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होम लोन की बढ़ती ब्याज दर से कैसे बचें, कौन से तरीके रहेंगे फायदेमंद, एक्सपर्ट से समझिए

 माना जा रहा है कि इस साल नीतिगत ब्याज दरें बढ़ेंगी. ऐसा होने पर होम लोन महंगे हो जाएंगे.

माना जा रहा है कि इस साल नीतिगत ब्याज दरें बढ़ेंगी. ऐसा होने पर होम लोन महंगे हो जाएंगे.

रिजर्व बैंक ने 2020 से रेपो रेट 4 फीसदी पर स्थिर रखा है. अब तक एक बार भी इसमें बढ़ोतरी नहीं की गई है. यही वजह है कि पात्रता हो तो 6.40 फीसदी दर पर होम लोन मिल सकता है. दर्जनों बैंक और फाइनेंस कंपनियां 7 फीसदी से कम दर पर लोन दे रही हैं. माना जा रहा है कि इस साल नीतिगत ब्याज दरें बढ़ेंगी. ऐसा होने पर होम लोन महंगे हो जाएंगे. आइए एक्सपर्ट से समझते हैं कि इसका क्या असर होगा.

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नई दिल्ली . कोरोना काल से होम लोन की दरे ऐतिहासिक रूप से नीचले स्तर पर चल रही हैं. लेकिन सस्ते ब्याद दर पर लोन कब तक मिलेगा, ये कहना मुश्किल है. अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही ब्याज दरें बढ़ सकती हैं.

रिजर्व बैंक ने 2020 से रेपो रेट 4 फीसदी पर स्थिर रखा है. अब तक एक बार भी इसमें बढ़ोतरी नहीं की गई है. यही वजह है कि पात्रता हो तो 6.40 फीसदी दर पर होम लोन मिल सकता है. दर्जनों बैंक और फाइनेंस कंपनियां 7 फीसदी से कम दर पर लोन दे रही हैं. लेकिन महंगाई लगातार बढ़ रही है. ऐसे में लोन लंबे समय तक उतने सस्ते नहीं रहेंगे, जितने अभी हैं. माना जा रहा है कि इस साल नीतिगत ब्याज दरें बढ़ेंगी. ऐसा होने पर होम लोन महंगे हो जाएंगे. आइए एक्सपर्ट से समझते हैं कि इसका क्या असर होगा.

कितना महंगा होगा होम लोन?
मान लीजिए कि आपने 20 साल के लिए 6.50% ब्याज दर पर होम लोन लिया है. इस लोन के हर एक लाख रुपए के मूलधन पर आप करीब 79,000 रुपए का ब्याज चुकाएंगे. यदि लोन की ब्याज दर 0.25% बढ़ कर 6.75% हो जाती है, तो आपका ब्याज करीब 82,000 रुपए हो जाएगा. अगर रेट 7% हो गया तो ब्याज 86,000 रुपए हो जाएगा. मतलब साफ है, ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी ब्याज में हजारों रुपए का अंतर लाती है.

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1. बैलेंस ट्रांसफर 
होम लोन रिफाइनेंस यानी बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प तब अपनाया जाता है जब आपके लोन की दर और मार्केट रेट में बड़ा (0.25-0.50%) अंतर हो. मान लीजिए कि आपका रेट 7.50% है और बाजार में 7% पर लोन मिल रहा है. ऐसे में बैलेंस ट्रांसफर फायदेमंद हो सकता है. ऐसी स्थिति में यदि आपके लोन के 20 साल बाकी हों तो हर 1 लाख रुपए के लोन पर करीब 7,400 रुपए की बचत होगी. लेकिन बैलेंस ट्रांसफर तभी सही फैसला होगा, जब आधी से ज्यादा लोन अवधि बाकी हो. ट्रांसफर के खर्चे भी होते हैं, मसलन प्रोसेसिंग फीस और एमओडी चार्जेस.

2. ईएमआई बढ़ाएं
समय के साथ आपकी आय बढ़ेगी, लेकिन ईएमआई स्थिर रहेगी. पर आप स्वेच्छा से ईएमआई बढ़वा सकते हैं. अतिरिक्त ईएमआई लोन की मूलधन कम करेगी. इससे आपका लोन जल्द चुकेगा. लोन की अवधि कम होने लगेगी. यह तरीका छोटे-छोटे प्री-पेमेंट की तरह है. उदाहरण के लिए 7% ब्याज पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए के लोन की ईएमआई करीब 23,000 रुपए होगी. यदि आप दूसरे साल से इसे बढ़ाकर 26,000 रुपए कर देंगे तो 3 ईएमआई कम हो जाएगी. ब्याज भी 25.96 लाख रुपए से घटकर 25.10 लाख रुपए रह जाएगा.

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3. प्री-पेमेंट का भी विकल्प
ब्याज दर बढ़ने की सूरत में अगर आप ईएमआई बढ़ाना नहीं चाह रहे तो आपके पास तीसरा विकल्प है. आप साल में कम से कम एक बार प्री-पेमेंट कर सकते हैं और लोन का मूलधन घटा सकते हैं. ज्यादातर बैंक और फाइनेंस कंपनियां चाहेंगी कि आप ईएमआई की कम से कम 1-2 गुनी रकम का प्री-पेमेंट करें. उदाहरण के लिए यदि आपने 7% की दर पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए का होम लोन ले रखा है और शुरुआत में ही 50,000 रुपए का प्री-पेमेंट कर देते हैं तो 7 ईएमआई कम हो जाएंगी और ब्याज 25.96 लाख से घटकर 24.48 लाख रुपए रह जाएगा.

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