे में कई बैंक भी विभिन्न रेट ऑफ इंटरस्ट और कई स्कीम्स के साथ होम लोन ऑफर भी कर रहे हैं.


लोग घर खरीदते समय लिए गए होम लोन में कई गलतियां भी कर बैठते हैं जिसका खामियाजा उन्हें भविष्य में उठाना होता है. होम लोन लेने के फैसले में गलती होने पर आप अधिक से अधिक लोन पाने के अवसर को तो खोते ही हैं, साथ ही यह भविष्य के लोन रीपेमेंट्स को भी प्रभावित करता है. 


पैसाबाजार डॉट कॉम के हेड ऑफ होम लोन्स रतन चौधरी का कहना है कि लोग Home loan के लिए आवेदन करने में अक्सर 5 तरह की गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है और वे मैक्सिमम फायदे से महरूम हो जाते हैं. आज आपको 5 ऐसी गलतियों के बारे में बता रहे हैं जिससे सभी होम लोन आवेदकों को बचना चाहिए


डाउन पेमेंट की राशि कम नहीं करें


रतन चौधरी का कहना है कि होम लोन लेने में लोग अक्सर यह गलती कर बैठते हैं और डाउनपेमेंट की राशि अपनी क्षमता से काफी कम चुकाते हैं. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंक किसी भी प्रॉप्रटी की वैल्यू का 75-90 फीसदी तक की राशि होम लोन के रूप में फाइनेंस कर सकते हैं. यह आवेदक के क्रेडिट रिस्क आकलन के आधार पर किया जाता है। वहीं कुछ फीसदी राशि आवेदक को डाउनपेमेंट या मार्जिन कांट्रिब्यूशन के रूप में देनी होती है. यहीं  होम लोन आवेदक गलती कर बैठते हैं और डाउनपेमेंट की रासि कम कर देते हैं, जिसके कारण उन्हें अधिक ब्याज चुकाना पड़ता है. होम लोन आवेदकों को प्रॉपर्टी की वैल्यू का कम से कम 10% से 25% राशि डाउनपेमेंट करना चाहिए, ताकि आपको लोन मिलने की संभावना बढ़ जाए. डाउनपेमेंट जितना अधिक होगा, बैंकों के लिए क्रेडिट रिस्क उतना ही कम होगा और लोन आवेदन मंजूर होने की संभावना उतनी अधिक बढ़ेगी. इसके अलावा ब्याज दरों में भी राहत मिलेगी. 


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क्रेडिट स्कोर जरूर रिव्यू कराएं




होम लोन एप्लीकेशन का आकलन करते समय बैंक आवेदकों के क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं. जिन आवेदकों का क्रेडिट स्कोर 750 से अधिक है, उनके होम लोन आवेदन के मंजूर होने की संभावना अधिक होती है. साथ ही उन्हें कम इंटरेस्ट रेट पर होम लोन मिल जाता है. इसलिए होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले आपना क्रेडिट स्कोर जरूर रिन्यू कराएं.


बैंकों के होम लोन की तुलना करें


होम लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों और लेंडर्स द्वारा ऑफर किए जाने वाले इंटरेस्ट रेट्स की तुलना करें. होम लोन की ब्याज दर, प्रोसेसिंग चार्जे, रीपेमेंट टेन्योर, लोन अमाउंट और एलटीवी रेशियो हर लेंडर्स के आधार पर अलग हो सकती है. ऐसे में लोन के लिए आवेदन करने से पहले अधिक से अधिक लेंडर्स द्वारा ऑफर किए जाने वाले होम लोन ऑफर्स की तुलना कर लेनी चाहिए.


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कितना EMI चुका सकते हैं, आकलन करें


आपको बता दें कि होम लोन की एप्लीकेशन स्वीकार करने के बाद बैंक या वित्तीय संस्थान यह चेक करते हैं कि लोन लेने वाला कितना EMI अफोर्ड कर सकता है. आमतौर पर यह आपकी सैलरी या कमाई 50% से 60% होता है.अगर EMI आपके महीने की आय से 60% से अधिक होता है तो लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है. इसलिए होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर्स के जरिए ऑप्टिमम ईएमआई को कैलकुलेट करना जरूरी है.


इमरजेंसी फंड में होम लोन की EMI को रखें


विपरीत परिस्थितियों जासे नौकरी चले जाने, बीमारी पड़ने के कारण आपकी कमाई रुक सकती है. इससे आपकी लोन रीपेमेंट कैपेसिटी बुरी तरह प्रभावित होती है. होम लोन का EMI नहीं चुका पाने पर बैंक भारी जुर्माना लगा सकता है और आपका क्रेडिट स्कोर भी कम हो सकता है. इसलिए इमरजेंसी फंड के तौर पर 6 महीने की EMI की व्यवस्ता करना बुद्धिमानी है.

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