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चीन जाकर इतने परेशान हुए सुंदर पिचई कि बना डाला Google Translate!

चीन जाकर इतने परेशान हुए सुंदर पिचई कि बना डाला Google Translate!

गूगल में ही महीनेभर में लगभग 3 करोड़ 4 लाख बार (एवरेज) 'गूगल ट्रांसलेट' सर्च किया जाता है.

गूगल में ही महीनेभर में लगभग 3 करोड़ 4 लाख बार (एवरेज) 'गूगल ट्रांसलेट' सर्च किया जाता है.

जब-जब सुंदर पिचई को कोई परेशानी हुई है, तब-तब उन्होंने उस परेशानी को जड़ से खत्म करने की ठानी और एक बेहतरीन प्रॉडक्ट लेकर आए. गूगल ट्रांसलेट भी इसी तरह बना.

नई दिल्ली. गूगल के कई महत्वपूर्ण टूल्स में से एक है गूगल ट्रांसलेट (Google Translate). भारतीयों ये लिए टूल कितना अहम है, इस बात का पता इससे चलता है कि एक महीने के दौरान गूगल में ही लगभग 3 करोड़ 4 लाख बार (एवरेज) ‘गूगल ट्रांसलेट’ सर्च किया जाता है. पिछले 12 महीनों की अगर बात करें तो इसका ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है. पूरी दुनिया की 108 भाषाओं का अनुवाद चुटकी में करने की सहूलियत देने वाला ये टूल किसी और की नहीं, बल्कि गूगल के सीईओ सुंदर पिचई (Sundar Pichai) की देन है.

सुंदर पिचई को कैसे आया आइडिया

गूगल ने अपना ट्रांसलेशन अथवा अनुवाद करने वाला टूल अप्रैल 2006 में लॉन्च किया था. उससे पहले सुंदर पिचई बिजनेस के सिलसिले में चीन (China) गए थे. चीन में दिनभर उनकी मीटिंग्स होती थीं और उनके साथ एक अनुवादक (दुभाषिया) रहता था. उसका काम था चीनी भाषा को अंग्रेजी में बदलकर सुंदर पिचई को बताना और पिचई की बात को चीनी भाषा में चीनियों को समझाना. बता दें कि चीन में चीनी भाषा ही ज्यादा चलती है, न कि अंग्रेजी. वहां ऑफिस का काम भी अंग्रेजी में नहीं होता.

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जब तक ऑफिस में मीटिंग्स चलती थीं तो दुभाषिया सुंदर पिचई के साथ रहता था. मगर ऑफिस के बाद जब पिचई घूमने या फिर कुछ खाने के लिए अकेले बाहर निकलते तो उन्हें भाषा की बड़ी समस्या (Language Problem) आती. न कोई होटल का कर्मचारी, न कोई टैक्सी ड्राइवर और न ही कोई दुकानकार अंग्रेजी समझता था. सुंदर पिचई परेशान हो गए. और जब-जब सुंदर पिचई परेशान हुए हैं, तब-तब उन्होंने एक शानदार प्रॉडक्ट खोजा है. सुंदर पिचई को महसूस हुआ कि चीन आने वाला हर व्यक्ति उनकी तरह ही परेशान होता होगा. तो क्यों न एक ऐसा टूल बना दिया जाए, जो ये प्रॉब्लम खत्म कर दे. इस तरह एक ऑनलाइन डिक्शनरी या अनुवाद का विचार उनके मन में आया.

यूं की प्रॉडक्ट बनाने की शुरुआत

सुंदर पिचई (Sundar Pichai) अपने काम को लेकर शुरू से ही जुनूनी रहे हैं. उन्हें जब लगता है कि कोई काम करना है तो वे करके ही दम लेते हैं, जैसा कि उन्होंने अपनी पत्नी से झगड़ने के बाद गूगल मैप्स (Google Maps) बना डाला था. सुंदर पिचई को जैसे ही ट्रांसलेशन टूल का आइडिया आया, उन्होंने अमेरिका स्थित गूगल के हेडक्वार्टर्स में फोन किया और अपनी टीम के 25 सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को तुरंत चीन बुला लिया. वहीं से शुरुआत हुई इस टूल की. रणनीति बनाई गई और फिर टूल बनाया गया. 2006 में इसे लॉन्च किया गया. तब ये टूल सिर्फ दूसरी भाषाओं को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करता था, लेकिन अब ये 108 भाषाओं को एक-दूसरे से ट्रांसलेट कर सकता है. हालांकि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि अनुवाद शत-प्रतिशत सटीक नहीं होता. मगर लोगों द्वारा इसे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जाना इस बात का इशारा है कि 100 प्रतिशत ठीक न सही, मगर लोग काफी हद तक इससे संतुष्ट हैं.

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क्या-क्या कर सकता है गूगल ट्रांसलेट

1. आप इसमें 108 भाषाओं में से कोई भी भाषा में अनुवाद कर सकते हैं. भारत में अंग्रेजी से हिन्दी (Google Translate English to Hindi) अनुवाद में अधिक इस्तेमाल होता है.
2. ये टूल न सिर्फ एक शब्द या वाक्य, बल्कि पूरी की पूरी वेबसाइट को भी ट्रांसलेट किया जा सकता है.
3. ट्रांसलेट टूल में अब एक माइक (Mic) का बटन भी दिया गया है. मतलब आप अपनी भाषा में बोलकर भी किसी दूसरी भाषा का अनुवाद पा सकते हैं.
4. यदि आप अनुवाद को सुनना चाहते हैं तो उसकी भी सुविधा दी गई है. मतलब न टाइप करने का झंझट और न ही पढ़ने का.
5. आप पूरे के पूरे डॉक्यूमेंट्स भी अपलोड करके अनुवाद कर सकते हैं.
6. यदि आप दूसरी भाषा की कोई किताब पढ़ रहे हैं और किसी शब्द या वाक्य का अर्थ अपनी भाषा में समझना चाहते हैं तो गूगल ट्रांसलेट में फोटो खींचिए (Google Translate Camera) और अपनी भाषा में अर्थ पा लीजिए.
7. कोई साइन बोर्ड पढ़ने के लिए आप उसे स्कैन कर सकते हैं और उसका अर्थ अपनी भाषा में पा सकते हैं.
8. आपके पास कोई शब्द है और आप नहीं जानते कि वह किस भाषा है तो भी कोई परेशानी नहीं. गूगल ट्रांसलेट खुद पहचान सकता है कि वह शब्द किस भाषा का है.
9. शब्दों की डिफिनेशन और वाक्यों में उसका इस्तेमाल भी गूगल ट्रांसलेट की एक विशेषता है.
10. आप चाहें तो गूगल द्वारा ट्रांसलेट किया गया कोई गलत शब्द या वाक्य ठीक करके सब्मिट कर सकते हैं. गूगल की टीम उसे देख-परखकर अपडेट कर देती है.

Tags: Corporate Kahaniyan, Google apps, Sundar Pichai

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