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चीन आखिर क्यों और किस वजह से तनाव के बीच भी भारत से खरीद रहा है चावल, जानिए पूरा मामला

10 लाख टन चावल भारत से होता है एक्सपोर्ट
10 लाख टन चावल भारत से होता है एक्सपोर्ट

अब चीन की जो डिमांड है वो टुकड़ा चावल की है. जिसे पौना चावल भी कहा जाता है. चीन ने नॉन बासमती का पौना चावल मांगा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 12:01 PM IST
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नई दिल्ली. बेशक गलवान घाटी (Galwan Ghati) और पैंगोंग झील में चीन (China) और भारतीय सेना (Indian Army) आमने-सामने डटी हुई हैं. लेकिन बावजूद इसके चीनी सेना और वहां के जनता भारतीय चावल के बने नूडल्स खाएगी. इसके लिए चीन भारत से एक खास तरह का चावल (Rice) खरीद रहा है. हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब चीन भारत से चावल आयात करेगा. इससे पहले 2017-18 में चावल खरीदे थे. इतना ही नहीं इसी साल अक्टूबर में भी भारत से चावल चीन गए थे.

भारत से नूडल्स के लिए टुकड़ा चावल जाएगा चीन-ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के विनोद कौल ने न्यूज18 हिंदी को बताया, “यह पहला मौका नहीं है जब चीन को भारतीय चावल पसंद आ रहा है. इससे पहले 2017-18 में एक हज़ार टन चावल चीन गया था. अक्टूबर में करीब 34 टन चावल चीन भेजा था. लेकिन अब चीन की जो डिमांड है वो टुकड़ा चावल की है. जिसे पौना चावल भी कहा जाता है. चीन ने नॉन बासमती का पौना चावल मांगा है. चीन में इसका इस्तेमाल नूडल्स बनाने में किया जाएगा. चीन में नूडल्स की खपत को देखते हुए उम्मीद है कि चीन से बड़े ऑर्डर आएंगे.”

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300 डॉलर प्रति टन की कीमत पर हुए सौदे-भारतीय कारोबारियों ने चीन के साथ दिसंबर-फरवरी शिपमेंट्स के लिए एक लाख टन पौना चावल का सौदा किया है. यह सौदा करीब 300 डॉलर प्रति टन की दर पर किया गया है. इस बार चीन को हमेशा आपूर्ति करने वाले देश थाइलैंड, वियतनाम, म्‍यांमार और पाकिस्‍तान के पास निर्यात के लिए सीमित चावल है. वहीं, ये देश भारत के मुकाबले करीब 30 डॉलर प्रति टन ज्‍यादा की दर से सौदे की पेशकश कर रहे थे. बता दें कि साल 2020 के शुरुआती 10 महीनों में भारत का चावल निर्यात 1.19 करोड़ टन रहा है, जो पिछले साल 83.40 लाख टन रहा था. इस तरह भारत का चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले इस साल जनवरी-अक्‍टूबर में ही 43 फीसदी ज्‍यादा रहा है.

10 लाख टन चावल भारत से होता है एक्सपोर्ट-विनोद कौल बताते हैं कि खाड़ी देशों में सबसे ज़्यादा बासमती राइस एक्सपोर्ट होता है. लेकिन दूसरे देशों में 75 से 80 लाख टन नॉन बासमती राइस भी एक्सपोर्ट होता है. मतलब हर महीने का 6 से 6.5 लाख टन चावल देश से जाता है. दोनों तरह के चावल मिलाकर यह नंबर करीब 10 लाख टन का हो जाता है.
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