बैंक में लॉकर खुलवाने का है प्लान तो जान लें RBI के ये नियम, बैंक मैनेजर्स भी नहीं कर पाएंगे मना

कुछ बैंक नियमों का हवाला देते हुए ग्राहक के सामने तरह-तरह की डिमांड रखते हैं, कुछ सर्विस उन्‍हें देते ही नहीं हैं. दूसरी ओर नियमों की जानकारी नहीं होने के चलते कई बार ग्राहक भी बैंकों को सही होने के बावजूद गलत मान लेते हैं. ऐसे में परेशानी कस्‍टमर्स को ही होती है. आइए जानें इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें

News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 6:10 AM IST
बैंक में लॉकर खुलवाने का है प्लान तो जान लें RBI के ये नियम, बैंक मैनेजर्स भी नहीं कर पाएंगे मना
बैंक में लॉकर खुलवाने का है प्लान तो जान लें RBI के ये नियम, बैंक मैनेजर्स भी नहीं कर पाएंगे मना
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Updated: July 13, 2019, 6:10 AM IST
अक्सर कई लोग अपनी कीमती चीजों को सेफ करने के लिए बैंक में लॉकर खुलवाते हैं, लेकिन लॉकर खुलवाना आसान नहीं होता. रवि गुप्ता दिल्ली के पांडव नगर इलाके में रहते हैं. कुछ दिन पहले वह लॉकर खुलवाने के लिए बैंक गए, लेकिन मैनेजर ने उन्हें कई नियमों का हवाला देते हुए तरह-तरह की डिमांड रखी. अगर आप भी बैंक में लॉकर खुलवाना चाहते है तो आरबीआई के तय गए नियमों को जान लीजिए. RBI ने नोटिफिकेशन जारी कर लॉकर्स को नियम तय किए हैं.

(1) सवाल- बैंक में लॉकर खोलने के नियम क्या है?


जवाब-आरबीआई नोटिफिकेशन के मुताबिक कोई भी किसी भी बैंक में बगैर खाते के भी लॉकर खोल सकता है. लेकिन लॉकर के किराए और चार्जेस के सिक्‍योरिटी डिपॉजिट का हवाला देते हुए बैंक बिना खाता लॉकर खोलने में आना-कानी करते हैं. यहीं नहीं कुछ बैंक आप पर बड़ी रकम के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए भी दबाव बनाते हैं. इसलिए अच्छा होगा कि आप उसी बैंक में लॉकर लें, जहां सेविंग्‍स अकाउंट है.

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(2) सवाल- क्या लॉकर के लिए फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट करवाना जरूरी है?
जवाब- बैंक अधिकारी अक्सर कहते हैं कि लॉकर खुलवाने के लिए आपको एफडी करानी होगी. लेकिन आरबीआई नियमों के मुताबिक, बैंक लॉकर के 3 साल के किराए और किसी कारणवश लॉकर तुड़वाने पर चार्ज वहन करने के अमाउंट जितनी FD खुलवाने के लिए कह सकते हैं. हालांकि बैंक किसी भी मौजूदा लॉकर धारक को FD खुलवाने के लिए नहीं कह सकते हैं.

बैंक लॉकर खुलवाने से जुड़े नियम जान लीजिए

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(3) सवाल- बैंक लॉकर खुलवाने के लिए कितना चार्ज और किराया देना होता है?
जवाब- बैंकों में लॉकर के लिए सालाना किराया तय है. किराया अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग है. इसके अलावा अगर किसी कारण से इमरजेंसी में लॉकर तोड़ना पड़े तो कस्‍टमर को उसका चार्ज भी वहन करना होता है. वहीं लॉकर की चाबी खोने पर भी चार्ज देना होता है. यह फीस साल में एक बार लगती है. फीस की रकम लॉकर की साइज पर निर्भर करती है. बड़े लॉकर पर ज्यादा फीस लगती है. सरकारी बैंक एक लॉकर के लिए सालाना 1,000 से 7,000 रुपये के बीच फीस लेते हैं. निजी बैंक 3,000 रुपये से 20,000 रुपये के बीच फीस लेते हैं. फीस की रकम इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप जिस शाखा में लॉकर लेना चाहते हैं, वह कहां स्थित है.

(4) सवाल- लॉकर की वेटिंग लिस्‍ट से मतलब?
जवाब- लॉकर की संख्या सीमित होने के चलते बैंक आसानी से लॉकर नहीं देते. कई बैंकों में तो काफी लंबा वेटिंग पीरियड होता है. RBI नियमों में वेटिंग लिस्‍ट का बनाने का और लॉकर अलॉटमेंट में पार‍दर्शिता रखने का प्रावधान है. बैंकों को यह भी निर्देश है कि वह लॉकर अलॉटमेंट के वक्‍त कस्‍टमर को लॉकर के ऑपरेशन्‍स को लेकर हुए एग्रीमेंट की कॉपी मुहैया कराएं.



(5) सवाल- लॉकर को इस्तेमाल करने का तरीका क्या है?
जवाब- हर लॉकर की दो चाबी होती है. एक चाबी ग्राहक के पास होती है. दूसरी चाबी बैंक के पास होती है. दोनों चाबियां लगने के बाद ही लॉकर खुलता है. इसका मतलब यह है कि ग्राहक जब भी लॉकर ऑपरेट करना चाहेगा, उसे इसकी जानकारी ब्रांच (बैंक) को देनी होगी. एक साथ दो चाबियों के इस्तेमाल के पीछे सुरक्षा सबसे बड़ी वजह है. अगर आपके लॉकर की चाबी किसी दूसरे के हाथ लग जाए तो वह इसे नहीं खोल पाएगा. साल में आप कितनी बार लॉकर आपरेट करेंगे, इसकी भी सीमा तय है. यह सीमा बैंक के हिसाब से अलग-अलग है. ज्वाइंट नाम से लॉकर खोलना फायदेमंद है. इससे जिन दो लोगों के नाम से लॉकर खुला है, उनमें से कोई एक इसे ऑपरेट कर सकता है.

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(6) सवाल- लॉकर में रखी चीजों के नुकसान पर कितना मुआवजा ?
जवाब- लॉकर में रखी चीजों के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं है. भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा, आतंकी हमला या चोरी होने पर बैंक आसानी से मुआवजा देने से इनकार कर देते हैं. उनकी दलील यह होती है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि लॉकर में क्या-क्या रखा गया है. इसलिए लॉकर में रखी आपकी कीमती चीजें भी 100 फीसदी सुरक्षित नहीं हैं.
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