इनकम टैक्स के दायरे में आ रहा है ईपीएफ तो करें यह उपाय, ज्यादा मिलेगा ब्याज

इस साल एक अप्रैल से सालाना 2.5 लाख से अधिक के पीएफ योगदान (कर्मचारी का) से होने वाली ब्याज आय पर टैक्स लगेगा.

इस साल एक अप्रैल से सालाना 2.5 लाख से अधिक के पीएफ योगदान (कर्मचारी का) से होने वाली ब्याज आय पर टैक्स लगेगा.

आप ज्यादा ब्याज के लिए स्वैच्छिक ईपीएफ यानी अनिवार्य के अतिरिक्त रकम जमा करते हैं तो इसे तत्काल रोंक दें. इस राशि को यदि म्यूच्यूल फंडों के जरिए डेट में निवेश किया जाए तो ज्यादा फायदा मिलेगा और जाखिम भी कम रहेगा.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष यानी एक अप्रेल से कर्मचारी भविष्य निधि ( Employee Provident Fund, ईपीएफ) की सालाना 2.5 लाख रुपए से ज्यादा की रकम को इनकम टैक्स के दायरे में लाना प्रस्तावित किया है. यानी आपका ईपीएफ (EPF) योगदान सालाना 2.5 लाख रुपए से ज्यादा है तो टैक्स प्लानिंग (Tax Planning) नए सिरे से करनी होगी.
सीए विकास अग्रवाल बताते हैं कि आप ज्यादा ब्याज के लिए स्वैच्छिक ईपीएफ यानी अनिवार्य के अतिरिक्त रकम जमा करते हैं तो इसे तत्काल रोंक दें. इस राशि को यदि म्युच्यूल फंडों के जरिए डेट में निवेश किया जाए तो ज्यादा फायदा मिलेगा और जाखिम भी कम रहेगा. शेयर बाजार विशेषज्ञ सानिध्य अग्रवाल बताते हैं कि टैक्स प्लानिंग में सबसे पहले देखा जाना चाहिए कि आप कितना टैक्स जमा करते हैं और जहां निवेश कर रहे हैं वहां कितना टैक्स बचता है. इसके बाद निवेश पर ध्यान देते हुए टैक्स के बाद मिलने वाले नेट ब्याज दर को निकाला जाना चाहिए. इससे आप जान पाएंगे कि आपको अपने निवेश पर वास्तविक रूप से कितना ब्याज मिल रहा है. इसे विभिन्न उदाहरणों के जरिए समझा जा सकता है.
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टैक्स के बाद ईपीएफ पर वास्तविक रिटर्न 5.85 प्रतिशत ही रह जाएगा
यदि आपका मूल वेतन सालाना 41 लाख रुपए है तब इस पर 2.5 लाख रुपए से ज्यादा राशि पर ईपीएफ कटौती होगी. फिलहाल ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5% है. मौजूदा 30% की टैक्स दर (+4% उपकर) को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को सालाना 2.5 लाख से अधिक के ईपीएफ में योगदान पर टैक्स चुकाने के बाद 5.85% प्रभावी ब्याज मिलेगा.
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स्वैच्छिक ईपीएफ 2.5 लाख से ज्यादा है तो डेट है अच्छा विकल्प
यदि आप ज्यादा ब्याज दर के लिए ईपीएफ में 2.5 लाख रुपए से ज्यादा जमा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको टैक्स प्लानिंग की जरूरत पड़ेगी. ऐसा न करने पर आपका रिटर्न 5.85 प्रतिशत तक सीमित हो जाएगा. लिहाजा, डेट फंड का रास्ता अपना सकते हैं. डेट फंड लंबी अवधि वाले भारत सरकार के बॉन्ड या राज्य सरकार के बॉन्ड खरीदते हैं. म्यूचुअल फंडों को प्राप्त किए गए कूपनों (ब्याज) पर टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता, जिससे आय बढ़ती जाती है और जमा होती रहती है. इस तरह लंबी अवधि में अच्छा-खासा फंड तैयार हो जाता है. फंड को रिडीम कराते समय निवेशकों को जरूर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा, जिसकी दर फिलहाल 20 प्रतिशत है. यानी इनकम टैक्स की सबसे उच्च दर 34 प्रतितश स्लैब से करीब 14 फीसदी कम. ऐसे में निवेशक स्वैच्छिक प्रोविडेंड फंड (वीपीएफ) का पैसा डेट फंड में ट्रांसफर कर सकते हैं. इससे उन्हें कम टैक्स का फायदा मिलेगा और रिटर्न में बड़ा फर्क नजर आएगा.
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इनके लिए चिंता की बात नहीं
इनकम टैक्स के मौजूदा प्रावधानों के तहत कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री है. लेकिन, इस साल एक अप्रैल से सालाना 2.5 लाख से अधिक के पीएफ योगदान (कर्मचारी का) से होने वाली ब्याज आय पर टैक्स लगेगा. मध्यम आय वाले कर्मचारियों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बजट का यह प्रावधान उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है.
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