9 लाख करोड़ की अमेरिकी कंपनी IBM के बॉस बने ये भारतीय, 6 अप्रैल से CEO का पद संभालेंगे अरविंद कृष्णा

9 लाख करोड़ की अमेरिकी कंपनी IBM के बॉस बने ये भारतीय, 6 अप्रैल से CEO का पद संभालेंगे अरविंद कृष्णा
6 अप्रैल से IBM के CEO का पद संभालेंगे अरविंद कृष्णा

अमेरिका की बड़ी कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (IBM) में भारतीय मूल के अरविंद कृष्णा नए CEO होंगे. वह IBM CEO के तौर पर वर्जीनिया रोमेटी की जगह लेंगे. 57 साल के अरविंद कृष्णा 6 अप्रैल को अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे.

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  • Last Updated: January 31, 2020, 9:25 AM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका की बड़ी कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (IBM) में भारतीय मूल के अरविंद कृष्णा नए CEO होंगे. वह IBM CEO के तौर पर वर्जीनिया रोमेटी की जगह लेंगे. 12,588 करोड़ डॉलर (करीब 8.93 लाख करोड़ रुपये) की मार्केट कैप वाली कंपनी IBM ने 57 साल के अरविंद कृष्णा (Arvind Krishna to be new IBM CEO) को 6 अप्रैल से CEO की नई जिम्मेदारी देने का ऐलान किया हैं. आपको बता दें कि अरविंद कृष्णा, फिलहाल क्लाउड और कॉग्निटिव सॉफ्टवेयर के लिए IBM में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर काम कर रहे हैं. उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों में IBM क्लाउड, IBM सिक्योरिटी और कॉग्निटिव एप्लिकेशन बिजनेस और IBM रिसर्च भी शामिल हैं. अरविंद IBM सिस्टम और टेक्नोलॉजी ग्रुप की डेवलेपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन के जनरल मैनेजर भी रहे थे. उन्होंने IBM के डेटा से संबंधित कई बिजनेस की अगुवाई की है. उन्होंने साल 1990 में IBM को ज्वाइन किया था.

अरविंद कृष्णा की नियुक्ति को लेकर मौजूदा वर्जीनिया रोमेटी ने कहा है कि IBM में अगले दौर के लिए अरविंद बेस्ट CEO हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा, वह काफी अच्छे टेक्नोलॉजिस्ट हैं, जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड, क्वांटम कम्प्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी हमारी अहम तकनीकों को विकसित किया हैं.

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IBM के नए CEO बनने वाले अरविंद कृष्णा के बारे में जानिए...


अरविंद कृष्णा की पढ़ाई की करें तो उन्होंने IIT कानपुर से अंडरग्रेजुएट डिग्री ली है. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ इलनॉइज, अर्बाना शैंपेन से पीएचडी की है. त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वह शानदार ऑपरेशनल लीडर भी हैं.

IBM के बारे में जानिए...

बिग ब्लू के नाम से दुनिया में फेमस आईटी कंपनी ने 20 शताब्दी में अपने टेक्नोलॉजी के विकास के लिए अपना खासा योगदान दिया है. आईबीएम का स्थापना 16 जून 1911 को की गई थी.



कम्प्यूटर कंपनियों में आईबीएम एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसने अब तक तीन नोबेल पुरस्कार, चार टूरिंग पुरस्कार, पांच राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी पदक तथा पांच राष्ट्रीय विज्ञान पदक जीते हैं. यहीं नहीं कंपनी के नाम दुनिया के सर्वाधिक पेटेंट होने का भी गौरवमयी इतिहास जुड़ा हुआ है.

16 जून 1911 को कंपनी ने अपना कार्यक्षेत्र बदल कर कम्प्यूटर रिसर्च कर लिया तथा 1924 में अपना वर्तमान नाम आईबीएम अपनाया. 1981 में आईबीएम ने पर्सनल कम्प्यूटर्स की बिक्री शुरू की जिसने जल्द ही आईबीएम को दुनिया की श्रेष्ठतम कंपनियों में एक बना दिया.

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