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डिहाइड्रेशन के मामूली लक्षण दिखें तो भी रहें अलर्ट: हाइड्रेट रहने के लिए क्या करें और क्या न करें

जब डिहाइड्रेशन के मामूली लक्षण भी दिखें, तभी सचेत हो जाना चाहिए.

जब डिहाइड्रेशन के मामूली लक्षण भी दिखें, तभी सचेत हो जाना चाहिए.

शरीर के लिए सही हाइड्रेशन जितना आसान लगता है असल में उतना भी आसान नहीं है. हालांकि, यह रॉकेट साइंस की तरह ज़्यादा मुश्किल भी नहीं है. यहां हैं कुछ आसान टिप्स, जिन्हें फ़ॉलो करके आप हमेंशा रह सकते हैं हाइड्रेट.

    हाइलाइट्स

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, भारत में लू वाले दिनों की संख्या हर साल लगातार बढ़ रही है.
    ज़रूरी है कि जब डिहाइड्रेशन के मामूली लक्षण भी दिखें, तभी सचेत हो जाना चाहिए.
    सही हाइड्रेशन का मतलब फ्लूएड बैलेंस यानी शरीर में तरलता की सही मात्रा होना है.

    नई दिल्ली. हर साल भारत में गर्मी पिछले और पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है. प्रचंड गर्मी ऐसे रिकॉर्ड बनाए, यह कोई नहीं चाहता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, भारत में लू वाले दिनों की संख्या हर साल लगातार बढ़ रही है 1981-1991 में यह 413 दिनों का था, जो 2011-2020 में बढ़कर 600 दिनों तक पहुंच गया है. एक और तथ्य है, सिर्फ़ इस साल, नई दिल्ली ने अप्रैल में लगातार 7 दिनों तक 40 डिग्री से ज़्यादा का तापमान झेला है, जबकि औसत तापमान 3 डिग्री तक कम था.

    डिहाइड्रेशन सिर्फ़ गर्मियों में होने वाली परेशानी नहीं है. हममें से ज़्यादातर लोगों को शरीर से मिलने वाले डिहाइड्रेशन के संकेत पता भी नहीं चलते हैं. लोग डिहाइड्रेशन के संकेत समझ नहीं पाते हैं और अपनी रोज़मर्रा की रूटीन में कोई बदलाव भी नहीं करते हैं. इसकी वजह है, आम तौर पर डिहाइड्रेशन ज़्यादा गंभीर नहीं होता है और आसानी से ठीक हो जाता है. इसलिए, ज़रूरी है कि जब डिहाइड्रेशन के मामूली लक्षण भी दिखें, तभी सचेत हो जाना चाहिए. अगर यह बार-बार होने लगे, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं. जैसे कि त्वचा का सूखना और दरारें पड़ना, कब्ज, मांसपेशियों का कमज़ोर होना, लगातार थकान महसूस करना और सिर में दर्द.

    ज़्यादातर लोग समझते हैं कि हाइड्रेशन का मतलब सिर्फ़ पर्याप्त पानी पीना भर है. हालांकि, हकीकत में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. सही हाइ़्रेशन का मतलब फ्लूएड बैलेंस यानी शरीर में तरलता की सही मात्रा होना है.

    जैसा कि पहले ही बताया गया है कि सही मात्रा में हाइड्रेशन कोई रॉकेट साइंस नहीं है. इसके लिए कुछ चीज़ें और आदतें हैं जो आपको अपनानी चाहिए और कुछ गलत आदतों से दूर रहना चाहिए. आसान शब्दों में कहें, तो इसका मतलब है कि शरीर में फ़्लूएड और इलेक्ट्रोलाइट की सही मात्रा होनी चाहिए. दोनों की सही मात्रा होने पर ही आपके शरीर में रक्त प्रवाह, त्वचा में नमी और दिमाग (शरीर के सभी अंगों) सही तरीके से काम कर सकता है.

    अपनाएं ये अच्छी आदतें: ज़रूर करें
    1. दिन भर में पानी की कितनी ज़रूरत है इसे समझें: आम तौर पर पुरुष को एक दिन में 3.7 लीटर और महिला को 2.7 लीटर पानी रोज़ पीना चाहिए. हालांकि, आपको अपने पानी की मात्रा कुछ हालात में बढ़ाने की ज़रूरत होती है. जैसे कि अगर आप भारत के किसी गर्म हिस्से (असल में भारत का ज़्यादातर हिस्सा गर्म ही है) में रहते हैं, गर्मी का मौसम हो या फिर आप कैफ़ीन सेवन करते हों (इसकी वजह से आपको बार-बार पेशाब करने जाना होता है). कुछ और भी स्थितियों में पानी का ज़्यादा सेवन करना चाहिए. जैसे कि अगर आप काफी ज़्यादा कसरत करते हों, आप गर्भवती हैं या स्तनपान कराती हैं, आप बीमार हैं और अगर आप बहुत ज़्यादा दवाइयां लेते हैं. आपके मन में कोई भी सवाल है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

    2. दिन में कितना पानी पी रहे हैं, इस पर नज़र रखें: दिन भर में हर थोड़ी देर पर पानी पीने की आदत बनाएं. पानी पीने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप प्यास लगने का इंतज़ार करें. देखिए कि शरीर को ज़रूरी पानी मिले इसके लिए आप क्या कर सकते हैं. बहुत से लोग पानी की ज़रूरत पूरा करने के लिए वॉटर ट्रैकिंग एप्लिकेशन इस्तेमाल करते हैं. ये एप्लिकेशन समय-समय पर आपको पानी पीने की याद दिलाते रहते हैं.

    3. जिन फलों-सब्ज़ियों में पानी की मात्रा ज़्यादा हो उनका सेवन करें: एक बात आपको समझनी होगी कि हाइड्रेशन के लिए सिर्फ़ पानी ही नहीं, लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स भी ज़रूरी है. सूप, जूस, दाल और ऐसे ही दूसरे पानी से भरपूर खाने-पीने की चीज़ें शरीर में फ़्लूएड (तरलता) की ज़रूरत को पूरा करने के लिए अच्छा विकल्प हैं. जब आपको थकान लगे या गला सूखने जैसा महसूस हो, तो ज़रूरी है कि आप इलेक्ट्रोलाइट्स का ज़्यादा इस्तेमाल करें. खास तौर पर जब आपको लग रहा हो कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं. इन हालात में, इलेक्ट्रॉल – ओरिजनल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन आपको डिहाइड्रेशन से बचा सकता है. साथ ही, शरीर में फ़्लूएड और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को बनाए रखता है.

    इन आदतों से दूर रहें: ऐसा करते हैं, तो तुरंत बंद कर दें
    1. पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतज़ार न करें: अगर आप प्यास लगने का इंतज़ार करेंगे, तो जब तक प्यास लगेगी तब तक आप कुछ हद तक डिहाइड्रेट हो चुके होते हैं (1-3% तक पानी की कमी). प्यास लगने पर पानी पीने के बजाय, अपनी आदत बनाएं कि आप खुद ही हर थोड़ी देर में पानी पीते रहें.

    2. मीठे पेय से बचें: चीनी आपकी प्यास और बढ़ा देता है! किडनी शरीर का वह हिस्सा हैं जो खून में शर्करा यानी कि ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए काम करता है. किडनी पेशाब में शुगर की मात्रा नियंत्रित करने के लिए काम करती है. इतना ही नहीं शुगर के साथ आप किसी भी स्पोर्ट्स ड्रिंक (कोल्डड्रिंक, फ़्लेवर्ड जूस वगैरह) का सेवन कर रहें हो तो, हमेशा शुगर की मात्रा ज़रूर जांचें.

    3. डिहाइड्रेशन के लक्षणों के गंभीर होने का इंतज़ार न करें: अगर आपको डिहाइड्रेशन, शरीर में पानी की कमी महसूस हो रही है (खास तौर पर देर तक वर्कआउट करने पर या किसी गर्म दिन), तो डिहाइड्रेशन के लक्षणों के गंभीर होने का इंतज़ार न करें. इस बात की काफी संभावना है कि मामूली लक्षण अभी दिख रहे हैं और इसमें सिर्फ़ पानी पीते रहना काफी नहीं है. इलेक्ट्रॉल जिसमें सही मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स है शरीर के ठीक होने के लिए ज़रूरी है.

    4. बहुत ज्यादा प्यास लगना और गला सूखने को अनदेखा न करें: खास तौर पर अगर आपके साथ अक्सर ऐसा हो रहा है (प्यास लगना और गला सूखना), तो इसे अनदेखा न करें. यह आपके पाचन या किसी और समस्या का संकेत हो सकती है. तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें, सिर्फ़ Google सर्च से काम नहीं चलाएं! ऐसी स्थिति में डॉक्टर की जांच और सही इलाज ज़रूरी है.

    हमारे शरीर का 70% हिस्सा पानी से बना है. ऐसी ही संरचना पृथ्वी की भी है! हर उम्र, फ़िटनेस लेवल वाले लोगों के लिए सही हाइड्रेशन ज़रूरी है. अच्छी बात यह है कि आप बहुत आसानी से सही हाइड्रेशन पा सकते हैं. हमेशा यह अच्छा होता है कि आप अपने पास एक बैकअप रखें. आपको पता है कि भारतीय परिवारों को Electral पर कितना भरोसा है. बीमारी से ठीक होने के लिए या सेहत को दुरुस्त रखने के लिए, Electral भरोसेमंद है.

    Tags: Dehydration, Health, Hydrationforhealth

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