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बैंक खाते में जमा हैं आपके पैसे तो जान लें ये बातें, SBI ने दिए सुझाव

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Updated: November 11, 2019, 1:19 PM IST
बैंक खाते में जमा हैं आपके पैसे तो जान लें ये बातें, SBI ने दिए सुझाव
बैंक​ डिपॉस्ट के जोखिम से बचने के उपाय

हाल ही में हुए पीएमसी बैंक संकट (PMC Bank Crisis) के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में इससे निपटने के लिए सुझाव दिया है.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 1:19 PM IST
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नई दिल्ली. हाल ही में सामने आए पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक संकट (PMC Bank Crisis) ने हजारों डिपॉजिटर्स को झकझोर कर रख दिया था. वर्तमान में को-ऑपरेटिव बैंकों का नियमन रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव्स के साथ होता है, जिसके पास भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) जैसी विशेषज्ञता नहीं है. केंद्रीय बैंक के पास को-ऑपरेटिव बैंकों को रेग्युलेटर करने की शक्ति नहीं है. यही कारण है कि पीएमसी बैंक (PMC Banks) संकट की इस स्थिति तक पहुंचा. SBI रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में इनके बारे में बताया है.

1. को-ऑपरेटिव्स को बदलें : देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी रिसर्च में कहा कि अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों को मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 2002 के तहत रजिस्टर किया गया है. इन्हें जल्द से जल्द स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) या कॉमर्शियल बैंकों में बदल दिया जाना चाहिए. मौजूदा समय में अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों पर स्मॉल फाइनेंस बैंकों के मुकाबले नियमन में अधिक छूट है. इन बैंकों के बिजनेस साइज को भी कैप करना जरूरी है. इस मामले में ​RBI को विस्तृत स्कीम पेश करनी चाहिए.

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2. को-ऑपरेटिव्स को आरबीआई रेग्युलेट करे : मौजूदा समय में आरबीआई के पास शक्ति नहीं है कि वो अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के बोर्ड को कंस्टीट्यूट कर सके, ऑडिट कर सके या निदेशकों को हटा सके. रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे बदलना चाहिए. सरकार को नियमों में संशोधन कर आरबीआई द्वारा ही अर्बन को-ऑपरेटिव्स को रेग्युलेट कराना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे कॉमर्शियल बैंकों के लिए प्रावधान हैं.



3. को-ऑपरेटिव बैंकों लिए संगठन: SBI की इस रिसर्च में कई कमेटियों की बातों को भी दोहराया गया है. RBI को अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए एक अंब्रेला ऑर्गेनाइजेशन बनाना चाहिए ताकि वो वित्तीय तौर पर और मजबूत हो सकें और ​डिपॉजिटर्स का भी कॉन्फिडेंस बढ़े. कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि इससे उनकी तरलता बढ़ेगी और पूंजीगत सपोर्ट भी मिलेगा. साथ ही इससे फंड मैनेजमेंट समेत कंसल्टेंसी सर्विसेज मुहैया कराना सुविधाजनक होगा.

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First published: November 11, 2019, 12:59 PM IST
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