खुशखबरी! सरकारी से प्राइवेट हुए इस बैंक का लोन हुआ सस्ता, इतनी कम हुई EMI

लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के स्वामित्व वाले IDBI बैंक ने 12 जून को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.5 से 0.10 फीसदी तक की है. यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू होगी.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 4:28 PM IST
खुशखबरी! सरकारी से प्राइवेट हुए इस बैंक का लोन हुआ सस्ता, इतनी कम हुई EMI
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के स्वामित्व वाले IDBI बैंक ने 12 जून को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.5 से 0.10 फीसदी तक की है. यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू होगी.
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Updated: June 12, 2019, 4:28 PM IST
सरकारी से प्राइवेट हुए आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) ने अपने ग्राहकों को तोहफा दिया है. लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के स्वामित्व वाले IDBI बैंक ने 12 जून को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.5 से 0.10 फीसदी तक की है. यह कटौती तुरंत प्रभाव से लागू होगी.  MCLR घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम EMI देनी पड़ती है. आपको बता दें कि 6 जून को आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 फीसदी घटा दिया था. इसके बाद बैंकों ने ब्याज दरें घटाना शुरू की हैं.

कितनी घटी ब्याज दर


>> कटौती के बाद बैंक के ओवरनाइट, एक माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 7.90 फीसदी, 8.15 फीसदी और 8.60 फीसदी रह गई.
>> इसी तरह एक साल की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 8.95 फीसदी हो गई.

>> बैंक की ओर से ब्याज दर में यह कमी रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती के बाद की गई है. रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते रेपो दर को 6 फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया था.

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OBC ने भी की MCLR में कटौती
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बता दें कि 11 जून को सरकारी बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.10 फीसदी तक की थी. इसके बाद बैंक के एक माह और छह माह की अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 0.10 फीसदी घटकर क्रमश: 8.35 फीसदी और 8.60 फीसदी रह गई.

MCLR कम होने से होता है ये असर
MCLR कम होने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.

क्या है MCLR 
MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.

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कैसे तय होता है MCLR
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट और टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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