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CAIT ने अमेजन पर लगाया बड़ा आरोप, बताया कैसे नियमों को तोड़ रही है कंपनी

छोटे रिटेल बाजारों पर पड़ा रहा बुरा असर
छोटे रिटेल बाजारों पर पड़ा रहा बुरा असर

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) व एफडीआई नीति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों का उल्लंघन का आरोप है. कंपनी पर आरोप है कि वह सरकार की अनुमति के बिना मल्टी ब्रांड रिटेल शुरू करने की साजिश कर रही है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 18, 2020, 2:21 PM IST
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नई दिल्ली. दुनिया की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन (Amazon) इन दिनों चर्चा में है. हाल ही में फ्यूचर ग्रुप (Future Group) और रिलायंस इंडस्ट्री (Reliance Industry) के सौदे पर अमेजन ने सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत (Singapore Arbitration Court) में इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी. गौरतलब है कि कंपनी पर कारोबारियों की प्रमुख संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) व एफडीआई नीति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नियमों का उल्लंघन का आरोप है. कंपनी पर आरोप है कि वह सरकार की अनुमति के बिना मल्टी ब्रांड रिटेल शुरू करने की साजिश कर रही है. पर्यवेक्षकों और बाजार सहभागियों का भी मानना है कि अमेजन ग्लोबल मार्किट में अपना कब्जा जमाने की फिराक में है.

अमेजन ने किया ये हेरफेर - बता दें कि एफडीआई पॉलिसी (2015) के अनुसार, पॉलिसी सौ फीसदी बिजनेस टू बिजनेस ई-कॉमर्स करने की अनुमति देती है न कि बिजनेस टू कस्टमर ई-कॉमर्स की. इसका मतलब है यह कि अमेजन और अन्य ई-कॉमर्स कंपनी सीधे तौर पर रिटेल कंज्यूमर को अपने प्रोडक्ट नहीं बेच सकते हैं, लेकिन अमेजन इंडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से मल्टी-ब्रांड रिटेल व्यापार करने का आरोप है. बता दें कि पिछले साल ही चीन ने अमेजन से किनारा किया है. अब चीन में अमेजन के व्यापार पर ताला लग गया है. वहीं, कंपनी अब भारत में अपना विस्तार करने में लगी हुई है.

अमेजन ने सरकार को नहीं दिया जवाब- भारत में अमेजन के 1.3 बिलियन से भी ज्यादा ग्राहक हैं जिसे कंपनी साल 2025 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर करने को कोशिश में जुटी है. वहीं, अमेजन का कहना है कि उसने भारत के एफडीआई पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है. कहा जा रहा है कि साल 2013 से जब से अमेजन ने भारत में कदम रखा है तब से मल्टी-ब्रांड रिटेलिंग में सरकारी प्रतिबंधों को दरकिनार किया है. इस मामले में कंपनी को 2 नवंबर को जवाब देने के लिए कहा था, लेकिन कंपनी की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. ऐसे में फिर से कंपनी को जवाब देने के लिए नोटिस भेजे जाने की तैयारी की जा रही है.



ई-कॉमर्स कंपनियां कर रही नियमों का उल्लंघन-भारत सरकार ने साल 2018 में विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के लापरवाही करने के चलते नियमों को सख्त किया था. इसमें सरकार ने कहा था कि अमेजन और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों का माल तैयार करने वाली कंपनियों (इन्वेंट्री) पर कोई नियंत्रण नहीं होगा. नए नियमों के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों को व्यापारियों को उनके प्लेटफॉर्म पर सीधेतौर पर सामान बेचने की भी मनाही की गई है, लेकिन अमेजन ने सरकार इन नियमों का फिर उल्लंघन किया. गौरतलब है कि इन विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों ने बड़ी छूट, आकर्षक ऑफर्स और खुद ही विक्रेताओं का चयन कर छोटे रिटेलर्स की कमाई पर बड़ा असर डाला है.

छोटे रिटेल बाजारों पर पड़ा रहा बुरा असर-वहीं, ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन जोकि खुद अमेजन और फ्लिपकार्ट पर अपना सामान बेचते है, ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर आरोप लगाया है किं इन्होंने बिजनेस नियमों का उल्लंघन कर भारत में बड़ा बिजनेस खड़ा किया है जिनसे देश के छोटे व्यापारियों को घाटा उठाना पड़ रहा है. CAIT के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि देखा जाए तो यह कंपनियां प्रेस नोट 2 में मौजूद नियमों की जमकर धज्जियां उड़ा रही हैं. यह आकर्षक छूट और ऑफर्स के साथ सीधे तौर पर इंवेंट्री कंपनियों के साथ मिली हुई हैं जिसके कारण भारत के छोटे रिटेल बाजारों की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है.
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