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2024 में नहीं डाला वोट तो बैंक अकाउंट से कट जाएंगे 350 रुपये! जानिए क्‍या है सच्‍चाई

चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि आम चुनाव 2024 में वोट नहीं डालने वाले मतदाता के बैंक अकाउंट से 350 रुपये काट लिए जाएंगे.
चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि आम चुनाव 2024 में वोट नहीं डालने वाले मतदाता के बैंक अकाउंट से 350 रुपये काट लिए जाएंगे.

एक लेख में दावा किया गया है कि लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) में जो मतदाता अपने मताधिकार (Voting Rights) का प्रयोग नहीं करेंगे, चुनाव आयोग (Election Commission) उनके बैंक खातों से ₹350 काट लेगा. साथ ही कहा गया है कि वोट नहीं डालने वालों की पहचान आधारकार्ड के जरिये होगी. आइए जानते हैं क्‍या है पूरा मामला और इस दावे में कितनी सच्‍चाई है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 6:15 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार (Central Government) समेत तमाम राज्‍यों व केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारें (State & UT Governments) लगातार कोशिश कर रही हैं कि हर व्‍यक्ति अपने मताधिकार (Voting Rights) का इस्‍तेमाल करे. इसके लिए चुनाव आयोग (Election Commission) मतदान केंद्रों पर सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही वोटर्स लिस्‍ट दुरुस्‍त रखने, जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही अलग-अलग तरह से लोगों को हर चुनाव में वोट डालने के लिए प्रोत्‍साहित करने की कोशिश कर रहा है. इसके बाद भी अभी तक कहीं शत-प्रतिशत नहीं हो पा रहा है. इसी बीच दावा किया जा रहा है कि अगर कोई मतदाता लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Election 2024) में वोट डालने नहीं जाएगा तो उसके बैंक अकाउंट (Bank A/C) से 350 रुपये काट लिए जाएंगे. आइए जानते हैं क्‍या है पूरा मामला?

क्‍या किया जा रहा है दावा
एक न्यूज आर्टिकल में दावा किया जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में जो मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे, चुनाव आयोग उनके बैंक खातों से ₹350 काट लेगा. साथ ही कहा गया है कि वोट नहीं डालने वालों की पहचान आधारकार्ड के जरिये होगी. इसी कार्ड से लिंक उनके बैंक अकाउंट से ये राशि काटी जाएगी. दावा किया गया है कि चुनाव आयोग ने सभी बैंकों को इस बारे में आदेश भी दे दिया है. आयोग के प्रवक्‍ता के हवाले कहा गया है कि जो मतदाता वोट डालने नहीं आते हैं, उनके लिए की गई तैयारी पर आयोग की ओर से किया गया खर्च बेकार चला जाता है. इसलिए होने वाले नुकसान की वसूली वोटर्स से ही की जाएगी. इसके लिए आयोग ने कोर्ट से पहले ही मंजूरी ले ली है ताकि बाद में कोई इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा ना खटखटा सके.


क्‍या है इस दावे की सच्‍चाई


केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले प्रेस इंफॉर्मेशन ने जब इस दावे की पड़ताल की तो पता चला कि ये खबर पूरी तरह से निराधार और फर्जी है. पीआईबी ने कहा कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है. ब्‍यूरो ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से ना तो ऐसा कोई फैसला लिया गया है और ना ही चुनाव आयोग ने बैंकों को इस संबंध में कोई आदेश जारी किया है. लिहाजा, कोर्ट की ओर से ऐसे किसी फैसले को लेकर आदेश देने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. पीआईबी ने कहा है कि उसकी पड़ताल में ये दावा शत-प्रतिशत फर्जी पाया गया है.

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ऐसे करा सकते हैं फैक्टचेक
अगर आपको भी किसी सरकारी स्कीम या नीति की सत्यता पर शक है तो इसे पीआईबी फैक्ट चेक के लिए भेज सकते हैं. आप विभिन्‍न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ई-मेल के जरिये पीआईबी फैक्ट चेक से संपर्क कर सकते हैं. वॉट्सऐप के जरिए 8799711259 पर संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा ट्विटर पर @PIBFactCheck फेसबुक पर /PIBFactCheck और ईमेल के जरिये pibfactcheck@gmail.com पर भी संपर्क कर सकते हैं.
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