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आपकी FD पर बैंक काट रहा है टैक्स, पैसे बचाने के लिए घर बैठे ऐसे जमा करें ये फॉर्म

आपकी एफडी के मुनाफे पर बैंक काटता है ये टैक्स! SBI ने VIDEO के जरिए बताया इस से बचने तरीका

आपकी एफडी के मुनाफे पर बैंक काटता है ये टैक्स! SBI ने VIDEO के जरिए बताया इस से बचने तरीका

ये बात बहुत कम लोग जानते है कि आमदनी मूल छूट टैक्स सीमा से कम हो फिर भी बैंक आपके फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के ब्याज पर टैक्स यानी TDS (Tax Deducted at Source) काटता है.

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    ये बात बहुत कम लोग जानते है कि आमदनी मूल छूट टैक्स सीमा से कम हो फिर भी बैंक आपके फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के ब्याज पर टैक्स यानी TDS (Tax Deducted at Source) काटता है.  आपको बता दें कि टीडीएस की कटौती तभी होती है जब एफडी और सेविंग बैंक अकाउंट से सालाना 10,000 रुपए तक का ब्याज मिलता है. अब सवाल उठता है कि इसके कैसे बचाया जाएगा. आइए जानें पूरा मामला...

    क्या है नियम- बजट 2018 के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अब तक 10,000 रुपये की सीमा बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया है, हालांकि, 60 साल से कम व्यक्तिगत करदाताओं के लिए यह सीमा एक समान है. (ये भी पढ़ें-सरकार का एक और तोहफा: ग्रेच्युटी पर मिलेगा ज्यादा मुनाफा, ब्याज दरें बढ़ी)

    टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि टीडीएस से बच सकते हैं, इसके लिए आपको फॉर्म 15G या फार्म 15H जमा करना होगा. इन फॉर्म को जमा करने की समय सीमा और बैंक द्वारा आपकी ब्याज आय पर कटौती की जाएगी. (ये भी पढ़ें-इस बड़े बैंक की एफडी पर अब मिलेगा ज्यादा मुनाफा बढ़ाई ब्याज दरें, जानिए पूरी डिटेल)

    फॉर्म 15G और फॉर्म 15H क्या है और ये कैसे ब्याज आय पर टीडीएस से बचने में मदद कर सकते हैं.

    फॉर्म 15G और फॉर्म 15H क्या है - टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि फार्म 15G और फॉर्म 15H एक फार्म है जो आप अपने बैंक में जमा कर सकते हैं यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगर आपके द्वारा अर्जित कुल आय पर कोई कर दायित्व नहीं है तो टीडीएस आपकी आय से कटौती नहीं की जाती है. यह फॉर्म हरेक साल जमा किए जा सकते हैं. इसलिए, हर साल आपको यह जांचना है कि आप इन फॉर्म को भरने के लिए पात्र हैं या नहीं, अर्थात किसी भी वर्ष अगर आपकी आय कर के लिए लायक है, तो आप पात्र नहीं हैं. (ये भी पढ़ें-अगर आपको भी पसंद है फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तो जरूर करें ये 4 काम)

    SBI यह सुविधा आपको ऑनलाइन दे रहा है. इसके लिए बैंक ने अपने ट्विटर हैंडल पर पूरी जानकारी दी है. इसके लिए बैंक ने वीडियो भी जारी किया है.


    फॉर्म 15G जमा करने के लिए इन शर्तों को ध्यान में रखना होगा-60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति या HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) इस फॉर्म को प्रस्तुत करने के लिए पात्र हैं. एक भारतीय निवासी होना चाहिए. स्थायी खाता संख्या (पैन) होना चाहिए. कुल आय पर टैक्स शून्य होना चाहिए.फिक्स्ड डिपॉजिट पर कुल ब्याज आय मूल छूट सीमा से कम होना चाहिए.

    बी फॉर्म 15 एच-60 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले व्यक्ति इस फॉर्म को जमा करने के लिए पात्र हैं.
    एक भारतीय निवासी होना चाहिए.स्थायी खाता संख्या (पैन) होना चाहिए. कुल आय पर टैक्स शून्य होना चाहिए. फॉर्म 15H के मामले में, किसी व्यक्ति को यह पूरा करने की आवश्यकता है कि कुल आय पर उसकी कर दायित्व शून्य है, लेकिन ब्याज आय की राशि ऐसे मामले में प्रासंगिक नहीं है.

    यह दर 10 फीसदी  होती है- टैक्स रिफंड हासिल करना टेढ़ा काम साबित हो सकता है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की लेटलतीफी आम बात है. इसे देखते हुए टैक्स प्लानिंग साल की शुरुआत में ही कर लेनी चाहिए ताकि ओवरपेमेंट और फिर इसके कारण रिफंड प्रोसेस से बचा जा सके. एंप्लॉयर के पास वक्त पर इन्वेस्टमेंट डिक्लेयरेशन जमा करने और 15G, 15H फॉर्म जमा करने से काफी सहूलियत होती है. ध्यान रखें कि 15G और 15H फॉर्म्स को चलताऊ ढंग से जमा न करें.

    जेल की सजा का प्रावधान-फॉर्म 15G में गलत डिक्लेयरेशन पर इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 277 के तहत पेनाल्टी लग सकती है. टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि इस फॉर्म में गलत जानकारी देने पर तीन महीने से लेकर दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है.



    जुर्माना अलग से लगेगा. अगर 25 लाख से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला हो तो सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

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