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हैदराबाद के पेरेंट्स ने लेफ्ट हैंडेड बेटे के लिए लॉन्च किया स्टार्टअप, 4 साल में मिले 50 हजार ग्राहक

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

अपने लेफ्ट हैंडेड बेटे की समस्या को देखकर हैदराबाद के एक पेरेंट्स ने स्टार्टअप लॉन्च कर दिया. लोकल वेंडर्स और फ्रांसीसी कंपनी के सहयोग साल 2016 में 'द लेफ्ट हैंड शॉप' (MyLeftHand) स्टार्टअप का जन्म हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 6:36 PM IST
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नई दिल्ली. आमतौर पर हम अपने शरीर के एक हिस्से को दूसरे की तुलना में ज्यादा वरीयता देते हैं. यानी स्वाभाविक तौर पर जब हम कोई काम करने जाते हैं तो अपने आप शरीर के वो हिस्से पहले हरकत में आते हैं. इसी से तय होता है कि आप लेफ्टी (Left Hander) हैं या राइटी (Right Hander). लेफ्ट हैंडेड लोगों को कई तरह की समस्या आती है. वहीं, अपने लेफ्ट हैंडेड बेटे की समस्या को देखकर हैदराबाद के एक पेरेंट्स ने स्टार्टअप लॉन्च कर दिया.

हैदराबाद की रहने वाली संदीप सिंह कहती हैं, ''7 साल के गुरिंदर सिंह ने पांचवीं क्लास में प्रवेश किया था और अचानक दो मौलिक कार्यों लेखन और आर्ट में संघर्ष कर रहा था. गुरिंदर को शैक्षणिक जीवन में कभी कोई समस्या नहीं हुई. लेकिन होमवर्क पूरा नहीं करने या क्लास में नोट्स न लिखने की शिकायतें हम तक पहुंचने लगीं.

यह साल 2015 की बात है. गुरिंदर के माता-पिता संदीप और पवित्र शुरू में समस्या को समझने में नाकाम रहे. जब उन्होंने गुरिंदर से पूछा तो उसने कहा कि उसकी लिखने की स्पीड कम हो गई है और वह क्लास के अन्य लोगों की लिखने की स्पीड का सामना करने में सक्षम नहीं है.



बाएं हाथ के लोगों के लिए लिखना मुश्किल
संदीप ने बताया कि हमने उसकी समस्या को लेकर लेखन शैली और तकनीक का विश्लेषण करना शुरू किया. बाएं हाथ के लोगों के लिए लिखना मुश्किल हो जाता है क्योंकि हाथ आंखों और वाक्य में लिखे पिछले शब्द के बीच के व्यू को ब्लॉक कर देता है.

कैंची को पकड़ने में भी कठिनाई
संदीप ने कहा कि इस मुद्दे का नेचुरल सॉल्यूशन विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए हाथ उठाना है. हाथ की स्थिति हुक की तरह हो जाती है, जो लिखने की गति को धीमा कर देती है. समस्या सिर्फ लिखने की नहीं है. उदाहरण के लिए क्राफ्ट क्लास में कैंची से कागज काटने के समय कैंची को पकड़ने में भी कठिनाई होती है.

बाजार में लेफ्ट हैंडेड के लिए डिजाइन किए गए स्टेशनरी प्रोडक्ट महंगे
संदीप ने बताया कि हमने पहले लेफ्ट हैंडेड के लिए डिजाइन किए गए स्टेशनरी प्रोडक्ट पर शोध किया. वे सभी महंगे थे. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कैंची की एक जोड़ी की कीमत 1200 रुपये है.

आबादी का लगभग 8 प्रतिशत लेफ्ट हैंडेड होने का अनुमान
इस बात ने गुरिंदर के माता-पिता को परेशान किया. उन्हें यह अजीब लग रहा था कि ज्यादातर लोग इस क्षेत्र में कोई आंत्रप्रेन्योरशिप नहीं दिखा रहे हैं. उन्हें बताया गया कि लागत अधिक है और लेफ्ट हैंड लोगों के प्रोडक्ट का बाजार बहुत छोटा है. संदीप सिंह कहती हैं, ''इस देश की आबादी का लगभग 8 प्रतिशत लेफ्ट हैंडेड होने का अनुमान है. इस वजह से इस मार्केंट को लेकर आइडिया उनके दिमाग में आया.

उन्होंने कई भारतीय स्टेशनरी मैनुफैक्चरर से संपर्क किया तो स्केल और कॉस्ट की वही पुरानी बातचीत बार-बार उठाई जाने लगी. इसके बाद दोनों को लगा कि वे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से निर्मित प्रोडक्ट आयात कर सकते हैं. इसके बाद वह फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों में स्टेशनरी मैनुफैक्चरर के लिए पहुंचे और उन्हें भारत के बाजार के बारे में बताया दिखाया.

साल 2016 में 'द लेफ्ट हैंड शॉप' स्टार्टअप
संदीप ने कहा कि हमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैनुफैक्चरर से बात करने और उन्हें सस्ती कीमतों पर कुछ स्टेशनरी आइटम उपलब्ध कराने में एक साल से अधिक का समय लगा. लोकल वेंडर्स और फ्रांसीसी कंपनी के सहयोग साल 2016 में 'द लेफ्ट हैंड शॉप' (MyLeftHand) स्टार्टअप का जन्म हुआ. द लेफ्ट हैंड कैंची और पेन की आपूर्ति करता है, जबकि शेष उत्पाद भारत में ब्रांड MyLeft के तहत बनाए और बेचे जाते हैं.

संदीप ने कहा कि 1,200 रुपये की कीमत वाली कैंची की कीमत अब 200 रुपये हो गई है, जबकि 600 रुपये की पेंसिल शार्पनर की कीमत 28 रुपये है. चार साल के दौरान इस स्टार्टअप के लगभग 50 हजार ग्राहक हैं और यह काफी संतोषजनक रूप से बढ़ रहा है. कंपनी अब स्टेशनरी प्रोडक्ट्स से आगे का विस्तार करना चाहती है.
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