देश में कृषि वैज्ञानिकों की भारी कमी, 21 फीसदी पद खाली, कैसे आगे बढ़ेगी खेती-किसानी?

एक तरफ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में 6543 में से 1365 पद खाली हैं तो दूसरी तरफ बढ़ा दी गई कृषि वैज्ञानिक बनने की न्यूनतम योग्यता!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 10:28 AM IST
देश में कृषि वैज्ञानिकों की भारी कमी, 21 फीसदी पद खाली, कैसे आगे बढ़ेगी खेती-किसानी?
कृषि वैज्ञानिकों के बिना कैसे उन्नत होगी खेती-किसानी? (Photo-ओम प्रकाश)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 10:28 AM IST
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन पर तेजी से काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर खेती-किसानी को लेकर रिसर्च करने वालों की भारी कमी है. कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिना वैज्ञानिकों के खेती की उन्नति करने की बात बेमानी लगती है. इस समय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में 20.86 फीसदी वैज्ञानिकों के पद खाली हैं. उपर से तुर्रा ये कि परिषद ने कृषि वैज्ञानिक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता बढ़ा दी है. इससे कृषि वैज्ञानिक मिलना कठिन हो गया है.

आईसीएआर खेती-किसानी को लेकर रिसर्च करने वाली सबसे बड़ी संस्था है. परिषद से जुड़े देश भर में 103 रिसर्च सेंटर हैं. इसमें 6543 कृषि वैज्ञानिक होने चाहिए, लेकिन काम कर रहे हैं सिर्फ 5178. यानी 1365 पद खाली हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ा नंबर है. इस कमी से मौजूदा वैज्ञानिकों पर भी काम का दबाव है. सरकार से संसद में सवाल पर सवाल हो रहा है कि किसानों की आय कितनी बढ़ी है, इस पर साफ-साफ जवाब नहीं मिल रहा है. ऊपर से वैज्ञानिकों की कमी. खेती-किसानी के विकास में वैज्ञानिक समुदाय का बड़ा योगदान है. इसे समय-समय पर सरकार स्वीकार करती रहती है.

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कैसे बनेंगी किसानों की सहायता के लिए मशीनें (Photo-ओम प्रकाश)


वैज्ञानिकों की कमी पर सरकार ने क्या कहा?

बीजेपी से राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव पूछा कि क्या वैज्ञानिकों के पद खाली होने की वजह से कृषि से जुड़े रिसर्च पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है? जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पदों का खाली होना और उनका भरा जाना एक सतत प्रक्रिया है. जब कभी पद खाली होता है तो परिषद उसे भरने का हर संभव प्रयास करता है.

बढ़ा दी गई कृषि वैज्ञानिक बनने की न्यूनतम योग्यता

अन्य क्षेत्रों के मुकाबले देश में कृषि की पढ़ाई-लिखाई करने वालों की कमी है. अभी कृषि वैज्ञानिक बनने की न्यूनतम योग्यता संबंधित विषय में मास्टर डिग्री थी, जिसे आईसीएआर ने बढ़ाकर पीएचडी कर दिया है. जानकारों का कहना है कि इस फैसले के बाद वैज्ञानिकों के खाली पदों को भरना और कठिन हो जाएगा.
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ऐसे में वैज्ञानिक कम हो जाएं तो दिक्कत क्या है: देविंदर शर्मा

कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा का कहना है कि कृषि वैज्ञानिक वो काम कर ही नहीं रहे हैं जिसकी जरूरत है. वो पारंपरिक ढर्रे पर काम कर रहे हैं. क्या वैज्ञानिकों ने कभी इस पर कोई काम किया कि किसानों की आत्महत्या कैसे कम की जाए. जबकि यही खेती-किसानी का सबसे बड़ा सवाल है. जब वो यह काम नहीं कर रहे हैं तो उनकी संख्या कम भी हो जाए तो क्या दिक्कत है.

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किसानों को इस तरह खुशहाल बनाना चाहती है मोदी सरकार!


शर्मा का कहना है कि कृषि वैज्ञानिकों को समय के साथ अपनी भूमिका बदलनी होगी. ताकि वे किसानों के काम आएं. एक पहलू यह भी है कि आज ज्यादातर कृषि विश्वविद्यालयों के पास सिर्फ कर्मचारियों को वेतन देने का ही बजट है. वो रिसर्च क्या करेंगे.

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First published: August 2, 2019, 5:44 AM IST
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