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चंदा कोचर की बढ़ी मुश्किलें, ICICI ने वापस मांगा पिछले 12 साल का इंसेटिव और बोनस

News18Hindi
Updated: January 13, 2020, 10:39 PM IST
चंदा कोचर की बढ़ी मुश्किलें, ICICI ने वापस मांगा पिछले 12 साल का इंसेटिव और बोनस
आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी व सीईओ चंदा कोचर

ICICI Bank ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में एक मॉनेटरी सूट (Monetary Suit) फाइल कर चंदा कोचर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. इसके पहले ईडी ने चंदा कोचर व दीपक कोचर की 78 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त की थी.

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  • Last Updated: January 13, 2020, 10:39 PM IST
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नई दिल्ली. ICICI बैंक की पूर्व MD व CEO चंदा कोचर (Chanda Kochhar) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब आईसीआईसीआई बैंक ने चंदा कोचर के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में मॉनेटरी सूट (Monetary Suit) फाइल किया है. बैंक ने कोचर की नियुक्ति को निरस्त कराने की बात ​कहते हुए कई तरह की रकम की मांग की है. बीते 10 जनवरी को फाइल किए गए एफिडेविट में बैंक ने चंदा कोचर की तरफ से दायर की गई याचिक को निरस्त करने की भी मांग की गई है.

बता दें कि चंदा कोचर ने एक याचिका दायर कर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में अपनी बर्खास्तगी को कोर्ट में चुनौती दिया था. बैंक ने अपने दलील में कहा है कि इस मामले को कॉमर्शियल केस (Commercial Suit) के तहत उचित फैसला लिया जा सकता है.

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मांग ने मांगा 12 साल का बोनस व इंसेटिव पे

बैंक की तरफ से दाखिल किए गए एफिडेविट में कहा गया, 'आईसीआईसीआई ने चंदा कोचर को दिए गए बोनस के क्लॉबैक को लेकर एक सूट फाइल किया है, जो उन्हें अप्रैल 2006 से लेकर मार्च 2018 के बीच दिए गए हैं.' क्लॉबैक (Clawback) एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें किसी कर्मचारी को इंसेटिव आधारित पे व बोनस को ​बर्खास्तगी की सूरत में वापस लेने का प्रावधान होता है. आमतौर पर यह कर्मचारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार या निजी हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने के आरोप में होता है.

अपने स्टॉक विकल्प को सु​रक्षित करने का भी आरोप
एफिडेविट में आगे कहा ​गया कि कोचर की वजह से बैंक व सभी स्टेकहोल्डर्स की छवि को नुकसान पहुंचा है. इसे बैंक छवि खराब हुई है. बैंक ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है ताकि उनकों निजी फायदा मिल सके. एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अपने लिए स्टॉक विकल्प को सुरक्षित करने के लिए भी गलत कदम उठाया है. 

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पिछले साल CBI ने दर्ज किया था केस
उल्लेखनीय है कि पिछले साल जनवरी माह में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने चंदा कोचर के खिलाफ केस दर्ज किया था. कोचर पर आरोप था कि उन्होंने बेईमानी से वीडियोकॉन ग्रुप को हजारों करोड़ रुपये का लोन की मंजूरी दी. उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखते हुए केवल अपने निजी हितों का ध्यान रखा.

ED ने जब्त किया है 78 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी
इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया था. पिछले सप्ताह ही ED ने चंदा कोचर की 78 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी जब्त की थी. ये प्रॉपर्टी चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और उनकी कंपनी से संबंधित थी. ईडी ने खुलासा किया है कि लोन को रिफाइनेंस किया गया है और 1,730 करोड़ रुपये लोन वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड व इस फर्म की अन्य कंपनियों को जारी किया था. 30 जून 2017 को ये लोन बैंक के फंसे कर्ज में शामिल हो गए.

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First published: January 13, 2020, 10:34 PM IST
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