क्या कोरोना संकट के बीच 2022 तक दोगुनी हो पाएगी किसानों की आय?

क्या कोरोना संकट के बीच 2022 तक दोगुनी हो पाएगी किसानों की आय?
क्या किसानों को मिल रहा है उनकी फसल का सही दाम?

एग्रीकल्चर सेक्टर के हालात और किसानों की आय पर कुछ सवाल और डबलिंग फार्मर्स इनकम (DFI) कमेटी के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवई के जवाब

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नई दिल्ली. कोविड-19 लॉकडाउन (lockdown) संकट की वजह से कृषि क्षेत्र पर भी बुरा असर पड़ा है. कहीं खेतों में सब्जियां सड़ गईं तो कहीं उन्हें उचित दाम नहीं मिला. ऊपर से आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रही सही कसर पूरी कर दी. अब पाकिस्तानी टिड्डियों ने किसानों की नींद हराम कर दी है. ऐसे माहौल में क्या मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय (farmers income) दोगुनी करने का अपना लक्ष्य पूरा कर पाएगी. संसद सत्र के दौरान कई सांसद यह सवाल पूछते हैं कि अब तक आय बढ़ी कितनी है. इसलिए इनकम का यह सवाल जितना बड़ा किसानों के लिए है उतना ही राजनेताओं के लिए भी.

पीएम नरेंद्र मोदी की ड्रीम योजनाओं में किसानों की आय दोगुनी करना भी है. वह अक्सर इसका जिक्र करते हैं. किसानों से जुड़े इस अहम काम को पूरा करने की जिम्मेदारी डॉ. अशोक दलवाई पर है. वह डबलिंग फार्मर्स इनकम (DFI) कमेटी के अध्यक्ष हैं. कमेटी अप्रैल 2016 में बनाई गई थी, जिसने सितंबर 2018 में सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी.

सरकार इसलिए हासिल कर लेगी लक्ष्य



डॉ. दलवई ने न्यूज18 से बातचीत में कहा कि कोविड के बहाने कृषि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का एलान हुआ है. कृषि से जुड़े कुछ नीतिगत सुधार भी हुए हैं. इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी. हम 2022 तक यह लक्ष्य पा लेंगे.



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डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवई


पीएम किसान स्कीम बड़ी मददगार

आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने सभी किसानों को सीधे उनके बैंक अकाउंट में खेती-किसानी के लिए पैसा डालने का प्लान बनाया और उसे पूरा किया. करीब 10 करोड़ किसानों के बैंक अकाउंट में सीधे पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi scheme) के तहत पैसा भेजा जा रहा है. करीब 75 हजार करोड़ रुपये किसानों को मिल चुके हैं. किसान उत्पादक संगठन (FPO- Farmer Producer Organisation) की संख्या बढ़ाने पर सरकार का जोर है. यह सब फैसले किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे.

नीतिगत फैसले भी आय बढ़ाएंगे

डॉ. दलवई के मुताबिक एसेंशियल कमोडिटी एक्ट और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) एक्ट में संशोधन से किसानों के पास अपने उत्पाद बेचने के कई विकल्प होंगे. उन्हें जहां ज्यादा फायदा मिलेगा वहां अपनी उपज बेचेंगे. प्राइवेट मंडी का रास्ता भी खोल दिया गया है. इसलिए इस सेक्टर में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा. एपीएमसी के बाहर कारोबार ट्रेड एक्ट के जरिए होगा. जिसे बनाने का सरकार का प्लान है.

स्पर्धा बढ़ेगी तो किसान को लाभ होगा

हमने मॉडल एपीएमसी एक्ट-2017 बनाकर राज्यों को भेज दिया है. कई राज्यों ने इसे लागू कर लिया है. कुछ ने नहीं किया है. हम उनसे भी कह रहे हैं कि किसानों के हित में इसे लागू किया जाए, क्योंकि कृषि स्टेट सब्जेक्ट है. सरकार ने जो नीतिगत सुधार के ऐलान किए हैं उससे अब किसानों की उपज खरीदने के लिए स्पर्धा होगी. यह स्पर्धा सिर्फ मार्केट कमेटी और राज्यों के बीच ही नहीं बल्कि इसके बाहर निजी और सरकारी क्षेत्र के बीच भी होगी. इससे उनकी आय बढ़ेगी.

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पहली बार मोदी सरकार ने दी किसानों के खाते में नगद सहायता


एपीएमसी पर भ्रम दूर करने की जरूरत

डॉ. दलवई ने कहा, कुछ लोगों का कहना है कि एपीएमसी खत्म किया जा रहा है. तो मैं स्पष्ट कर दूं कि एपीएमसी खत्म नहीं किया जा रहा, बल्कि किसान हित के लिए उसमें संशोधन किया जा रहा है. किसानों को मार्केट और वेयरहाउस मिले, उचित मूल्य मिले, प्रोडक्टिविटी बढ़े और उत्पादन लागत कम हो, इसके लिए सरकार काम कर रही है. इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी इनकम डबल हो सकती है.

इन फैसलों से भी आय बढ़ने की उम्मीद है

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जब से किसानों को नगद सहायता दी जा रही है तब से उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है. वरना केंद्र या राज्य सरकारों का भेजा पैसा फाइलों के जरिए नेताओं और अधिकारियों के घर पहुंच जाता था. आईए, जानते हैं कि किसानों को कहां-कहां डायरेक्ट लाभ मिल रहा है.

>>सभी प्रदेशों के किसानों को मोदी सरकार की ओर से सालाना 6000 रुपये की नगद मदद. पिछले 17 महीने में करीब 75 हजार करोड़ रुपये की नगद सहायता किसानों को मिल चुकी है.

>>तेलंगाना में 8000 रुपये सालाना मिल रहे हैं. दो सीजन में 4000-4000 रुपये. किसानों को नगद पैसे देने की शुरुआत तेलंगाना ने ही की.

>>आंध्र में 10 हजार रुपये सालाना मिल रहे हैं. 6000 रुपये केंद्र सरकार के और 4000 रुपये राज्य की ओर से.

>>ओडिशा में खरीफ और रबी के सीजन में बुआई के लिए आर्थिक मदद के तौर पर प्रति परिवार को 5-5 हजार रुपये यानी सालाना 10,000 रुपये दिए जा रहे हैं.

>>झारखंड में किसानों को 25 हजार रुपए सालाना की मदद, जबकि हरियाणा में किसानों को सालाना 6000 रुपये पेंशन दी जा रही है.

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किसानों की आय बढ़ाने का क्या है मंत्र


छत्तीसगढ़ की न्याय योजना

- छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को नगद सहायता देने के लिए ‘किसान न्याय योजना’ शुरू की है. इसके तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5700 करोड़ रुपए की राशि चार किश्तों में सीधे उनके खाते में भेजी जाएगी.  अधिकतम 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से सहायता मिलेगी.

इस तरह हो रही है आय बढ़ाने की कोशिश

(1) राज्य सरकारों के जरिए मंडी सुधार.

(2) मॉडल कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना.

(3) किसानों को इलेक्ट्रॉनिक ऑनलाइन व्यापार मंच उपलब्ध कराने के लिए ई-नाम की शुरुआत.

(4) स्वायल हेल्थ कार्ड योजना, ताकि खाद का जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल हो.

(5) परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा.

(6) हर मेड़ पर पेड़ अभियान यानी कृषि वानिकी को बढ़ावा.

(7) अगले पांच साल में 10 हजार एफपीओ-किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना का लक्ष्य

(8) बास को पेड़ की श्रेणी से हटाकर उसकी खेती को प्रोत्साहन.

(9) 100 फीसदी नीम कोटेड यूरिया से जमीन की सेहत सुधारने का अभियान

(10) न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को उत्पादन लागत से 150 फीसदी तक बढ़ाने की मंजूरी.

(11) किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत खेती-किसानी के लिए सालाना 6000 रुपये की सहायता.

(12) किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज बढ़ाने का अभियान.

(13) किसान क्रेडिट कार्ड लेने पर फसल बीमा करवाने की अनिवार्यता खत्म

(14) पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम से किसान क्रेडिट कार्ड जुड़ा

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कई राज्य सरकारें भी दे रही हैं किसानों को नगद सहायता


फिलहाल कितनी हो गई है किसानों की आय

-केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का दावा है कि वर्तमान में किसानों की औसत मासिक इनकम (Farmer's Average Income) 8,167 रुपये (2016-17) हो गई है. जबकि सरकार अब तक 2013-14 में आई एनएसएसओ की रिपोर्ट के आधार पर किसानों की मासिक आय 6,426 रुपये ही बताती आई थी.

-नाबार्ड के इंडिया रूरल फाइनेंशियल इनक्लूजन सर्वे (NAFIS) के मुताबिक साल 2016-17 में भारत के गांव में रह रहे एक किसान परिवार की मासिक आय 8,931 रुपए हो गई है.

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First published: May 28, 2020, 7:38 PM IST
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