अब आपकी इन 4 बिजनेस में मदद करेगी मोदी सरकार, कर सकते हैं मोटी कमाई

मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा पशुपालन (Animal Husbandry), डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) और मत्स्य पालन (Fisheries Farming) योजनाओं के बारे में जानकारी तो उपलब्ध करवाई ही जा रही है साथ में लोन (LOAN) लेने के प्रोसेस के बारे में भी बताया जा रहा है. खासकर मछली पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार विशेष तौर पर काम कर रही है.

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 5:27 PM IST
अब आपकी इन 4 बिजनेस में मदद करेगी मोदी सरकार, कर सकते हैं मोटी कमाई
अब आपकी इस बिजनेस में मदद करेगी मोदी सरकार, जानिए इससे जुड़ी सभी बातें
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 5:27 PM IST
अगर आप पशुपालन (Animal Husbandry), मुर्गी पालन (Poultry), मत्स्य पालन और बकरी पालन (Fisheries and Goat Farming) करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए सबसे उपयुक्त समय (Right Time) है. मोदी सरकार (Modi government)  डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) में व्यवसाय तलाश (Discovery of business) रहे लोगों के लिए शानदार मौका लेकर आई है. अगर आप इन व्यवसायों से जुड़ने की इच्छा रखते हैं और आर्थिक तौर पर सक्षम नहीं हैं तो भी निराश न हों. मोदी सरकार लोन दिलाने से लेकर आपको उचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगी. भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय ने कुछ ऐसी स्कीम की शुरुआत की है, जो आर्थिक तौर पर पिछड़े और बेरोजगार लोगों के लिए काफी फायदे का सौदा साबित होने वाली है.

मछली पालन उद्योग के लिए भारत क्यों उपयुक्त है
भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बारे में कई स्तर से जानकारी उपलब्ध करवा रहा है. चारा, मवेशी प्रजनन संबंधी राष्ट्रीय परियोजना, पशुधन स्वास्थ्य आदि के बारे में भी जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है. खासकर मछली पालन को लेकर सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है. ऐसे में बेरोजगार युवकों या किसानों के लिए अपनी आय बढ़ाने के लिए इससे बढ़िया मौका नहीं मिल सकता है. आज के दौर में भारत में मछली पालन का व्यापार करना काफी लाभदायक साबित होने वाला है. भारत की 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी मछली खाना पसंद करती है.

फिश फार्मिंग का कारोबार मोदी सरकार के आने के बाद काफी फला-फूला है.


फिश फार्मिंग का कारोबार मोदी सरकार के आने के बाद काफी फला-फूला है. जानकार मानते हैं कि फिश फार्मिंग के लिए हमारा देश काफी उपयुक्त है. हमारे देश में समुद्र, झील, नदियां, तालाब और पोखरों की कमी नहीं है. जमीन भी इतनी है कि आप इस व्यवसाय के लिए टैंक और तालाब बना सकते हैं. मौजूदा दौर में तकनीक के सहारे भी आप इस व्यापार को बढ़ा सकते हैं. तेजी से बदलती तकनीक के सामने अब मछली पकड़ने की पुरानी तकनीक खत्म होती जा रही हैं. अब लोगों ने कृत्रिमरूप से तालाब और टैंक बना कर मछली का व्यवसाय शुरू कर दिया है.

मछुआरों के अलावा दूसरे लोग भी अब इस व्यवसाय में
बता दें कि वह समय अब चला गया जब मछली पालन उद्योग मछुआरों तक ही सीमित था. मोदी सरकार आने के बाद आज यह सफल और प्रतिष्ठित लघु उद्योग के तौर स्थापित होना शुरू हो गया है. मछली उद्योग में नई-नई टेक्नोलॉजी ने इसमें क्रांति ला दी है. मत्स्य पालन रोजगार के अवसर तो पैदा करता ही है, खाद्य पूर्ति में वृद्धि के साथ-साथ विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. आज भारत मत्स्य उत्पादक देश के रूप में उभर रहा है.
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पशुपालन, डेयरी और मत्स्य मंत्रालय अब इस उद्योग के लिए दस लाख रुपये तक का ऋण मुहैया करवाना शुरू कर दिया है


भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य मंत्रालय ने अब इस उद्योग के लिए दस लाख रुपये तक का ऋण मुहैया करवाना शुरू कर दिया है. मंत्रालय की कोशिश है कि यह धनराशि आसान किश्‍तों में और कम ब्याज दरों पर लोगों को उपलब्ध कराई जाए. केंद्र सरकार की लोन व्यवस्था की तमाम जानकारी राज्य सरकार के तमाम लघु उद्योग कार्यालयों में भी उपलब्ध है.

2030 तक मछली की खपत चार गुना
फूड एंड एग्रीकल्‍चर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है कि साल 2030 में भारत में मछली की खपत मौजूदा खपत से चार गुना ज्यादा बढ़ जाएगी. इसी को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें देश में मछली पालन का उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक से बढ़कर एक योजना ला रही हैं. मोदी सरकार राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर एक स्‍कीम चला रही है, जिसके तहत मछली पालन का बिजनेस करने वालों को सरकार लगभग 75 फीसदी फाइनेंशियल सपोर्ट करती है.

मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर काम कर रही है


दरअसल, मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर काम कर रही है. भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्य मंत्री गिरिराज सिंह का दावा है कि काफी कम जगह और कम पानी में भी मछली पालन की आधुनिक तकनीक अपनाने पर अच्छी खासी इनकम हो सकती है. रिसर्कुलर एक्वाकल्चर सिस्टम' (आरएएस) तकनीक से आप अगर यह व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो आपको केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों तरफ से लोन मिलेगा. अगर आप आरएएस तकनीक के अनुसार मछली पालन करना चाहते हैं तो आपको सिर्फ 5 लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ेगा. इस राशि से आप लगभग 20 हजार किलोग्राम वजन की मछलियां पाल सकते हैं.'

प्रोजेक्‍ट की लागत 20 लाख रुपये तक आएगी
नेशनल फिशरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा तैयार की गई प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के मुताबिक, आप अगर 20 हजार किग्रा क्षमता वाले टैंक या पोंड बनाते हैं तो आपके प्रोजेक्‍ट की लागत 20 लाख रुपये तक आएगी. इसमें कैपिटल कॉस्‍ट 9 लाख 70 हजार रुपये और ऑपरेशनल कॉस्‍ट 10 लाख 36 हजार रुपये होगी. लेकिन आपको सिर्फ 4-5 लाख रुपये का ही इंतजाम करना होगा. केंद्र सरकार आपको तकरीबन 8 लाख रुपये और राज्य सरकार तकरीबन 4 लाख रुपये सब्सिडी के तौर देगी. इसके अलावा सरकार 4 से 5 लाख रुपये बैंक लोन भी दिलाएगी.

भारत सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि साल 2020 तक देश में मछली उत्पादन में कम से कम 50 लाख टन की बढ़ोतरी होनी चाहिए


कुल मिलाकर भारत सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि साल 2020 तक देश में मछली उत्पादन में कम से कम 50 लाख टन की बढ़ोतरी होनी चाहिए. इसके लिए सरकार न केवल तकनीक पर जोर दे रही बल्कि विभिन्न क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाया भी जा रहा है.

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First published: August 20, 2019, 4:28 PM IST
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