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इन 7 वजहों से सस्ता और महंगा होता है सोना, फटाफट जान लीजिए

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दुनियाभर के लोग अस्थिरता और अनिश्चितता से खुद को बचाने के लिए सोने को खरीदते हैं.

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पेट्रोल और डीजल की कीमतों की तरह देश में सोने की कीमत भी रोज बदलती है. सोने की कीमत कई बातों पर निर्भर करती है. इनमें आर्थिक और राजनीति कारण सबसे अहम हैं. ये घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के हो सकते हैं. जैसे अगर हमारे देश की सरकार ने सोने का आयात से जुड़ा कोई नया नियम लागू किया है तो इसका असर सोने की कीमत पर पड़ेगा. इसी तरह सोने का निर्यात करने वाले देश में किसी साल उत्पादन घट जाता है तो इसका असर भी घरेलू बाजार में सोने की कीमत पर पड़ेगा. इसी तरह देश में या विदेश में ऐसे कई घटनाएं होती हैं, जिनका असर सोने की कीमत पर पड़ता है. इसके अलावा शेयर बाजार का प्रदर्शन, डॉलर की कीमत, दुनिया में सोने की खपत में बढ़ोतरी या कमी, देशों के बीच होने वाली लड़ाई आदि शामिल हैं.  आइए जानें इसके बारे में...

7 वजहों से सस्ता और महंगा होता है सोना


(1) भारत समेत दुनियाभर के लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं. मतलब साफ है किसी भी सोना बेचकर खाने-पीने से लेकर कोई भी सामान खरीदा जा सकता हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दुनियाभर के लोग अस्थिरता और अनिश्चितता से खुद को बचाने के लिए सोने को खरीदते हैं. जब दूसरी संपत्तियां अपनी कीमत गंवाने लगती हैं तो सोना इस गिरावट से बचा रहता है. भारतीयों में सोने का आकर्षण हमेशा से रहा है. समय अच्छा हो या बुरा लोग इस चमकीली धातु का मोह नहीं छोड़ पाते. अर्थव्यवस्था दौड़ी या मंद हुर्इ, निवेशकों ने सोने में खरीद जारी रखी.

(2) जब महंगार्इ बढ़ती है तो करेंसी की कीमत कम हो जाती है. उस समय लोग धन को सोने के रूप में रखते हैं. इस तरह महंगार्इ के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने पर सोने का इस्तेमाल इसके असर को कम करने के लिए किया जाता है.
(3) उद्योग के कुछ जानकारों के मुताबिक, सामान्य स्थितियों में सोने और ब्याज दरों के बीच उलटा संबंध है. ब्याज दरों का बढ़ना संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है. मजबूत अर्थव्यवस्था में महंगार्इ बढ़ती है. महंगार्इ के खिलाफ सोने को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा जब दरें बढ़ती हैं तो निवेशक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसे लगाते हैं. सोने के उलट इनमें उन्हें ज्यादा अच्छा रिटर्न मिलता है.



(4) सोने की खपत में ग्रामीण मांग की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह खपत मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है. भारत सालाना 800-850 टन सोने की खपत करता है. इस खपत में 60 फीसदी हिस्सेदारी ग्रामीण भारत की है. अगर फसल अच्छी होती है, तो किसान अपनी आय से संपत्तियां बनाने के लिए सोना खरीदते हैं. इसके उलट, अगर मानसून खराब रहता है तो किसान धन जुटाने के लिए सोने को बेचते हैं.

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(5) कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि सोने का ज्यादातर एसेट क्लास के साथ उलटा संबंध है या फिर इनके साथ इसका कोर्इ संबंध नहीं होता है. इसलिए पोर्टफोलियो को ये विविधता प्रदान करता है. जब शेयरों में तेज गिरावट आती है तो अमूमन सोने के दाम बढ़ते हैं. माना जाता है कि इस दौरान निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं.

(6) दुनिया में जब तनाव की स्थिति बढ़ती है तो सोने में निवेश मांग बढ़ जाती है. यह कर्इ बार देखा गया है.

(7) सामान्य स्थिति में जब डॉलर कमजोर होता है तो सोना चढ़ता है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में होती हैं, इसलिए डॉलर में कमजोरी आने पर पीली धातु के दाम मजबूत होते हैं.
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