बच्‍चों के लिए जरूरी है 'पैसेे का मोल' समझना, इस तरह दें ट्रेनिंग

News18Hindi
Updated: November 14, 2017, 4:13 PM IST
बच्‍चों के लिए जरूरी है 'पैसेे का मोल' समझना, इस तरह दें ट्रेनिंग
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Updated: November 14, 2017, 4:13 PM IST
बाल दिवस के अवसर पर अमेरिकी कॉलमनिस्‍ट बॉब टालबर्ट का यह कथन उल्‍लेखनीय है कि ‘बच्‍चों को काउंटिंग सिखाना अच्‍छा है, लेकिन अगर उन्‍हें यह बताया जाए कि उनके लिए क्‍या चीज अधिक काउंट करती हैं, तो यह उनके लिए सर्वश्रेष्‍ठ साबित हो सकता है’.

हालांकि माता-पिता और शिक्षक अक्‍सर इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं. इसके बदले वे बच्‍चों को गणित समेत अन्‍य विषय, कलाएं और खेल सिखाने पर अधिक फोकस करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि हममें से कितने लोग इस बात को याद रखते हैं कि जब बच्‍चे वास्‍तविक दुनिया में प्रवेश करते हैं तो पहली चीज जिससे उनका सामना होता है, वह है- मनी.

इसके बावजूद हम शायद ही अपने बच्‍चों को फाइनेंशियल पाठ देते हैं. हम उन्‍हें पॉकेट मनी तो देते हैं, लेकिन हम यह महसूस नहीं करते कि इससे हम उन्‍हें पैसे के मूल्‍य और प्रबंधन के बारे में नहीं बता रहे होते हैं. कुछ स्‍कूलों में इकोनॉमिक्‍स या बेसिक फाइनेंस कोर्सेज पठाए तो जाते हैं, लेकिन वहां भी बच्‍चों को वित्‍तीय रूप से साक्षर बनाने की कोशिश नहीं की जाती है.

क्‍या होता है फाइनेंशियल लिटरेसी

फाइनेंशियल लिटरेसी का मतलब इनकम, खर्च, बचत, बजट, एसेट्स, लायबिलिटी, रिस्‍क मैनेजमेंट, इंश्‍योरेंस, निवेश, टैक्‍स आदि के बारे में बताना होता है. बच्‍चों को यह भी बताना चाहिए कि किस तरह वे शारीरिक अयोग्‍यता की स्थिति का सामना करेंगे, नए बिजनेस शुरू करेंगे, अगली पीढ़ी को सम्‍पत्ति ट्रांसफर करेंगे, आदि.

घरों में पैसे से जुड़ा पाठ
अधिकांश माता-पिता पिग्‍गी बैंक और बचत करने की सीख तो देते हैं, लेकिन अक्‍सर मनी, पारिवारिक सम्‍पत्ति आदि की चर्चा उनसे नहीं करते हैं. सेक्‍स की तरह पैरेंट्स मनी की चर्चा बच्‍चों से करने में हिचकिचाते हैं.

जबकि बच्‍चों को छोटी उम्र से ही मनी से जुड़े मामले बताने चाहिए, क्‍योंकि जैसे-जैसे बच्‍चे बड़े होते जाते हैं, उनकी आदतें पक्‍की होती जाती हैं. इसके अलावा उन पर मित्रों और बाहरी दबाव भी बढ़ने लगता है. खासकर छठी कक्षा के बाद बच्‍चे बाहरी दबाव में आने लगते हैं. फिर वे गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े आदि की मांग करने लगते हैं. अगर आप कम उम्र में उनमें अच्‍छी आदतें विकसित नहीं कराते हैं तो बाद में उनके लिए सीखने की संभावना कम हो जाती है.

5-12 साल के बीच जरूरी है मनी मैटर्स बताना
5 से 12 साल के बीच के बच्‍चों को मनी से जुड़े मामले बताए जाने चाहिए. हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि 12 साल के बाद उन्‍हें नहीं बताना चाहिए.

बच्‍चों को ये बताएं
पैसे की वैल्‍यू के बारे में
पैसे से जुड़े लक्ष्‍य और प्राथमिकताओं के बारे में
समझदारी से किसी चीज का चयन और खरीदारी
तुरंत किसी चीज की जिद नहीं करने और उसे टालने
कठिन मेहनत का महत्‍व

फाइनेंस से जुड़ी बातें बच्‍चों को घर ही नहीं, एटीएम या बैंक से पैसे निकालने से लेकर जहां कहीं आपको लगे बच्‍चों के लिए सीखना आसान हो सकता है, उन्‍हें आप बता सकते हैं.
First published: November 14, 2017
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