जो बाइडन बने अमेरिका के प्रेसिडेंट, भारतीयों के खाने-पीने पर ऐसे पड़ेगा असर

जो बाइडन के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने से भारतीयों के खान-पान पर असर पड़ेगा.
जो बाइडन के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने से भारतीयों के खान-पान पर असर पड़ेगा.

अमेरिका सोयाबीन (Soybean) का बड़ा निर्यातक देश है. वहीं, भारत (India) सोयाबीन आयात करने के मामले में दूसरे और चीन (China) पहले पायदान पर है. ऑल इंडिया एडिबल ऑयल फेडरेशन की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आने के बाद चीन ने सोयाबीन खरीद के लिए दूसरे बाजारों का रुख कर लिया था. अब जो बाइडन (Joe Biden) के आने पर खाद्य तेल महंगे होने की बात सिर्फ अफवाह है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 10:38 AM IST
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नई दिल्ली. अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव (US Presidential Election) में जो बाइडन जीत के करीब नजर आ रहे हैं. अगर कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो जो बाइडन (Joe Biden) प्रेसिडेंट बन सकते हैं. भारत (India) में अमेरिका के साथ द्विपक्षीय कारोबार (Bilateral Trade) को लेकर बाइडन से खासी उम्मीदें लगी हुई हैं. सिर्फ सोना-चांदी (Gold-Silver) ही नहीं, उनके अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने से भारतीयों के खाने-पीने पर भी असर पड़ेगा खासतौर से कुकिंग ऑयल (Cooking Oil) पर. बता दें कि अमेरिका सोयाबीन (Soybean) का बड़ा निर्यातक देश है. वहीं, भारत सोयाबीन खरीदने वालों की फेहरिस्त में दूसरे और चीन (China) पहले पायदान पर है.

अफवाह है बाइडन के आने से सोयाबीन ऑयल महंगा होगा
ऑल इंडिया एडिबल ऑयल फेडरेशन के महामंत्री शंकर ठक्कर की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आने के बाद चीन ने सोयाबीन की खरीद के लिए अमेरिका के साथ ही दूसरे बाजारों की ओर रुख कर लिया था. अब यह कहना गलत है कि जो बाइडन के आने के बाद चीन दोबारा अमेरिका का बड़ा सोयाबीन ग्राहक बन जाएगा और चीन की मनमानी शुरू होने से इस खाद्य तेल के दाम बढ़ जाएंगे. इसके उलट उम्मीद है कि जो बाइडन के आने के बाद ऑयल नेक्सस टूटेगा क्योंकि ट्रंप की खुद की कंपनियां भी कारोबार में शामिल थीं. ट्रंप के जाने के बाद ऐसी कंपनियों को पर्दे के पीछे से मिलने वाला फायदा बंद हो जाएगा.

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कमोडिटी मार्केट के लिए फायदेमंद साबित होंगे बाइडन


ठक्कर का कहना है कि भारतीय कमोडिटी बाजार जो बाइडन को उम्मीद की नजरों से देख रहा है. सिर्फ ऑयल ही नहीं दूसरे बाजार भी बाइडन के आने के बाद प्रभावित होंगे. सटोरियों और कुछ खास कारोबार को लीड करने वाले नेक्सस खत्म होने की उम्मीद है. अगर हम पिछले 20-25 साल का बाजार देखें तो कच्चे माल की कमी होने या फसल अच्छी होने के बाद रेट में कभी इतना अंतर नहीं आता है, जितना सटोरियों और नेक्सस से बाजार ऊपर-नीचे होता है. बीते कुछ साल से यही नेक्सस खासा सक्रिय है.
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