LIC पॉलिसी खरीदते समय एजेंट ने बना दिया है बेवकूफ तो ऐसे करें रिटर्न, पैसे मिल जाएंगे वापस

अगर आप भी पॉलिसी लेने के बाद इस स्थिति से गुजर रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा तरीका जिससे आप पॉलिसी लेने के बाद उस पॉलिसी का पैसा वापस पा सकते हैं.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 7:21 AM IST
LIC पॉलिसी खरीदते समय एजेंट ने बना दिया है बेवकूफ तो ऐसे करें रिटर्न, पैसे मिल जाएंगे वापस
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: December 6, 2018, 7:21 AM IST
अक्सर लोग पॉलिसी लेने के बाद इस टेंशन में रहते हैं की जो पॉलिसी उन्होंने ली है वो उनके लिए कितनी सही और किफायती है. अगर आप भी पॉलिसी लेने के बाद इस स्थिति से गुजर रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा तरीका जिससे आप पॉलिसी लेने के बाद उस पॉलिसी का पैसा वापस पा सकते हैं.

हम बात कर रहे हैं फ्री-लुक पीरियड की. फ्री लुक अवधि का लाभ आप 15 दिनों तक उठा सकते हैं. फ्री-लुक अवधि के दौरान आप कंपनी को पॉलिसी वापस कर सकते हैं. इरडा के दिशानिर्देशों के अनुसार बीमा कंपनियां पॉलिसी धारकों को पॉलिसी जारी करने के बाद फ्री-लुक अवधि उपलब्ध कराती है.

इन पॉलिसी पर होती है लागू- फ्री-लुक अवधि के कुछ पहलू ये हैं कि यह कम से कम 3 साल की जीवन बीमा पॉलिसी या स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर ही लागू होती है. इस अधिकार का प्रयोग पॉलिसी के दस्तावेज मिलने के 15 दिनों के भीतर किया जा सकता है. पॉलिसी दस्तावेज की प्राप्ति की तारीख साबित करने का दायित्व पॉलिसीधारक का होता है.

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कैसे उठाएं फ्री लुक अवधि का लाभ- पॉलिसीधारक बीमा कंपनी को उसकी फ्री-लुक अवधि की दिशा में काम करने के लिए लिख सकता है. अधिकतर मामलों में कंपनी की वेबसाइट से फ्री लुक फार्म डाउनलोड किए जा सकते हैं. इसमें पॉलिसीधारक को पॉलिसी के दस्तावेज मिलने की तिथि, एजेंट की जानकारी और रद्द करने या बदलने के कारण के बारे में जानकारी देनी होती है. इसके अलावा पॉलिसी के मूल दस्तावेज, पहले प्रीमियम की रसीद, एक कैंसिल चेक और अन्य दस्तावेज जमा कराने होते हैं. पैसे वापस देने के मामले में पॉलिसीधारक को बैंक संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराने की जरूरत होती है.

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कंपनी के जरिए पॉलिसी कैंसल करें- अगर आपने पॉलिसी कैंसल करने का फैसला कर लिया है तो सिर्फ एजेंट को बोलने से काम नहीं चलेगा. एजेंट इस प्रोसेस में देरी कर सकता है. ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जब एजेंट फ्री-लुक पीरियड खत्म होने तक डॉक्युमेंट्स अपने पास ही रखे रहते हैं. इसलिए आप अपना फैसला सीधे कंपनी को बताएं. पॉलिसी कैंसलेशन ऐप्लिकेशन जमा करने के लिए आपको कंपनी के दफ्तर जाना चाहिए. कई कंपनियां वेबसाइट्स पर कैंसलेशन फॉर्म डालकर रखती हैं, जिसे डाउनलोड किया जा सकता है.
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यूलिप का मामला- यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) के मामले में यदि कोई फ्री-लुक अवधि में पॉलिसी रद्द करने का निर्णय लेता है तो उसे कम से कम गैर-आवंटित प्रीमियम के बराबर राशि मिलेगी. इसके अलावा यूनिट रद्द करने पर लगाए गए शुल्क, रद्द करने की तारीख पर फंड का मूल्य मिलेगा जिसमें से खर्चे काट लिए जाएंगे. ऐसा तब होगा जब पॉलिसी आपत्ति के कारण के साथ लौटाई जाती है.

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प्रीमियम के फुल रिटर्न की उम्मीद न करें- कैंसलेशन कराने पर भी प्रीमियम की पूरी रकम का रिफंड नहीं होगा. यहां तक कि अगर आप फ्री-लुक पीरियड के दौरान पॉलिसी रिटर्न करते हैं तो भी कंपनी मेडिकल टेस्ट और स्टांप ड्यूटी का खर्च काटकर ही पैसे लौटाएगी.
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