कोरोना संकट ने स्वास्थ्य सुविधाओं की खोली पोल! महंगे इलाज ने 5.5 करोड़ भारतीयों को गरीबी में धकेला

महंगी स्वास्थ्य सेवाओं ने 55 मिनियन भारतीयों को किया गरीब,

आज हम आपको उड़ीसा के एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे, जहां कोरोना महामारी के चलते लोगों को गरीबी का सामना करना पड़ा. यहां कोरोना ने कई परिवारों को गरीबी और कर्ज में डूबा दिया.

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    नई दिल्ली: देशभर में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus in India) ने एक ओर जहां सबकुछ खराब किया है. वहीं, दूसरी ओर देश की स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) की पोल खोलकर रख दी है. आज भी देश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोग स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर काफी परेशान रहते हैं. आज हम आपको ओडिशा (Odisha) के एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे, जहां कोरोना महामारी के चलते लोगों को गरीबी का सामना करना पड़ा. यहां कोरोना ने कई परिवारों को गरीबी और कर्ज में डूबा दिया.

    52 वर्षीय गणेश प्रसाद ओडिशा में गंजम और खोरदा जिलों की सीमा पर बाकुतागम गांव में रहते हैं. उनकी किराने की छोटी सी दुकान है, जिसके जरिए वह अपना जीवन जीते हैं. बाकुतागम में जून 2020 तक स्थितियां सामान्य थींं. लोग घरों में रहकर अपनी दुकान का थोड़ा सामान बेचकर जीवन चला रहे थे और वहां कोरोना के ज्‍यादा मामले भी नहीं थी, लेकिन जब प्रवासी कामगारों (Migrant Laborer) ने अपने-अपने घरों की ओर रुख करना शुरू किया. उसके बाद से गांव के हालात बदलने लगे.

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    केंद्र सरकार ने इन प्रवासी कामगारों को निकालने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें (Special Trains) चलाईं थी. इन ट्रेनों के जरिए बाहर रहने वाले मजदूरों को उनके गांव की ओर वापस लौटाया गया. ओडिशा का यह क्षेत्र धान की खेती, हैंडलूम्स, समुद्र तटों और फेमस चिलिका झील के बावजूद काफी पिछड़ा बना हुआ है. यहां से काम की तलाश में हजारों लोग गुजरात (Gujarat), महाराष्ट्र (Maharashtra), तमिलनाडु (Tamil Nadu) और कर्नाटक (Karnataka) जैसे राज्यों में चले जाते हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान जब वे लोग अपने-अपने घरों को वापस आए तो वहां कोरोना की स्थिति काफी खतरनाक हो गई. इनमें से ज्यादातर लोग कोरोना वायरस से पीड़ित होकर अपने घर पहुंचे.



    लोगों के घरों तक पहुंचने लगा कोरोना
    माइग्रेंट वर्कर के आने के बाद अकेले खोरदा और गंजाम के दो जिलों में लगभग 558, जबकि पूरे ओडिशा में 1,829 लोगों की कोरोना से मौत हो गई. लोगों के घरों तक कोरोना वायरस तेजी से फैलने लगा. ऐसे में यहां पर लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं की हुई. प्रसाद और उनके जैसे लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा. इस बीमारी ने लोगों को गरीबी और कर्ज में डूबा दिया.

    महंगे बीमारी खर्च ने लोगों की बिगाड़ी स्थिति
    राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और सरकारी अस्पतालों के विशाल नेटवर्क के बावजूद आउट-ऑफ-पॉकेट हेल्थकेयर खर्च (Healthcare Expenses) ने लोगों को गरीबी के जाल में फंसा दिया. कोविड-19 महामारी ने हजारों परिवारों के लिए मामलों को बदतर बना दिया.

    55 मिलियन भारतीय हुए गरीब
    पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) के 2018 के अध्ययन में अनुमान लगाया था कि 2017 में आउट-ऑफ-पॉकेट स्वास्थ्य खर्चों ने 55 मिलियन भारतीयों को गरीबी में डाल दिया है.

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    राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2016-17 के अनुसार, कुल स्वास्थ्य व्यय के प्रतिशत के रूप में आउट ऑफ पॉकेट व्यय (OPE) 58.7 प्रतिशत है. साल 2013-14 में 64.2 प्रतिशत के उच्च स्तर से थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन यह अभी भी उच्चतम में से एक है.

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