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SIM Card Fraud: अपराधियों के हाथ पहुंच रहा आपके नाम का सिम कार्ड, बचने के लिए क्‍या है TRAI की गाइडलाइन?

दूसरे के नाम पर सिम लेकर अपराधी बड़े क्राइम को अंजाम दे रहे हैं.

दूसरे के नाम पर सिम लेकर अपराधी बड़े क्राइम को अंजाम दे रहे हैं.

मोबाइल चलाना जितना आसान काम है, इसे सुरक्षित रखना उतना ही मुश्किल. साइबर अपराधियों की बढ़ती संख्‍या और फर्जीवाड़े के नए-नए चलन से सिम को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी हो गया है. आपके नाम पर सिम लेकर ठग उसे अपराधियों के हाथ में पहुंचा रहे हैं. इससे बचने के लिए आपको क्‍या उपाय करना चाहिए.

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हाइलाइट्स

लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देते हैं और उनसे आधार पर सिम खरीद रहे अपराधी.
दुकानदार आपके आधार पर दो तीन और सिम एक्टिवेट करके उसे अपराधियों को बेच देता है.
TRAI के नियमानुसार, एक व्‍यक्ति के आधार पर अधिकतम 9 सिम ही जारी की जा सकती है.

नई दिल्‍ली. मोबाइल ने आम आदमी की जिंदगी को जितनी सहूलियत दी है, उतनी ही जोखिम की आशंका भी बढ़ा दी है. सोचिए, क्‍या हो अगर आपके नाम की सिम की कुख्‍यात अपराधी के हाथ लग जाए और उसका इस्‍तेमाल गंभीर अपराधों में किया जाने लगे.

यह सिर्फ कयास ही नहीं हकीकत भी है. झारखंड पुलिस ने ऐसे ही मामले भंडाफोड़ किया है, जहां भोले-भाले ग्रामीणों के नाम पर सिम कार्ड इश्‍यू कराकर उसे अपराधियों के हाथ पहुंचाया जा रहा है. दरअसल, पुलिस से बचने और क्राइम करने के लिए अपराधी अक्‍सर फर्जी सिम का सहारा लेते हैं. लेकिन, आपने सोचा है कि यह फर्जी सिम दरअसल होती किसकी है. इसे किसी अन्‍य व्‍यक्ति के नाम पर जारी करा के अपराधियों तक पहुंचाया जाता है.

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कैसे होता है फर्जीवाड़ा
झारखंड पुलिस के अनुसार, मोबाइल सिम को लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले लोग गांवों में जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देते हैं और उनसे आधार की डिटेल लेकर सिम खरीद लेते हैं. फिर इस सिम को पैसे लेकर अपराधारियों को बेच दिया जाता है. दूसरा तरीका ये है कि जब आप दुकान या स्‍टोर पर सिम खरीदने जाते हैं तो दुकानदार आपके आधार पर एक सिम एक्टिवेट करके आपको दे देता है, जबकि दो तीन और सिम एक्टिवेट करके अपराधियों या धोखाधड़ी करने वालों को बेच देता है.

सिम खरीदते समय क्‍या सावधानी बरतें
-दुकानदार या स्‍टोर संचालक को नए सिम के लिए जो भी डॉक्‍यूमेंट दें, उसके नीचे उद्देश्‍य लिखकर साइन कर दें. मसलन, वह डॉक्‍यूमेंट सिम खरीदने में इस्‍तेमाल हो रहा, ऐसा लिखकर अपना साइन बना दें. इससे डॉक्‍यूमेंट का दूसरा इस्‍तेमाल नहीं हो सकेगा.
-सिम कार्ड को हमेशा पैकेट बंद ही खरीदें और पहले से एक्टिवेट सिम को खरीदने से बचें. अपने सिम का कस्‍टमर केयर से वेरिफिकेशन जरूर कराएं.
-डॉक्‍यूमेंट में लगी फोटो पर क्रॉस करते अपना साइन जरूर बनाएं, ताकि उसका दूसरा कोई इस्‍तेमाल न कर सके.

क्‍या कहता है ट्राई का नियम
-भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नियमानुसार, एक व्‍यक्ति के आधार पर अधिकतम 9 सिम ही जारी की जा सकती है.
-बिना वेरिफिकेशन कराए जारी किए गए सिम को तत्‍काल बंद कर दिया जाएगा.
-एक आधार पर 9 सिम से ज्‍यादा जारी होते हैं तो 30 दिन में आउटगोइंग और 45 दिन में इनकमिंग कॉल बंद हो जाएगी, जबकि 60 दिन में सिम पूरी तरह डिएक्टिवेट हो जाएगा.

ऐसे चेक करें आपके नाम पर हैं कितने सिम
-सबसे पहले डॉट की ऑफिशियल साइट tafcop.dgtelecom.gov.in पर जाएं.
-होम स्‍क्रीन पर अपना मोबाइल नंबर डालें और ओटीपी रिक्‍वेस्‍ट पर क्लिक करें.
-मोबाइल पर आए ओटीपी को डालकर वैलिटेड पर क्लिक करें.
-इसके बाद स्‍क्रीन पर आपके आधार कार्ड से लिए गए सभी सिम के नंबर दिखने लगेंगे.

Tags: Business news in hindi, Cyber Crime, Cyber Fraud, Sim Card Racket

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