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Russia-Ukraine War : संकट बढ़ा तो भारत के जवान और किसान दोनों को होगा नुकसान, जानें कैसे

Russia-Ukraine War : संकट बढ़ा तो भारत के जवान और किसान दोनों को होगा नुकसान, जानें कैसे

भारत हर साल रूस और यूक्रेन से बड़ी मात्रा में Fertilizers का आयात करता है.

भारत हर साल रूस और यूक्रेन से बड़ी मात्रा में Fertilizers का आयात करता है.

रूस और यूक्रेन के युद्ध (Russia-Ukraine War) का भारत पर चौतरफा असर पड़ने की आशंका है. व्‍यापार के लिहाज से कई ऐसे उत्‍पाद हैं, जिनके लिए भारत इन दोनों देशों पर काफी हद तक निर्भर है. अगर युद्ध लंबा खिंचता है या उसका असर बढ़ता है तो भारत को निश्चित तौर पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

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नई दिल्‍ली. रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध (Russia-Ukraine War) लंबा खिंचा या इसकी वजह से संकट बढ़ा तो भारतीय किसान और जवान दोनों को नुकसान झेलना पड़ेगा. रूस और यूक्रेन के साथ भारत के व्‍यापारिक संबंध काफी मजबूत हैं और इसमें लगातार इजाफा हो रहा है.

दरअसल, भारत रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों से बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर्स (Fertilizers) का इम्‍पोर्ट करता है. साथ ही रूस से लड़ाकू विमान, मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम सहित कई तरह के उन्‍नत हथियार भी खरीदता है. युद्ध की वजह से इसकी सप्‍लाई पर असर पड़ेगा और देश की अर्थव्‍यवस्‍था में बड़ी भूमिका निभाने वाले कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ेगा.

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रूस से कितना फर्टिलाइजर आयात
भारतीय फर्टिलाइजर्स कंपनियां रूस से हर साल 4 लाख टन डाई अमीनों फॉस्‍फेट (DAP) का आयात करती हैं. सरकार के प्रयास से दोनों देश इस व्‍यापार को सालाना 10 लाख टन पहुंचाने की कोशिश में हैं. इसके अलावा पोटाश का आयात बढ़ाने के लिए भी 2021 में समझौता किया गया. भारत हर साल नाइट्रोजन, फॉस्‍फोरस और पोटैशियम भी 8 लाख टन खरीदने की कोशिश कर रहा है. 2020 में भारत ने रूस से ही 61 करोड़ डॉलर के फर्टिलाइजर का आयात किया था .

हथियारों की भी बंपर खरीद
भारत के पास रूस निर्मित हथियारों की लंबी शृंखला है. हाल में रूस से एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम खरीदने का करार किया गया था, जिसमें से अभी तक एक चौथाई की ही सप्‍लाई हुई है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2012 से 2016 तक भारत के कुल खरीदे गए हथियारों में रूस की हिस्‍सेदारी 68 फीसदी रही. स्‍पष्‍ट है कि युद्ध का असर बढ़ा तो इन भारत के रक्षा तंत्र को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

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यूक्रेन से सूरजमुखी तेल और फर्टिलाइजर का आयात
भारत की ओर से आयात किए जाने वाले कुल फर्टिलाइजर्स में यूक्रेन की मात्रा काफी बड़ी है. 2020 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेन ने भातर को 23.28 करोड़ डॉलर के फर्टिलाइजर्स का निर्यात किया था. इसमें पोटैशियम, यूरिया सहित कई उर्वरक शामिल थे. इसके अलावा भारत के कुल सूरजमुखी तेल में यूक्रेन की हिस्‍सेदारी 70 फीसदी है. जाहिर है कि संकट बढ़ा तो इसके दाम 60 फीसदी तक बढ़ सकते हैं. भारत में इस्‍तेमाल होने वाले कुल खाद्य तेल में सूरजमुखी की हिस्‍सेदारी 14 फीसदी है.

भारत-यूक्रेन और रूस का कुल कितना व्‍यापार
भारत के साथ रूस दुनिया का 25वां बड़ा व्‍यापारिक साझेदार है. 2021-22 में अब तक दोनों देशों के बीच 9.4 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हो चुका है. भारत मुख्‍य रूप से ईंधन, खनिज तेल, मोती, कीमती पत्‍थर, न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर, मशनरी और इलेक्‍ट्रॉनिक मशनरी मंगाता है, जबकि दवाओं, इलेक्ट्रिक मशीनरी उपकरण और जैविक रसायन उत्‍पादों व गाडि़यों का निर्यात करता है.

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इस साल यूक्रेन के साथ भारत का कुल व्‍यापार 2.3 अरब डॉलर का रहा है. इसमें कृषि उत्‍पाद, धातुओं, प्‍लास्टिक और पॉलिमर का आयात किया गया, जबकि दवाओं, मशनरी, रसायन और खाद्य उत्‍पादों का निर्यात हुआ. भारत के कुल आयात में 2 अरब डॉलर की हिस्‍सेदारी सिर्फ यूरिया और सूरजमुखी तेल की है.

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अकेले बिहार को 100 करोड़ रुपये का नुकसान
बिहार के भागलपुर की सिल्क दुनियाभर में मशहूर है. यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध छेड़ते ही 20 फीसदी ऑर्डर कैंसिल हो गए. यूरोपीय देशों में भागलपुर से सिल्क, तसर, लेनिन, कॉटन स्कार्फ आदि का निर्यात होता है. केवल यूक्रेन को हर साल 25-30 करोड़ का माल जाता है.कुल मिलाकर व्‍यापार पर असर पड़ने से करीब 100 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित होगा.

Tags: Agriculture, India Defence

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