कभी बरगद के इस पेड़ के नीचे लगता था भारत का शेयर बाजार, अब दुनिया रखती हैं हर घंटे नज़र

आपको जानकार हैरानी होगा कि बीएसई सेंसेक्‍स एशिया के सबसे प्राचीन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में से एक है और आज मुंबई में जहां दलाल पथ है, वहां बीएसई की बिल्‍डिंग नहीं थी, बल्‍कि शेयर बाजार एक बरगद के पेड़ नीचे से चलता था.

News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 4:00 PM IST
कभी बरगद के इस पेड़ के नीचे लगता था भारत का शेयर बाजार, अब दुनिया रखती हैं हर घंटे नज़र
कभी बरगद के इस पेड़ के नीचे लगता था भारत का शेयर बाजार, अब दुनिया रखती हैं हर घंटे नज़र
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Updated: July 9, 2019, 4:00 PM IST
भारत की सबसे पुरानी एक्सचेंज यानी बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) को शुरू हुए 144 साल हो गए है.  9 जुलाई 1875 में इसकी शुरुआत हुई थी. आपको जानकार हैरानी होगा कि बीएसई सेंसेक्‍स एशिया के सबसे प्राचीन स्‍टॉक एक्‍सचेंज में से एक है और आज मुंबई में जहां दलाल पथ है, वहां बीएसई की बिल्‍डिंग नहीं थी, बल्‍कि शेयर बाजार एक बरगद के पेड़ नीचे से चलता था.  दरअसल, बीएसई और दलाल स्ट्रीट फिलहाल तो एक ही हैं, लेकिन एक्सचेंज का जन्‍म 1875 में एक बरगद के वृक्ष नीच हुआ था, जहां आज हार्निमन सर्कल है, जो साउथ मुंबई में एक जगह है. आपको बता दें कि किसी भी देश के स्‍टॉक एक्‍सचेंज उस देश की इकॉनॉमी का ग्रोथ का इंडीकेटर ही होता है. वहीं, अब दुनियाभर के निवेशकों की नज़रें भारत पर टिकी रहती हैं. अब ये दुनिया के टॉप-10 एक्सचेंज में शामिल हो गई है. 

मुंबई के इसी इलाके में टाउनहाल के पास बरगद के वृक्ष के नीचे सभी लोग दलाल एकत्रित होते थे और शेयरों का सौदा करते थे. हालांकि कुछ सालों बाद ये दलाल मेडोज स्ट्रीट और महात्मा गांधी रोड के जंक्शन पर बरगद के वृक्ष के नीचे जुटने लगे. धीरे-धीरे शेयर दलालों की संख्या बढ़ती गई और इसका स्‍थान बदलता रहा. कुछ समय बाद 1874 में मुंबई में देश की अर्थव्‍यवस्‍था के इस प्रतीक को दक्षिण मुंबई में ही एक स्थाई जगह मिली जो आज दलाल स्ट्रीट के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.



इन चार लोगों ने की शुरुआत- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत का चार गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स ने की थी. सन 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई (तब बॉम्बे) के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे.

>> इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती गई. 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया.

>> साथ ही, दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया. आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है.

दुनिया रखती हैं हर मिनट नज़रें- भारत दुनिया की सर्वाधिक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्‍था है. यह इतना बड़ा बाजार है कि पूरी दुनिया की नजर इस पर लगी हुई है. भारत के इकॉनॉमी के इंडीकेटर यानी की बीएसई सेंसेक्‍स और एनएसई ने बीते दो सालों ने लगातार छलांग ही लगाई है. इसमें भी बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज जो देश की अर्थव्‍यवस्‍था का एक तरह से प्रतीकात्‍मक रूप है, ये दर्शाता रहा है कि एशिया में तो चीन के समकक्ष भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की अपनी एक रफ्तार है, जो बढ़ ही रही है.
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) भी भारत का प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है. इसकी स्थापना 1990 में डिमिचुअल इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज के रूप में की गई थी. विभिन्न सेक्टर्स की शीर्ष कंपनियां इसका संचालन करती हैं.

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज दुनिया के एक्सचेंज सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज बनाया गया है. इसका मुख्यालय पेरिस में है. दुनिया के प्रमुख 62 स्टॉक एक्सचेंज इसके सदस्य हैं. इनमें से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भी एक है.

25 जनवरी, 2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था. इसे बीएसई का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है.
First published: July 9, 2019, 3:13 PM IST
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