IDBI बैंक को क्यों मिलेंगे 9000 करोड़ रुपये! सरकार ने दी इसकी पूरी जानकारी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Government of India) ने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) को 9000 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है. आइए जानें इस कदम के बाद बैंक पर क्या असर होगा?

News18Hindi
Updated: September 5, 2019, 6:12 PM IST
IDBI बैंक को क्यों मिलेंगे 9000 करोड़ रुपये! सरकार ने दी इसकी पूरी जानकारी
IDBI बैंक को इसलिए मिलेंगे 9000 करोड़ रुपये! सरकार ने दी इसकी पूरी जानकारी
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Updated: September 5, 2019, 6:12 PM IST
नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Government of India) ने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) को 9000 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है. बैंक को रकम सरकार और LIC  मिलकर देंगे. LIC की IDBI बैंक में 51% हिस्सेदारी है. आपको बता दें कि LIC 4,743 करोड़ रुपये का निवेश करेगा. वहीं, सरकार 4,557 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में 21 जनवरी को 51% नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदी थी.

क्यों मिलेंगे IDBI बैंक को 9000 करोड़ रुपये-मोदी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैंको को पूंजी देने के पीछे इसकी वित्तीय सेहत को बेहतर करना है. साथ ही, इस कदम के बाद बैंक के पास मुनाफा कमाने और कर्ज देने के लिए काफी पैसा रहेगा. इसके अलावा सरकार हमेशा अपने निवेश को बेहतर समय पर वसूलती है.

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वित्तीय वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में IDBI बैंक को 3,800 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. वहीं, बैंक को 2018-19 की अप्रैल-जून तिमाही में 2,409.89 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था.

आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) अब बीमा कंपनी आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस (IDBI Federal Life Insurance) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेपी मॉर्गन इंडिया (JP Morgan India) को आईडीबीआई बैंक ने आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया संभालने के लिए नियुक्त किया है.

आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस में आईडीबीआई बैंक 48 फीसदी, जबकि फेडरल बैंक (Federal Bank) और एजेस इंश्योरेंस इंटरनेशनल (Ageas Insurance International) दोनों की 26-26% हिस्सेदारी है.
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IDBI बैंक के बारे में जानिए- IDBI बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) की स्थापना 1 जुलाई, 1964 को की गयी. 16 फरवरी, 1976 तक यह रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की एक सहायक संस्था (Wholly-Owned Subsidiary) के तौर पर काम करता रहा.

उसके बाद इसे सरकार द्वार एक स्थायत्तशासी निगम (Autonomous Corporation) का दर्जा दे दिया गया. 16 जनवरी, 1976 से औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) को रिजर्व बैंक के संगठन से अलग कर दिया गया (उस समय तक यह रिजर्व बैंक का एक सहायक संगठन था) . इसके लिए औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम में संशोधन किया गया.

अपने पुनर्संगठित रूप में विकास बैंक को एक शीर्ष संस्था (Apex Institution) की तरह एक व्यापक भूमिका सौंपी गयी जिसमें इसको विकास बैंकिंग के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं के कार्यों का समन्वय का महत्वपूर्ण कार्य भी सौंप दिए गए.

इसे कंपनी अधिनियम,1956 की धारा 4ए के प्रावधानों के अंतर्गत एक सार्वजनिक वित्तीय संस्था का दर्ज़ा प्राप्त हुआ. सन् 2004 तक यानी, 40 वर्षों तक इसने वित्तीय संस्था के रूप में कार्य किया और 2004 में इसका रूपांतरण एक बैंक के रूप में हो गया.

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First published: September 5, 2019, 4:52 PM IST
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