MF में कर रहे निवेश तो इस तरह पाएं टैक्स में छूट, समझिए पूरी कैलकुलेशन

Mutual Fund में आप दो तरीके से टैक्स बचा सकते हैं
Mutual Fund में आप दो तरीके से टैक्स बचा सकते हैं

इस समय अगर आप भी टैक्स बचाना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. Mutual Fund में आप दो तरीके से टैक्स बचा सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 1:50 PM IST
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नई दिल्ली: आजकल टैक्स बचाने के लिए निवेशक म्यूचुअल फंड को काफी पसंद कर रहे हैं. इस समय अगर आप भी टैक्स बचाना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. Mutual Fund में आप दो तरीके से टैक्स बचा सकते हैं. इसमें पहला ऑप्शन इक्विटी लिंक सेविंग्स स्कीम (ELSS) का होता हैं वहीं दूसरा ऑप्शन इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड का होता है. इन दोनों ही ऑप्शन के जरिए आप टैक्स सेंविग कर सकते हैं. आइए आपको इन दोनों स्कीम के बारे में डिटेल में बताते हैं-

इक्विटी लिंक बचत योजना म्यूचुअल फंड (ELSS)
ELSS में किए गए 1.5 लाख रुपए तक के निवेश को टैक्स छूट का फायदा मिलता है. इस प्रकार के फंड में 3 साल की छोटी अवधि के लिए लॉकइन पीरियड होता है. कैनरा रॉबेको म्यूचुअलफंड के सेल्स एंड मार्केटिंग हेड मोहित भाटिया के मुताबिक, एक इक्विटी-लिंक्ड प्रोडक्ट होने के नाते ELSS में लंबी अवधि में निवेश करना अच्छा रहता है. पोर्टफोलियो के नियमित प्रकटीकरण, योजना खर्च अनुपात, दैनिक NAVs के प्रकाशन आदि के कारण ये योजनाएं अपने समकक्षों की तुलना में अधिक पारदर्शी हैं.

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SIP में मिलती है 500 रुपए की छूट


ELSS MF योजनाओं के साथ निवेशकों को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने 500 रुपए के रूप में कम इन्वेस्ट करने का विकल्प मिलता है, जिससे निवेशकों की जेब पर भी कम दबाव पड़ता है.

इक्विटी/डेब्ट म्यूचुअल फंड
इन्वेस्टमेंट के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की भी टैक्स बचत में सहायता करता है. यदि एक व्यक्ति एक साल से अधिक के लिए निवेश करता है और एक वर्ष से कम के लिए निवेश किया जाता है तो यह 15 फीसदी तक कम हो जाता है.

उदाहरण से समझिए MF में टैक्स सेविंग्स का गणित-
इसके अलावा पैसिव इनकम कोच अर्पित अरोड़ा ने इसे एक उदाहरण के साथ बताते हैं कि एक स्थिति बनाते हैं कि किसी ने अपने दोस्त को 12 फीसदी ब्याज पर पैसे दिए. वही राशि उसने इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी डाली. एक साल बाद इक्विटी म्यूचुअल फंड पर उसका दस फीसदी टैक्स कटेगा जिसमें से 9 फीसदी वापस होगा लेकिन दोस्त से मिली 12 फीसदी आय पर उसे पूरा टैक्स देना होगा. अरोड़ा यह भी बताते हैं कि अगर इक्विटी म्यूचुअलफंड में किसी ने 3 लाख रुपए डाले हैं, तो उन्हें 2 लाख रुपए के दस फीसदी पर ही टैक्स देना होता है, एक लाख रुपए पर टैक्स देने की जरूरत नहीं होती. इस तरह पूरा टैक्सेशन दस फीसदी से कम है.

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डेब्ट फंड के लिए टैक्सेशन
डेब्ट फंड से प्राप्त किसी भी आय को तीन वर्ष के लिए रखने को डायरेक्ट इनकम में गिना जाता है. यही स्थिति किसी दोस्त के पास राशि रखने पर होती है. अगर इन्वेस्टमेंट तीन साल से ज्यादा होता है, तो टैक्सेशन 20 फीसदी होगा. यह टैक्स औसतन पांच से दस फीसदी कम होता है. अर्पित अरोड़ा मानते हैं कि अगर तीन साल के लिए डेब्ट म्यूचुअलफंड में राशि रखते हैं, तो टैक्स साइज 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होगी.
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